झारखंड सरकार राजकीय मछली मांगूर के संरक्षण और संवर्द्धन के लिए नई कार्ययोजना तैयार करेगी। 21 जुलाई को मत्स्य विभाग की बैठक में केंद्र सरकार और ICAR से सहयोग पर चर्चा होगी।
Magur Fish रांची: झारखंड सरकार अब अपनी राजकीय मछली देसी मांगूर के संरक्षण और संवर्द्धन के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार करने जा रही है। वर्ष 2025 में मांगूर को राजकीय मछली का दर्जा दिए जाने के छह महीने से अधिक समय बाद अब इसके संरक्षण, प्रजनन और उत्पादन बढ़ाने की दिशा में ठोस पहल शुरू की जा रही है। इसके लिए 21 जुलाई को मत्स्य विभाग के अधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक होगी, जिसमें केंद्र सरकार से अपेक्षित सहयोग पर चर्चा की जाएगी।
21 जुलाई को होगी महत्वपूर्ण बैठक
मत्स्य विभाग की बैठक में झारखंड में मांगूर मछली के संरक्षण और विकास को लेकर विस्तृत रिपोर्ट पेश की जाएगी। विभाग केंद्र सरकार से तकनीकी और वित्तीय सहयोग प्राप्त करने की रणनीति तैयार करेगा। साथ ही भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के सहयोग से संरक्षण और संवर्द्धन की संभावनाओं पर भी विचार किया जाएगा।
Key Highlights
2025 में मांगूर को झारखंड की राजकीय मछली घोषित किया गया था।
21 जुलाई को संरक्षण और संवर्द्धन को लेकर होगी अहम बैठक।
केंद्र सरकार और आईसीएआर से तकनीकी सहयोग लेने की तैयारी।
प्राकृतिक जलाशयों से लगभग विलुप्त हो चुकी है देसी मांगूर।
बेसलाइन सर्वे और क्लस्टर आधारित विकास योजना पर होगा काम।
प्राकृतिक जलाशयों से लगभग गायब हो चुकी है मांगूर
एक समय झारखंड के गांवों में बारिश के मौसम में धान के खेत, आहर, पोखर और छोटी नदियां देसी मांगूर मछली से भरी रहती थीं। बच्चे और किसान आसानी से इन्हें पकड़ लेते थे, लेकिन अब यह प्रजाति प्राकृतिक जलाशयों से लगभग विलुप्त हो चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से उन्होंने गांव के तालाबों और नदियों में मांगूर नहीं देखी है।
रांची, खूंटी, गुमला, सिमडेगा, पश्चिम सिंहभूम, दुमका और संताल परगना क्षेत्र कभी इस मछली के प्रमुख प्राकृतिक आवास माने जाते थे। अब इन क्षेत्रों में संरक्षण और संवर्द्धन के लिए विशेष योजना तैयार की जा रही है।
पोषण और आजीविका के लिए बेहद महत्वपूर्ण
देसी मांगूर केवल एक मछली नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पोषण सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। इसमें प्रोटीन, आयरन और आवश्यक अमीनो एसिड भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। चिकित्सक भी बीमारी से उबर रहे मरीजों को इसके सेवन की सलाह देते हैं, क्योंकि यह पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक मानी जाती है।
वेटलैंड खत्म होने से बढ़ा संकट
मत्स्य विशेषज्ञों के अनुसार देसी मांगूर अत्यंत संवेदनशील प्रजाति है, जिसे उथले, स्वच्छ और जैविक रूप से समृद्ध जलाशयों की आवश्यकता होती है। पिछले दो दशकों में आर्द्रभूमियों (वेटलैंड) के तेजी से कम होने, जलाशयों के अतिक्रमण और पर्यावरणीय बदलावों के कारण इसकी संख्या में लगातार गिरावट आई है।
बेसलाइन सर्वे और क्लस्टर मॉडल पर होगा विकास
मत्स्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार मांगूर विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुकी है। इसके संरक्षण के लिए झारखंड में बेसलाइन सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे के आधार पर विभिन्न क्षेत्रों में क्लस्टर मॉडल विकसित कर मांगूर पालन को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे इस दुर्लभ देसी प्रजाति का संरक्षण होने के साथ-साथ मत्स्य पालकों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
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