झारखंड में बालू संकट गहराता जा रहा है। 17 बालू घाटों की लीज फाइनल होने के बावजूद CTO लंबित है। NGT रोक से पहले अवैध खनन और जमाखोरी तेज हो गई है।
Jharkhand Sand Crisis रांची/जमशेदपुर: झारखंड में फिलहाल लोगों को सस्ता बालू मिलने की उम्मीद टूटती नजर आ रही है। सरकार ने 10 जून से लागू होने वाली एनजीटी की रोक से पहले जल्दबाजी में 17 बालू घाटों की लीज डीड फाइनल की थी, ताकि करीब दो करोड़ सीएफटी बालू का स्टॉक किया जा सके। लेकिन अब यह पूरी योजना प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में अटकी फाइलों के कारण अधर में लटक गई है।
जानकारी के मुताबिक, जिन घाटों की लीज फाइनल की गई है, उन्हें अब तक कंसेट टू ऑपरेट (CTO) जारी नहीं किया गया है। बिना CTO के किसी भी घाट से वैध रूप से बालू खनन संभव नहीं है। ऐसे में सरकार की तैयारी शुरू होने से पहले ही प्रभावित होती दिख रही है।
Key Highlights
17 बालू घाटों की लीज फाइनल, लेकिन अब तक नहीं मिला CTO
10 जून से पहले दो करोड़ CFT बालू स्टॉक करने की थी तैयारी
राज्यभर में अवैध खनन और जमाखोरी जारी
444 घाटों में से केवल 17 घाटों की लीज डीड फाइनल
ग्राम सभा अनुमति और प्रशासनिक देरी से टेंडर प्रक्रिया प्रभावित
Jharkhand Sand Crisis:प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में फंसी प्रक्रिया
झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष राजीव लोचन बक्शी ने कहा कि उनके स्तर पर कोई भी CTO लंबित नहीं है। उन्होंने बताया कि आवेदन मिलने के बाद 120 दिनों के भीतर CTO जारी करने का प्रावधान है। हालांकि जमीनी स्तर पर अभी तक खनन शुरू नहीं होने से बालू कारोबारियों और आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ गई है।
उधर, राज्यभर में बालू संकट लगातार गहराता जा रहा है। हालात यह हैं कि बालू माफिया बड़े पैमाने पर अवैध खनन कर स्टॉक जमा कर रहे हैं। आशंका जताई जा रही है कि NGT की रोक लागू होने के बाद यही बालू ऊंचे दामों पर बेचा जाएगा।
Jharkhand Sand Crisis:कोडरमा में खुलेआम अवैध खनन, कार्रवाई नहीं
कोडरमा जिले के मरकच्चो प्रखंड स्थित सकरी नदी से रोजाना करीब 100 ट्रैक्टरों के जरिए अवैध रूप से बालू उठाव किया जा रहा है। खास बात यह है कि इस घाट का अब तक टेंडर भी नहीं हुआ है। इसके बावजूद खुलेआम खनन जारी है।
जिला प्रशासन की ओर से डीसी के नेतृत्व में टास्क फोर्स भी गठित है, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हो रहा। अवैध खनन का यह खेल लगातार जारी है।
Jharkhand Sand Crisis:जानिए कैसे होती है बालू घाट से खनन की पूरी प्रक्रिया
नई व्यवस्था के तहत सबसे पहले जिला प्रशासन बालू घाटों का टेंडर करता है। टेंडर फाइनल होने के बाद संबंधित एजेंसी को राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (सिया) से पर्यावरण स्वीकृति लेनी होती है।
शेड्यूल एरिया में पेसा कानून के तहत ग्राम सभा की अनुमति भी अनिवार्य होती है। इसके बाद माइनिंग प्लान के अनुसार लीज डीड फाइनल होती है और फिर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से CTO प्राप्त करना पड़ता है। इन सभी प्रक्रियाओं के बाद ही वैध खनन शुरू किया जा सकता है।
Jharkhand Sand Crisis:इस बार डीलर के जरिए मिलेगा वैध बालू
सरकार की नई व्यवस्था के अनुसार, जिन एजेंसियों को घाटों का टेंडर मिला है, वे पहले स्टॉक यार्ड में बालू जमा करेंगी। इसके बाद बिक्री के लिए छोटे-छोटे डीलर नियुक्त किए जाएंगे।
जरूरतमंद उपभोक्ता सीधे डीलर से संपर्क करेंगे। डीलर खनन विभाग के जेम पोर्टल पर राशि जमा करेंगे, जिसके बाद चालान जारी होगा। इसके आधार पर सरकारी दर पर बालू उपलब्ध कराया जाएगा।
Jharkhand Sand Crisis:ग्राम सभा में देरी बनी बड़ी वजह
राज्य में कुल 444 कैटेगरी-2 बालू घाट हैं। इनमें से अब तक 299 घाटों का टेंडर हुआ है, जबकि केवल 35 घाटों को पर्यावरण स्वीकृति मिली है। सबसे बड़ी समस्या ग्राम सभा की अनुमति को लेकर सामने आई।
हाईकोर्ट ने 15 जनवरी को बालू घाटों की नीलामी पर लगी रोक हटाई थी, लेकिन कई जिलों में डीसी स्तर से अनुमति नहीं मिलने के कारण तीन महीने तक ग्राम सभा की बैठक ही नहीं हो सकी। इससे 199 घाटों का टेंडर अटक गया।
इसके अलावा लीज डीड का प्रारूप भी समय पर तय नहीं हो पाया। बताया जा रहा है कि 15 मई को इसका अंतिम प्रारूप तैयार हुआ, जिसके बाद अब तक सिर्फ 17 लीज डीड ही फाइनल हो सकी हैं।
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