Jharkhand DGP Tadasha Mishra: DGP तदाशा मिश्रा की नियुक्ति पर क्यों उठे सवाल? सुप्रीम कोर्ट में एमिकस क्यूरी ने दाखिल की रिपोर्ट

Jharkhand DGP Tadasha Mishra: झारखंड की पुलिस महानिदेशक (DGP) तदाशा मिश्रा की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गंभीर सवाल उठाए गए हैं। मामले में कोर्ट की सहायता कर रहे एमिकस क्यूरी और वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन ने अपनी रिपोर्ट दाखिल की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि तदाशा मिश्रा की पूर्णकालिक DGP के रूप में नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह बनाम भारत सरकार मामले में तय सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। यह मामला भाजपा के वरिष्ठ नेता और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी तथा अखिल भारतीय आदिम जनजाति विकास समिति की ओर से दाखिल याचिकाओं से जुड़ा है। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ 7 सितंबर 2026 को करेगी।

DGP नियुक्ति में छह महीने की सेवा अवधि का मुद्दा

विवाद का प्रमुख बिंदु तदाशा मिश्रा की DGP पद पर नियुक्ति के समय उनकी बची हुई सेवा अवधि है। प्रकाश सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस सुधारों से संबंधित दिशा-निर्देशों में कहा था कि DGP पद के लिए चुने जाने वाले अधिकारी की सेवानिवृत्ति में कम से कम छह महीने का समय शेष होना चाहिए। एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट के अनुसार, तदाशा मिश्रा को पूर्णकालिक DGP के पद पर उनकी सेवानिवृत्ति से ठीक एक दिन पहले नियुक्त किया गया था। इसके बाद उन्हें दो वर्ष का अतिरिक्त कार्यकाल दिया गया। रिपोर्ट में इसी आधार पर नियुक्ति को प्रकाश सिंह फैसले में तय सिद्धांतों के विपरीत बताया गया है। अब सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे पर सुनवाई के दौरान नियुक्ति की प्रक्रिया और लागू नियमों पर चर्चा होने की संभावना है।

झारखंड के 2025 के DGP नियमों पर भी सवाल

मामला केवल तदाशा मिश्रा की नियुक्ति तक सीमित नहीं है। एमिकस क्यूरी ने झारखंड सरकार की ओर से वर्ष 2025 में बनाए गए ‘झारखंड पुलिस महानिदेशक चयन और नियुक्ति नियम, 2025’ के प्रावधानों पर भी आपत्ति जताई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि झारखंड में DGP के चयन के लिए बनाई गई व्यवस्था UPSC की सामान्य प्रक्रिया से अलग है। इसी अंतर को लेकर एमिकस क्यूरी ने अपनी रिपोर्ट में सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, UPSC की व्यवस्था में DGP पद के लिए तीन अधिकारियों के नाम का पैनल भेजने का प्रावधान है, जबकि झारखंड के 2025 के नियमों में पांच नामों का पैनल भेजने की व्यवस्था की गई है।

DGP को हटाने के प्रावधान पर भी आपत्ति

एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट में DGP को पद से हटाने के लिए राज्य सरकार को दी गई शक्तियों पर भी सवाल उठाया गया है। रिपोर्ट में विशेष रूप से नियम 10(1)(d) का उल्लेख किया गया है। इस प्रावधान के तहत ‘कर्तव्य पालन में असमर्थता’ के आधार पर DGP को हटाने की व्यवस्था है। एमिकस क्यूरी ने आशंका जताई है कि इस प्रावधान का इस्तेमाल DGP पर अनुचित राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, इस तरह की शक्ति DGP के दो वर्ष के निश्चित कार्यकाल की सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, इस मामले में अंतिम स्थिति सुप्रीम कोर्ट के निर्णय और उसके निर्देशों से स्पष्ट होगी।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी नजर

तदाशा मिश्रा की नियुक्ति और झारखंड के DGP चयन एवं नियुक्ति नियमों से जुड़े सवालों पर अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ 7 सितंबर को मामले की सुनवाई करेगी। सुप्रीम कोर्ट के सामने मुख्य मुद्दों में DGP नियुक्ति के समय अधिकारी की शेष सेवा अवधि, राज्य के 2025 के नियुक्ति नियम और DGP को हटाने से संबंधित प्रावधान शामिल हैं। एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट में उठाई गई आपत्तियों पर सुनवाई के दौरान संबंधित पक्ष अपना पक्ष रखेंगे। इसके बाद कोर्ट की ओर से दिए जाने वाले निर्देश से झारखंड में DGP नियुक्ति की प्रक्रिया और राज्य के नए पुलिस नियमों को लेकर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

नियुक्ति प्रक्रिया और पुलिस सुधारों पर बढ़ा ध्यान

DGP पद की नियुक्ति को लेकर यह मामला पुलिस प्रशासन में नियुक्ति प्रक्रिया और निश्चित कार्यकाल से जुड़े व्यापक सवालों से भी जुड़ा है। प्रकाश सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से तय किए गए सिद्धांतों का उद्देश्य पुलिस प्रशासन में पारदर्शिता और स्थिरता से संबंधित व्यवस्था को मजबूत करना रहा है। अब झारखंड में DGP की नियुक्ति और वर्ष 2025 के नियमों को लेकर उठाई गई आपत्तियों पर सुप्रीम कोर्ट का रुख महत्वपूर्ण होगा। 7 सितंबर की सुनवाई के बाद इस मामले की आगे की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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