Jharkhand High Court: Mutation से तय नहीं होगा जमीन का Ownership, सिविल कोर्ट ही करेगी मालिकाना हक का फैसला

झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि म्यूटेशन, जमाबंदी और लगान रसीद से जमीन का मालिकाना हक साबित नहीं होता। स्वामित्व विवाद का फैसला केवल सिविल कोर्ट ही कर सकती है।


Jharkhand High Court रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने जमीन के मालिकाना हक को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि केवल दाखिल-खारिज (म्यूटेशन), जमाबंदी या लगान रसीद के आधार पर किसी व्यक्ति का जमीन पर स्वामित्व तय नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि ये दस्तावेज केवल राजस्व अभिलेखों के रखरखाव के लिए होते हैं और इनका उद्देश्य मालिकाना हक निर्धारित करना नहीं है।

Jharkhand High Court:स्वामित्व विवाद का फैसला केवल सिविल कोर्ट कर सकती है

चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने हजारीबाग जिले के दारू अंचल स्थित मौजा काबिलासी की करीब 24.79 एकड़ जमीन से जुड़े पुराने विवाद की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की।

कोर्ट ने कहा कि यदि किसी जमीन पर दो या अधिक पक्ष मालिकाना हक का दावा करते हैं तो ऐसे विवाद में साक्ष्यों की विस्तृत जांच आवश्यक होती है। इस प्रकार के मामलों का अंतिम निर्णय केवल सक्षम सिविल कोर्ट ही कर सकती है।


Key Highlights:

  • झारखंड हाईकोर्ट ने म्यूटेशन को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।

  • म्यूटेशन, जमाबंदी और लगान रसीद से मालिकाना हक साबित नहीं होता।

  • जमीन के स्वामित्व विवाद का निपटारा केवल सिविल कोर्ट करेगी।

  • हजारीबाग की 24.79 एकड़ जमीन विवाद मामले में अपील खारिज।

  • हाईकोर्ट ने एकलपीठ के फैसले को सही ठहराया।


Jharkhand High Court:एकलपीठ का फैसला बरकरार, अपील खारिज

सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि म्यूटेशन की प्रविष्टियां और लगान रसीदें केवल राजस्व रिकॉर्ड के लिए होती हैं। इनसे किसी व्यक्ति का कानूनी स्वामित्व सिद्ध नहीं किया जा सकता।

इसी आधार पर अदालत ने पहले दिए गए एकलपीठ के फैसले को सही ठहराते हुए किशोरी साह समेत आठ लोगों की ओर से दायर अपील को खारिज कर दिया।

यह फैसला जमीन से जुड़े स्वामित्व विवादों में एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल माना जा रहा है।


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