Loksabha Election 2024 : कांग्रेस का गढ़ रहे अमेठी और रायबरेली को लेकर सियासी पारा काफी हाई

लखनऊ: Loksabha Election 2024 में शुक्रवार को उस समय अचानक देश में सियासी पारा काफी हाई हो गया जब कांग्रेस का गढ़ रहे यूपी के अमेठी और रायबरेली से कांग्रेस प्रत्याशियों को लेकर पत्ते खोल दिए। इन दोनों ही सीटों में कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी चुनावी रणनीति का कमान संभालेंगी। वह 6 मई से चुनाव होने तक क्षेत्र में डेरा डाले रहने की घोषणा कर चुकी हैं, हालांकि वह खुद चुनाव मैदान में बतौर प्रत्याशी नहीं उतरी हैं। वह प्रत्यक्ष तौर पर नहीं लेकिन परोक्ष तौर पर दोनों ही सीटों पर अपने प्रत्याशियों के पक्ष में चुनावी लड़ाई का कमान संभालते हुए दिखेंगी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी रायबरेली सीट से लोकसभा चुनाव में उतरे हैं। इस सीट से राहुल की मां सोनिया गांधी ने पिछले लोकसभा चुनाव में जीत हासिल की थी। इसी के साथ गांधी परिवार के करीबी माने जाने किशोरी लाल शर्मा को अमेठी लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरे हैं। इसे लेकर देश का सियासी पारा काफी हाई है।

दोनों ही सीटों में कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी चुनावी रणनीति का कमान संभालेंगी। वह 6 मई से चुनाव होने तक क्षेत्र में डेरा डाले रहने की घोषणा कर चुकी हैं, हालांकि वह खुद चुनाव मैदान में बतौर प्रत्याशी नहीं उतरी हैं।
गांधी परिवार की फाइल फोटो

रायबरेली और अमेठी रहा है गांधी परिवार का सियासत में गढ़

यूपी की हाई प्रोफाइल रायबरेली लोकसभा सीट पर उम्मीदवार को लेकर कई दिनों जारी सस्पेंस खत्म हो गया है। कांग्रेस ने रायबरेली से राहुल गांधी को चुनावी मैदान में उतारने का ऐलान कर दिया है। यह सीट पहले राहुल गांधी की मां सोनिया गांधी के पास थी जबकि अमेठी लोकसभा सीट से गांधी परिवार के वफादार किशोरी लाल शर्मा चुनाव लड़ रहे हैं। रायबरेली को गांधी परिवार का गढ़ माना जाता है। 1952-57 के दौरान, फिरोज गांधी ने इसका प्रतिनिधित्व किया, और इंदिरा गांधी 1967 से 1984 तक वहां से सांसद रहीं। सोनिया गांधी 2004 से 2024 तक संसद सदस्य रहीं। वहीं अमेठी लोकसभा सीट भी कांग्रेस और गांधी परिवार का गढ़ मानी जाती रही है। इस सीट पर 1980 में संजय गांधी ने जीत दर्ज की थी। इसके बाद 1984 में राजीव गांधी यहां से चुनावी मैदान में उतरे। 1991 तक वे यहां से सांसद रहे। 1999 में सोनिया गांधी ने अमेठी सीट से चुनावी मैदान में उतर कर जीत दर्ज की। 2004, 2009 और 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर राहुल गांधी ने जीत दर्ज की। हालांकि, 2019 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। राहुल गांधी ने अमेठी सीट पर जीत की हैट्रिक बनाई थी।

दोनों सीटों पर कांग्रेस में आखिरी समय तक जारी रहा मंथन

परंपरागत रूप से गांधी-नेहरू परिवार के सदस्यों के कब्जे वाली इन दोनों सीट पर दावेदारों के नामों को लेकर पार्टी में गुरुवार से ही विचार-विमर्श चल रहा था। भाजपा ने गुरुवार को दिनेश प्रताप सिंह को रायबरेली से अपना उम्मीदवार घोषित किया था। दिनेश प्रताप सिंह को 2019 लोकसभा चुनाव में सोनिया गांधी से हार का सामना करना पड़ा था। रायबरेली सीट सीट का प्रतिनिधित्व सोनिया गांधी ने 2004 से अब तक किया। 2019 में सोनिया गांधी ने डेढ़ लाख से ज्यादा वोटों से भाजपा के प्रत्याशी दिनेश प्रताप सिंह को इस सीट से हराया था। वह इस बार फिर रायबरेली सीट से भाजपा के उम्मीदवार हैं, मगर इस बार उनका मुकाबला राहुल गांधी से होगा। भाजपा ने गुरुवार को ही रायबरेली सीट के लिए दिनेश प्रताप सिंह के नाम पर मुहर लगाई। बीते कई दिनों ने अमेठी और रायबरेली सीटों को लेकर कांग्रेस के भीतर माथापच्ची होती रही। कांग्रेस की यूपी ईकाई ने केंद्रीय चुनाव समिति के सामने प्रस्ताव रखा था कि गांधी परिवार के सदस्य को ही अमेठी और रायबरेली सीटों पर उम्मीदवार बनाया जाए। हालांकि अंतिम फैसला कांग्रेस अध्यक्ष खरगे पर छोड़ा गया था।

