झारखंड हाईकोर्ट ने नीड बेस्ड असिस्टेंट प्रोफेसरों के न्यूनतम वेतनमान और वेतन कटौती के मामले में राज्य सरकार से 10 मई 2023 के संकल्प की वैधता पर जवाब मांगा है।
Jharkhand High Court रांची: झारखंड में कॉन्ट्रैक्ट पर नियुक्त नीड बेस्ड असिस्टेंट प्रोफेसरों के न्यूनतम वेतनमान और वेतन कटौती का मामला झारखंड हाईकोर्ट पहुंच गया है। अदालत ने राज्य सरकार से पूछा है कि जब याचिकाकर्ता यूजीसी रेगुलेशन के तहत न्यूनतम वेतनमान का दावा कर रहे हैं, तो ऐसी स्थिति में 10 मई 2023 के उस सरकारी संकल्प की कानूनी वैधता क्या है, जिसके आधार पर क्लास नहीं लेने वाले असिस्टेंट प्रोफेसरों के वेतन में कटौती की जा रही है।
जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने मामले में न्यूनतम पे-स्केल के अधिकार को मुख्य सवाल माना है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, मामले की अगली सुनवाई 28 अगस्त निर्धारित की गयी थी।
Jharkhand High Court:क्या है नीड बेस्ड असिस्टेंट प्रोफेसरों का पूरा विवाद
कॉन्ट्रैक्ट पर नियुक्त असिस्टेंट प्रोफेसरों का पक्ष है कि उन्हें यूजीसी के निर्धारित न्यूनतम वेतनमान का लाभ मिलना चाहिए। दूसरी ओर, राज्य सरकार की ओर से जारी 10 मई 2023 के संकल्प के आधार पर क्लास नहीं लेने की स्थिति में वेतन में कटौती का प्रावधान लागू किया जा रहा है।
याचिकाकर्ताओं ने इसी व्यवस्था को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया है। अदालत ने सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा है कि यूजीसी रेगुलेशन के तहत न्यूनतम वेतनमान के दावे की स्थिति में राज्य सरकार का यह संकल्प किस कानूनी आधार पर लागू है।
Key Highlights
- नीड बेस्ड असिस्टेंट प्रोफेसरों के न्यूनतम वेतनमान का मामला हाईकोर्ट पहुंचा।
- वेतन कटौती के लिए 10 मई 2023 के सरकारी संकल्प पर सवाल उठाया गया है।
- हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से संकल्प की कानूनी वैधता पर जवाब मांगा है।
- याचिकाकर्ता यूजीसी रेगुलेशन के तहत न्यूनतम वेतनमान की मांग कर रहे हैं।
- सुप्रीम कोर्ट के 22 अगस्त 2025 के फैसले को भी मामले में अहम बताया गया है।
Jharkhand High Court:यूजीसी रेगुलेशन में मानदेय को लेकर क्या है प्रावधान
याचिकाकर्ताओं की ओर से यूजीसी के दिशा-निर्देशों का हवाला दिया गया है। इसके अनुसार, अनुबंध के आधार पर नियुक्त शिक्षक को दिया जाने वाला मानदेय नियमित रूप से नियुक्त असिस्टेंट प्रोफेसर के कुल मासिक ग्रॉस वेतन से कम नहीं होना चाहिए।
इसके अलावा अनुबंध पर नियुक्त शिक्षकों के लिए योग्यता और चयन प्रक्रिया भी नियमित शिक्षकों के लिए लागू नियमों के अनुरूप रखे जाने का प्रावधान बताया गया है। प्रारंभिक अनुबंध एक शैक्षणिक सत्र से अधिक अवधि का नहीं होना चाहिए।
Jharkhand High Court:सुप्रीम कोर्ट के फैसले को भी बताया गया अहम
कॉन्ट्रैक्ट असिस्टेंट प्रोफेसरों के वेतन से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट के 22 अगस्त 2025 के फैसले का भी हवाला दिया गया है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने अपीलों को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए कॉन्ट्रैक्ट असिस्टेंट प्रोफेसरों को असिस्टेंट प्रोफेसरों के लिए स्वीकार्य न्यूनतम पे-स्केल का हकदार माना था।
अदालत ने रिट याचिका दाखिल करने से पहले के तीन वर्षों के बकाये के भुगतान का भी निर्देश दिया था। झारखंड हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई में इसी कानूनी स्थिति और यूजीसी के प्रावधानों के संदर्भ में नीड बेस्ड असिस्टेंट प्रोफेसरों के वेतनमान का मुद्दा विचाराधीन है।

















