Ranchi-चारा घोटाले के सबसे बड़े मामले (डोरंडा कोषागार) में लालू प्रसाद सहित 99 आरोपियों की किस्मत का फैसला 15 फरवरी को सीबीआई कोर्ट के द्वारा सुनाया जाएगा. इस दिन सभी आरोपियों को कोर्ट ने अदालत में पेश होने का निर्देश दिया है. लालू प्रसाद यादव भी कोर्ट में हाजिर रहेंगे, जहां उनके भाग्य का फैसला होगा.
सीबीआई की ओर से पेश किए गए गवाहों ने की पुष्टि
बता दें कि चारा घोटाला 1990 से 1996 के बीच का मामला है. तब पशुपालन विभाग में अवैध निकासी अपने चरम पर थी. इस घोटाले का मास्टरमाइंड एसबी सिन्हा को माना जाता है. सीबीआई की ओर से पेश किए गए गवाहों ने इसकी पुष्टि की है. एक प्रमुख गवाह आरके दास ने कहा कि एक बार वह एसबी सिन्हा के आवास गए हुए थे, जहां लालू प्रसाद यादव और आरके राणा, एसबी सिन्हा के बेडरूम से निकल रहे थे. उनके हाथ में काली पॉलीथिन थी, लालू यादव के हाथ में जो पॉलिथीन थी, वह फट गई और उसमें से नोटों का बंडल नीचे गिर पड़ा. आरके राणा ने रुपए को जल्दी से समेट कर उठा लिया.
जांच से बचते रहे लालू प्रसाद यादव
सीबीआई के अधिवक्ता के मुताबिक दिल्ली के कुछ कंपनियों के द्वारा सांड, हाइब्रिड बछिया, भैंस, भेड़ और बकरा आदि पशुओं की आपूर्ति की थी. इसके एवज में उन्होंने बॉक्स में भरकर करोड़ों रुपए पटना लाए थे. इसलिए सीबीआई कह रही थी कि तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव सब कुछ जानते हुए भी जांच से बचते रहे. उस समय पशुपालन मंत्री रामजीवन सिंह ने सीबीआई जांच की अनुशंसा करते हुए फाइल मुख्यमंत्री को भेज दी थी.
चारा घोटाले की कहानी यह है कि लाखों टन पशु चारा मोटरसाइकिल, स्कूटर, मोपेड आदि नन कमर्शियल व्हीकल से लाया गया था. इसके लिए देश के सभी राज्यों से करीब 150 डीटीओ-आरटीओ को गवाह बनाया गया है.
फर्जी बिल के आधार पर निकासी
सीबीआई जांच में यह भी पाया गया कि पशुपालन विभाग के बजट से 229 प्रतिशत अधिक खर्च किया गया था तथा फर्जी बिल के आधार पर निकासी की जाती थी. सीबीआई के दस्तावेजों के अनुसार दिल्ली की कुछ एजेंसियों से 16.4 लाख रुपए के 213 सांड और 65 बछिया झारखंड लाया गया था. इसके अलावा 84.93 लाख रुपए का बछिया और हाइब्रिड भैंस और 27.48 लाख रुपए के भेड़ और बकरे लाए गए थे. जिसकी आपूर्ति स्कूटर और मोपेड से हुई थी.
एक बार इस फैक्ट फाइल को भी देंखे-
डोरंडा कोषागार की फैक्ट फाइल
सीबीआई की प्राथमिकी 16 अप्रैल 1996
पहली चार्जशीट 8 मई 2001
पूरक चार्जशीट 7 जून 2003
कोर्ट ने संज्ञान लिया 8 मई 2001
आरोप गठित 16 सितंबर 2005
अभियोजन साक्ष्य 22 नवंबर 2005 से 16 मई 2019
आरोपियों का बयान 20 नवंबर 2019 से 17 जनवरी 2020
बचाव साक्ष 20 जनवरी 2020 से 26 फरवरी 2021
अभियोजन की बहस 2 मार्च 2021 से 7 अगस्त 2021
आरोपियों की बहस 9 अगस्त 2021 से 29 जनवरी 2022
अवैध निकासी की राशि 139.35 करोड़
अभियोजन की ओर से गवाह 575
दस्तावेज 16 ट्रंक
कुल आरोपी 170
मौत 55
सरकारी गवाह 7
फरार 6
दोष स्वीकार 2
बचाव पक्ष की गवाही 25
रिपोर्ट- प्रोजेश

















