पटना : बिहार में नीतीश सरकार अभी 15 साल ‘बेमिसाल’ मना रही है, वहीं नीति आयोग की रिपोर्ट ने नीतीश सरकार के जश्न को फिका कर दिया है. नीति आयोग ने नेशनल मल्टीडाइमेंशनल पॉवर इंडेक्स बेसलाइन रिपोर्ट जारी की है. इस रिपोर्ट के अनुसार, गरीबी, न्यूट्रिशन, मैटरनल हेल्थ, स्कूल अटेंडेंस, कुकिंग फ्यूल और इलेक्ट्रिसिटी के मामले में बिहार देश में सबसे नीचे है. अब नीति आयोग की रिपोर्ट आने के बाद बिहार में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है.
नीति आयोग की रिपोर्ट से जेडीयू नाराज

नीति आयोग की रिपोर्ट आने के बाद मुख्यमत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू काफी नाराज है. जेडीयू के वरिष्ठ नेता राजीव रंजन ने कहा कि निति आयोग के नए तालिका के निर्धारण जो हुआ है ऐसा लगता है कि बिहार में जो पिछले 16 वर्षाें में जो अभूतपूर्व विकास हुआ है, इसमें कई ऐसे क्षेत्र हैं जो उनके आंकड़ों में परिलक्षित नहीं है. नीति आयोग आंकड़ों का निर्धारण किस आधार पर करते हैं ये तमाम तथ्य रहस्य के घेरे में है.
राजीव रंजन ने कहा कि मैं ये जरूर कहना चाहूंगा स्वास्थ्य, शिक्षा, आधारभूत संरचना, लोगों तक पीने का पानी, बिजली, शराबबंदी और शराबबंदी के फैसले के बाद जो बिहार में बदलाव की बयार बही है, अगर इन सभी सकारात्मक बिंदुओं पर नीति आयोग के अधिकारियों की दृष्टि नहीं है, ये दुर्भाग्यपूर्ण है. जिस तरह से एक अविकसित राज्य से विकास के नए आयाम बिहार ने गढ़े हैं. इसका श्रेय बिहार को आवश्यक देना चाहिए. ये बिहार के ज्यादातर लोग मानते हैं कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार ने अविश्वसनीय छलांग लगाई है.
राजद ने नीतीश सरकार को घेरा

नीति आयोग की रिपोर्ट आने के बाद राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि अब क्या कहेंगे जेडीयू के लोग, अभी कह रहे थे 15 साल बेमिसाल. अब तो नीति आयोग के सूचकांक में भी बिहार फिसड्डी साबित हो गया. क्या इसी के लिए बेमिसाल है? इसका मिसाल तो अद्भुत है कि बिहार लगातार निति आयोग के रिपोर्ट में फिसड्डी साबित हो रहा है. नीचे से टॉप कर रहा है और जेडीयू कह रही 15 वर्षाे में बेमिसाल बिहार. तो क्या इसी बात के लिए बेमिसाल हुआ है बिहार का? 15 वर्ष के एनडीए सरकार में बिहार का बदहाल हुआ है. बिहार के जनता का बुरा हाल हुआ और एनडीए मालामाल हुआ है.
रिपोर्ट : शक्ति
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