आधार कार्ड बनाना जंग जीतने से कम नहीं, प्रदेश के 580 में चार सौ केन्द्र बंद, रोज डाकघरों के चक्कर लगाने को लोग हुये मजबूर
22 Scope News desk : आधार कार्ड बनवाना या उसमें संशोधन कराना वर्तमान में किसी जंग जीतने से कम नहीं है। जबकि पूरे बिहार के 25 डिवीजन में 580 डाकघरों को आधार संचालन के लिये अधिकृत किया गया है और उनमें से सिर्फ 180 केन्द्र ही किसी तरह चल रहे हैं। वहीं 400 केन्द्र महीनों से धूँल फांक रहे हैं। खास बात यह है कि इसकों बंद करने की अधिकारिक घोषणा भी नहीं हुई है। ऐसे में डाकघरों को चक्कर लगाने को लोग मजबूर हो रहे हैं।
जीपीओ में रोज पहुँच रहे सैकड़ों लोग
लोगों की परेशानी इसी बात से समझी जा सकती है कि पटना जीपीओ में नये आधार कार्ड और आधार अपडेट कराने के लिए केवल पटना शहर ही नहीं दूसरे जिले से हर दिन पांच सौ से अधिक पहुंच रहे हैं। इनमें बुजुर्ग महिला-पुरुष, बच्चे और छात्र-छात्राएं पहुंच रही है। पटना जीपीओ के अंदर लोग रात में नंबर लगा कर अपनी बारी का इंतजार करते थे हालांकि बाद में इन लोगों के रात में प्रवेश पर रोक की भी बात कही गई थी।
बाहर के जिलों के लोग पहुँच रहे पटना
लोगों से मिली जानकारी के अनुसार पटना जीपीओ आधार सेंटर पर जमुई, विक्रमगंज, रोहतास, सासाराम, मुजफ्फरपुर, छपरा, सीवान, समस्तीपुर, गोपालगंज, बिहारशरीफ, गया, जहानाबाद, बक्सर, दरभंगा आदि जिले से 400 से 500 लोग रोज पहुंच रहे हैं। पटना जीपीओ में 11 आधार काउंटर और दो मोबाइल अपडेट काउंटर हैं।
तकनीकी कारणों से आपरेटर्स के यूजर आईडी बंद
राजधानी पटना में कई जगह प्राईवेट आपरेटर्स द्वारा भी आधार कार्ड बनाये जाते थे लेकिन उनमें से अधिकतर जगहों पर ताले लटके है। दूर दराज से लोग आकर लौट रहे हैं।
बड़ी संख्या में आधार सेंटर्स तकनीकी कारणों से बंद
बिहार के डाकघर आधारित आधार सेवा केंद्रों में बड़ी संख्या में सेंटर तकनीकी कारणों से बंद पड़े हैं। अधिकारियों के अनुसार, सेंटर बंद होने की सबसे बड़ी वजह यह है कि यूआइडीएआइ ने कई ऑपरेटरों की यूजर आइडी बंद कर दी है। नये रजिस्ट्रेशन और री-रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में भी देरी हो रही है। कई सिस्टम समय पर पुनः पंजीकृत नहीं हो पा रहे हैं।
कर्मियों को भी परीक्षा का स्लॉट नही मिल रहा
आधार सेंटर पर काम करने वाले कर्मचारियों को यूआइडीएआइ की परीक्षा पास करनी होती है लेकिन पिछले कई महीनों से परीक्षा के स्लॉट उपलब्ध नहीं कराए जा रहे, जिसके कारण नए ऑपरेटरों की बहाली नहीं हो पा रही है और पुराने सेंटर बंद होते जा रहे हैं।
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