झारखंड राज्यसभा चुनाव से पहले महागठबंधन में दूसरी सीट को लेकर खींचतान तेज हो गई है। भाकपा-माले ने अपनी दावेदारी पेश की है, जबकि कांग्रेस और झामुमो इसे संख्या बल का मामला बता रहे हैं।
Jharkhand Rajya Sabha Election रांची: झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाले चुनाव से पहले सत्तारूढ़ महागठबंधन के भीतर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। विधानसभा में मौजूद संख्या बल के आधार पर एक सीट पर झामुमो की जीत लगभग तय मानी जा रही है, लेकिन दूसरी सीट को लेकर गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच खींचतान शुरू हो गई है। अब तक कांग्रेस इस सीट पर अपना स्वाभाविक दावा मानकर चल रही थी, लेकिन भाकपा-माले ने अपनी दावेदारी पेश कर राजनीतिक समीकरणों को नया मोड़ दे दिया है।
Jharkhand Rajya Sabha Election: भाकपा-माले ने विनोद सिंह के नाम पर ठोका दावा
भाकपा-माले ने दूसरी राज्यसभा सीट के लिए अपने वरिष्ठ नेता और तीन बार के पूर्व विधायक विनोद सिंह का नाम आगे बढ़ाया है। पार्टी का तर्क है कि महागठबंधन को मजबूत बनाए रखने और विपक्ष के खिलाफ मजबूती से खड़े रहने में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है, इसलिए उसे राज्यसभा में प्रतिनिधित्व का अवसर मिलना चाहिए।
पार्टी के प्रदेश सचिव मनोज भक्त ने कहा है कि एक सीट पर झामुमो अपना उम्मीदवार उतारे, जबकि दूसरी सीट भाकपा-माले को दी जाए। उनका कहना है कि गठबंधन के एक मजबूत सहयोगी के रूप में पार्टी इस सम्मान की हकदार है।
Key Highlights
झारखंड की दो राज्यसभा सीटों को लेकर महागठबंधन में सियासी हलचल।
भाकपा-माले ने दूसरी सीट पर वरिष्ठ नेता विनोद सिंह के नाम की दावेदारी पेश की।
झामुमो और कांग्रेस ने संख्या बल का हवाला देते हुए प्रस्ताव को अव्यावहारिक बताया।
महागठबंधन के पास दोनों सीटें जीतने के लिए आवश्यक 56 विधायकों का समर्थन।
भाजपा भी उम्मीदवार चयन को लेकर रणनीति बनाने में जुटी।
Jharkhand Rajya Sabha Election: सहयोगी दलों का जवाब: यहां संख्या बल मायने रखता है
हालांकि भाकपा-माले का यह प्रस्ताव महागठबंधन के अन्य दलों को स्वीकार्य नहीं दिख रहा है। झामुमो और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने अनौपचारिक बातचीत में इसे अव्यावहारिक बताया है। उनका स्पष्ट कहना है कि राज्यसभा चुनाव में भावनाओं या राजनीतिक सद्भावना से अधिक महत्व विधायकों की संख्या का होता है।
कांग्रेस और झामुमो नेताओं का मानना है कि विधानसभा में दोनों दलों की ताकत के मुकाबले माले के सिर्फ दो विधायक हैं, इसलिए सीटों के बंटवारे में संख्या बल को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
Jharkhand Rajya Sabha Election: समझिए चुनावी गणित
झारखंड विधानसभा की कुल 81 सीटों में वर्तमान में महागठबंधन के पास 56 विधायक हैं। इनमें झामुमो के 34, कांग्रेस के 16, राजद के 4 और भाकपा-माले के 2 विधायक शामिल हैं।
राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए प्रथम वरीयता के 28 वोटों की आवश्यकता होती है। इस हिसाब से दो सीटों के लिए कुल 56 वोट चाहिए और महागठबंधन के पास ठीक उतने ही विधायक हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भाकपा-माले के दोनों विधायक मतदान से दूरी बनाते हैं, तो महागठबंधन का आंकड़ा 54 पर आ जाएगा। ऐसी स्थिति में दूसरी सीट की जीत के लिए क्रॉस वोटिंग या अन्य समीकरणों पर निर्भरता बढ़ सकती है।
Jharkhand Rajya Sabha Election: वर्तमान में भाकपा-माले के दो विधायक हैं:
- अरूप चटर्जी
- चंद्रदेव महतो
भाजपा भी बना रही रणनीति
इधर विपक्षी दल भाजपा भी राज्यसभा चुनाव को लेकर सक्रिय हो गई है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू को पार्टी नेतृत्व ने दिल्ली तलब किया है। वह 1 जून को दिल्ली रवाना होंगे, जहां 1 और 2 जून को शीर्ष नेतृत्व के साथ उम्मीदवार चयन को लेकर चर्चा होगी।
सूत्रों के अनुसार बैठक के बाद भाजपा अपने राज्यसभा उम्मीदवार के नाम की घोषणा कर सकती है। विधानसभा में भाजपा के पास 21 विधायक हैं और वह चुनावी समीकरणों पर करीबी नजर बनाए हुए है।
Jharkhand Rajya Sabha Election: दूसरी सीट पर बढ़ सकती है राजनीतिक सौदेबाजी
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव के लिए अभी नामांकन और उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया बाकी है। ऐसे में दूसरी सीट को लेकर महागठबंधन के भीतर बातचीत और राजनीतिक मोलभाव का दौर तेज हो सकता है। भाकपा-माले की दावेदारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस बार राज्यसभा चुनाव सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि गठबंधन की आंतरिक राजनीति की भी बड़ी परीक्षा बनने जा रहा है।
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