जानिए बाल पत्रकारों के बेबाक सवाल पर सीएम हेमंत ने क्या दिया जवाब

जानिए बाल पत्रकारों के बेबाक सवाल पर सीएम हेमंत ने क्या दिया जवाब

मेरे पिता मेरे प्रेरणा स्रोत, खेल के क्षेत्र में युवाओं को दिशा दे रही हमारी सरकार

रांची : बाल दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को कांके रोड रांची स्थित

मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में यूनिसेफ के बाल पत्रकारों से मुलाकात की.

मुख्यमंत्री ने बाल पत्रकारों को प्रेस कांफ्रेंस आयोजित कर स्पोर्ट्स, समावेश और विविधता,

जो कि इस वर्ष के बाल दिवस का थीम है पर सवाल पूछने का अवसर दिया.

इस कार्यक्रम में रांची जिले के 7 प्रखंडों के बीच 20 बाल पत्रकार शामिल हुए,

जिन्होंने मुख्यमंत्री से कई मुद्दों पर गंभीरता से चर्चा की. मौके पर यूनिसेफ झारखंड की

प्रमुख डॉ कनीनिका मित्र, यूनिसेफ की संचार विशेषज्ञ आस्था अलंग उपस्थित थीं.

अनन्या केसरी ने पूछा कि सर, आप बचपन क्या बनना चाहते थे

इस पर मुख्यमंत्री हेमंत ने कहा कि आमतौर पर बचपन में  मुख्यमंत्री या मंत्री

बनने के विषय पर नहीं सोचे थे. मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि मैं ऐसे परिवार से आता हूं

जहां मेरे पिताजी दिशोम गुरु शिबू सोरेन एक आंदोलनकारी रहे हैं.

आंदोलनकारी और पॉलीटिशियन में बहुत अंतर है. हमारे पिताजी और परिवार के

साथ कई ऐसे घटनाक्रम घटे जहां से राजनीति की शुरुआत हुई.

संयोग से मैं राजनीतिक क्षेत्र में आया. राजनीति के क्षेत्र में आने के बाद राज्य की जनता ने

आज मुझे मुख्यमंत्री बनाया. मैं अपने आप को सौभाग्यशाली मानता हूं कि

मुझे झारखंड की जनता ने राज्य के मुख्य सेवक के रूप में सेवा देने का मौका दिया है.

अनुप्रिया कुमारी ने पूछा- कुछ माता-पिता अपने बेटियों को खेलने से करते हैं मना

मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं अपनी ओर से उन सभी बच्चियों के माता-पिता से आग्रह करता हूं कि

जो बच्चियां खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहती हैं उन्हें जरूर मौका दें.

बच्चियों को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने से रोकें नहीं. मुख्यमंत्री ने कहा कि पढ़ाई लिखाई

जीवन में जितनी जरूरी है उतनी ही जरूरी खेल भी है. खेल के क्षेत्र में बच्चे अब अपना करियर के साथ-साथ परिवार और देश-दुनिया में राज्य का नाम भी रोशन कर रहे हैं.

शिवम प्रमाणिक ने पूछा- बाल अधिकारों को सुनिश्चित करना कितना महत्वपूर्ण?

सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि बाल अधिकार सुनिश्चित होना महत्वपूर्ण विषय है. हमारी सरकार का प्रयास है कि हरसंभव बाल अधिकारों का संरक्षण हो. बाल अधिकार पहले भी जरूरी था अब भी है और आगे भी रहेगा. बच्चों के अधिकारों को उन तक पहुंचाना सुनिश्चित किए जाएंगे तभी बच्चे भविष्य में अच्छा कर सकेंगे.