कांग्रेस ने रायबरेली से राहुल गांधी को चुनावी मैदान में उतारने का ऐलान कर दिया है। यह सीट पहले राहुल गांधी की मां सोनिया गांधी के पास थी जबकि अमेठी लोकसभा सीट से गांधी परिवार के वफादार किशोरी लाल शर्मा चुनाव लड़ रहे हैं।
रायबरेली में राहुल संग प्रियंका

अमेठी और रायबरेली कांग्रेस के लिए चुनौती, राहुल की राह आसान नहीं

अमेठी से पार्टी उम्मीदवार के नाम को लेकर आखिरी वक्त तक सस्पेंस कायम कर कांग्रेस ने फायदे की तुलना में अपना नुकसान ज्यादा किया। अमेठी से राहुल या प्रियंका के नामों का टीवी चैनलों और सोशल मीडिया पर लगातार शोर चला। अब अमेठी से दोनों में से किसी के उम्मीदवार न होने के कारण स्मृति खेमे को उन्हें घेरने का मौका मिला है कि हार के डर से राहुल अमेठी से लड़ने की हिम्मत नहीं जुटा सके। अमेठी संसदीय सीट का एक विधानसभा क्षेत्र सलोन ,रायबरेली जिले का हिस्सा है। स्वाभाविक तौर पर दोनों लोकसभा सीटों के हालात एक झ्र दूसरे पर असर छोड़ते हैं। स्मृति ईरानी इन दोनों ही सीटों पर लगातार सक्रिय रही हैं। राहुल के पास कम वक्त है। उन्हें रायबरेली के साथ ही उत्तर प्रदेश सहित देश के अन्य हिस्सों में भी पार्टी के लिए प्रचार करना है। भाजपा की कोशिश रहेगी कि वो अमेठी झ्र रायबरेली के मतदान की तारीख तक राहुल को इन इलाकों में ज्यादा से ज्यादा वक्त देने को मजबूर करे।

संजय गांधी 1977 में अमेठी से हारे लेकिन 1980 में जीत दर्ज करके वापसी दर्ज की।
अमेठी में स्व. संजय गांधी की फाइल फोटो

हार के बाद भी संजय गांधी ने नहीं छोड़ी थी अमेठी, राहुल वैसा नहीं कर पाए

राहुल गांधी 2019 के बाद से अमेठी से दूरी बनाए हुए हैं। 2024 में वहां से गांधी परिवार का कोई सदस्य उम्मीदवार नहीं है। हालांकि अमेठी को यह परिवार अपना घर – परिवार बताता रहा है। तब जब गांधी परिवार उस घर -परिवार से दूर हो रहा है, उस वक्त इन रिश्तों की शुरुआत को याद किया जा सकता है। रायबरेली से फिरोज गांधी के दौर से गांधी परिवार का जुड़ाव रहा हैं। इमरजेंसी के समय इंदिरा गांधी रायबरेली से सांसद थीं। छोटे पुत्र संजय गांधी की संसदीय पारी की शुरुआत के लिए रायबरेली से सटी अमेठी सीट को काफी सुरक्षित समझा गया था। वर्ष 1976 में संजय गांधी ने खेरौना (अमेठी) में युवक कांग्रेस का एक माह का श्रमदान शिविर लगाया। अमेठी की मिट्टी से गांधी परिवार का जुड़ाव इस शिविर के जरिए हुआ। हालांकि 1977 के चुनाव में अमेठी ने संजय गांधी को निराश किया। फिर राजीव गांधी, सोनिया गांधी और राहुल गांधी यहां का प्रतिनिधित्व करते रहे। परिवार की दो पीढ़ियों के बीच अमेठी को लेकर एक अंतर साफ देखा जा सकता है। संजय गांधी 1977 में अमेठी से हारे लेकिन 1980 में जीत दर्ज करके वापसी दर्ज की। राहुल गांधी वहां से लगातार तीन जीत के बाद 2019 में हारे लेकिन 2024 में वहां से हिसाब बराबर करने के लिए आगे नहीं आ सके।

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