Jamshedpur Tender Irregularities: मानगो नगर निगम की फाइलों में ऐसा क्या मिला कि 6.73 करोड़ के टेंडरों की जांच बैठ गई?

Jamshedpur Tender Irregularities: जमशेदपुर में मानगो नगर निगम के तहत विकास परियोजनाओं के लिए टेंडर को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। शॉर्ट-टर्म ई-टेंडर से जुड़ी फाइलों की शुरुआती समीक्षा के बाद, मेयर सुधा गुप्ता ने लगभग ₹6.73 करोड़ की कथित वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं की जांच के आदेश दिए हैं। मेयर ने शहरी विकास और आवास विभाग के प्रधान सचिव और अतिरिक्त नगर आयुक्त को पत्र लिखकर इस मामले की विस्तृत जांच की मांग की है। साथ ही, दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई करने को कहा है।

नींव रखने और टेंडर प्रक्रिया पर सवाल

शुरुआती जांच में इस बात पर भी सवाल उठे हैं कि कुछ विकास परियोजनाओं की आधारशिला कथित तौर पर टेंडर प्रक्रिया पूरी होने या वर्क ऑर्डर जारी होने से पहले ही रख दी गई थी। मेयर ने कहा कि ऐसी आशंका है कि कुछ मामलों में, नव-निर्वाचित बोर्ड की सहमति लेने से पहले ही पिछली तारीख (बैकडेट) डालकर टेंडर जारी किए गए थे। पूरी प्रक्रिया की वैधता स्पष्ट करने के लिए इन पहलुओं की विस्तृत जांच की जाएगी।

फाइल समीक्षा के दौरान मिलीं कथित गड़बड़ियां

मेयर की शुरुआती समीक्षा में दावा किया गया है कि कुछ सरकारी रिकॉर्ड और पत्र गायब थे। इसके अलावा, समझौतों से जुड़े दस्तावेज कथित तौर पर अनिवार्य प्रक्रियाओं को पूरा किए बिना तैयार किए गए थे, और कुछ रिकॉर्ड अधूरे पाए गए। समीक्षा में यह भी आरोप लगाया गया है कि टेंडर प्रक्रिया से जुड़े कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर निर्धारित समय के काफी बाद किए गए थे। संबंधित विभाग अब इन सभी बिंदुओं की जांच करेगा।

सड़क चौड़ीकरण की दो परियोजनाएं जांच के दायरे में

मुख्य रूप से सड़क चौड़ीकरण की दो परियोजनाओं की जांच की जा रही है। इनमें पायल सिनेमा से परडीह चौक (वार्ड नंबर 9) और मैंगो चौक से परडीह चौक (वार्ड नंबर 8) तक सड़क चौड़ीकरण और नाली निर्माण की योजनाएं शामिल हैं। दोनों परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत लगभग ₹6.73 करोड़ बताई गई है। इन विशिष्ट परियोजनाओं के लिए टेंडर प्रक्रिया के दौरान नियमों के पालन को लेकर आरोप लगाए गए हैं।

मेयर ने पारदर्शी जांच पर जोर दिया।

मेयर सुधा गुप्ता ने कहा कि नगर निगम में पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि अगर जांच में किसी अधिकारी, कर्मचारी या ठेकेदार की संलिप्तता पाई जाती है, तो उनके खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। इस बीच, इस मामले पर अतिरिक्त नगर आयुक्त जितेंद्र यादव का पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। अन्य अधिकारियों ने भी इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी करने से परहेज किया।

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