बाल पत्रकार डिंपल कुमारी ने खेल प्रोत्साहन को लेकर पूछा ये सवाल

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने राज्य में खेल प्रोत्साहन के लिए कई सारे पहल किए हैं. मुख्यमंत्री ने फुटबॉल खिलाड़ी अष्टम उरांव का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य में कई बच्चियां हैं जिन्होंने फुटबॉल के क्षेत्र में परिवार और राज्य का नाम रोशन किया है. झारखंड की कई महिला खिलाड़ियों ने हॉकी, तीरंदाजी, फुटबॉल सहित कई खेल में सीमित संसाधनों के साथ अपने करियर को उड़ान दिया है. अभाव में भी अपने हुनर को आगे बढ़ाया है. हमारी सरकार झारखंड के सभी खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत है. हमने खेल नीति के तहत नेशनल इंटरनेशनल पदक विजेताओं को नौकरी में भी आरक्षण देने का काम किया है. पंचायत, प्रखंड एवं जिला स्तर में खेल मैदान बनाए जा रहे हैं.

बचपन में आपको कौन सा खेल पसंद था- पलक कुमारी

मुख्यमंत्री ने कहा कि मैंने बचपन में कुछ स्पोर्ट्स को छोड़कर बाकी सब खेल खेले हैं. खेलने के क्रम में कई बार गंभीर चोटें भी लगी हैं. मैं बचपन में स्विमिंग, बैडमिंटन, क्रिकेट, एथलेटिक्स इत्यादि खेलों में पार्टिसिपेंट किया है. अभी भी विधानसभा सत्र के समय विधानसभा अध्यक्ष एकादश एवं विधायक एकादश के बीच क्रिकेट मैच का आयोजन होता है. वहां भी मैं पार्टिसिपेंट करता हूं. हालांकि अब व्यस्तता रहने के कारण कोई भी खेल लगातार नहीं खेल पाता हूं.

बाल पत्रकारों: करण कुमार ओझा ने पूछा आपकी सफलता के पीछे किनका महत्वपूर्ण योगदान है?

सीएम हेमंत ने कहा कि मेरी सफलता में सबसे पहले मेरे माता-पिता का योगदान रहा है फिर मेरी पत्नी का भी सपोर्ट काफी रहा. मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं 24 में से 20 घंटे राज्य की जनता की सेवा लिए समर्पित रहता हूं. व्यस्तता रहने के कारण परिवार एवं बच्चों को ज्यादा समय नहीं दे पाता हूं. मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों को ऐसा लगता है कि राजनीति अच्छा और ग्लैमर है परंतु मैं जानता हूं कि राजनीति बिल्कुल इनके विपरीत है.

फुटबॉलर अष्टम उरांव ने खेल अनुभव का किया साझा

मौके पर उपस्थित अंडर-17 फीफा विश्व कप 2022 में भारत का नेतृत्व करने वाली फुटबॉलर अष्टम उरांव ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपने अनुभव एवं  खेल यात्रा की यादों को साझा किया. फुटबॉल खिलाड़ी अष्टम उरांव ने कहा कि उन्होंने अपने पापा को देखकर फुटबॉल खेलना प्रारंभ किया था. 4 साल तक काफी प्रैक्टिस, मेहनत की. अष्टम उरांव ने बताया कि किस तरह से वर्तमान राज्य सरकार ने उन्हें मदद पहुंचाई.

फुटबॉलर अष्टम उरांव ने कहा कि अंडर-17 फीफा विश्व कप 2022 में टीम को जरूर हार मिली परंतु सीखने को बहुत कुछ मिला. मैं और मेरी साथी खिलाड़ियों ने मैच जरूर हारे पर जज्बा नहीं हारे. मन से कभी नहीं हारे. अष्टम उरांव ने मुख्यमंत्री की सराहना करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जी के फल से हमारे मैच हमारे पेरेंट्स ने भी लाइव देखा. अष्टम उरांव ने उपस्थित बच्चों का उत्साहवर्धन किया. इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने इस आयोजन के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रेस विज्ञप्ति तैयार करने के लिए यूनिसेफ के तीन बाल पत्रकारों हिमांशु कुमार, वैष्णवी प्रिया और लक्ष्मी कुमारी को फुटबॉल देकर पुरस्कृत किया.

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