महाकुंभ 2025 से लौट आगरी पहुंची नाबालिग राखी ने दोहराया साध्वी बनने का संकल्प

प्रयागराज / आगरा : महाकुंभ 2025 से लौट आगरी पहुंची नाबालिग राखी ने दोहराया साध्वी बनने का संकल्प। महाकुंभ 2025 के विधिवत शुभारंभ होने के पहले मेला क्षेत्र में संगम तट के जिस नाबालिग साध्वी के किस्से ने सुर्खियां बटोरी थीं और जिस नाबालिग किशोरी को साध्वी बनाने के आरोप में अखाड़े से युवा साधु को 7 साल का निष्कासन के आदेश का कोपभाजन बनना पड़ा, वही नाबालिग राखी अपने गांव  पहुंच गई है।

यूपी के ही आगरा के फतेहाबाद में तहसील सदर के गांव टरकपुरा के दिनेश की 13 वर्षीय पुत्री राखी गांव लौटते ही अपना संकल्प दोहराते हुए कहा कि कि वह जीवन भर साध्वी बनकर ही रहेंगी।

राखी ने साझा की अपने साध्वी बनने के संकल्प लेने की कहानी…

अपना आगरा संस्करण प्रकाशित करने वाले एक राष्ट्रीय हिंदी दैनिक के पोर्टल ने महाकुंभ 2025 से गांव लौटी नाबालिग राखी की पूरी कहानी उसी जुबानी के हवाले से प्रकाशित की है। बता दें कि महाकुंभ 2025 के विधिवत शुभारंभ से काफी पहले ही राखी अपने माता-पिता संग प्रयागराज के संगम क्षेत्र स्थित मेला परिसर पहुंचीं। यहां जूना अखाड़े में शामिल हुई थी। मगर, नाबालिग होने के कारण घर भेज दी गई थीं।

महाकुंभ 2025 में संगम क्षेत्र में डुबकी लगाने पहुंचे श्रद्धालओं का रेला।
महाकुंभ 2025 में संगम क्षेत्र में डुबकी लगाने पहुंचे श्रद्धालओं का रेला।

करीब 22 दिन बाद राखी परिजनों के साथ आगरा स्थित गांव लौट चुकी हैं। प्रयागराज कुंभ से माता-पिता के साथ आगरा लौटीं राखी ने कहा कि – ’25 दिसंबर 2024 को कुंभ में शामिल होने गई थीं।  कुछ दिन रहने के बाद अच्छा नहीं लगा। इस पर माता-पिता से कहा कि घर चलो। लेकिन, उसी रात्रि में बचपन की इच्छा जागृत हुई कि मुझे साध्वी बनना है।

…माता-पिता से कहा कि आप घर चले जाओ। मुझे साध्वी बनना है। माता-पिता और गुरु कौशल गिरी ने काफी समझाया कि साध्वी न बनें।  मगर, मैं अपने इरादे पर अटल रही। माता- पिता ने खूब डांटा। तब अपनी इच्छा को पूरा करने के लिए गुरु से कहा तो उन्होंने कहा कि माता-पिता से बात कर लो। माता-पिता यही बोले कि जो उसकी इच्छा है, वही करें। अपना साथ देने का वादा किया’।

आगरा में अपने गांव पर नाबालिग साध्वी राखी
आगरा में अपने गांव पर नाबालिग साध्वी राखी

राखी ने जूना अखाड़े से निष्कासित अपने गुरू को बताया निर्दोष और कहा….

पूरे मामले के सुर्खियों में छाने के बाद निष्कासन का कोपभाजन बनकर जूना अखाड़े से जा चुके अपने गूरू को लेकर भी आगरा की इस नाबालिग राखी ने खुलकर बात की है। उन बातों को राष्ट्रीय दैनिक ने प्रमुखता से अपने पोर्टल पर प्रकाशित किया है।

पूरे वाकये पर अपनी बात रखते हुए राखी ने कहा कि – ‘गुरु ने कहा था कि वो पढ़ाई पर ध्यान दें। पढ़-लिखकर नौकरी करें। उन्होंने समझाया था कि साध्वी बनना कोई छोटी चीज नहीं है। बात नही मानी तो गंगा में कूदकर जान देने की धमकी के बाद जूना अखाड़े में साध्वी बनाने पर सहमति बनी। अब तो मैं साध्वी के भेष में ही रहूंगी।

…आगे दीदी त्रतंभरा वृद्धावन में आश्रम में रहकर पढ़ाई कर सनातन धर्म का प्रचार करुंगी।  ….मेरे गुरु पर जो आरोप लगाए गए हैं वो सब गलत है।  …मैं जूना अखाड़े से अनुरोध करती हूं कि मेरे गुरु फिर से जूना अखाड़े शामिल किया जाए। …इसमें उनका कोई दोष नहीं है’। 

अपने माता-पिता संग नाबालिग साध्वी राखी
अपने माता-पिता संग नाबालिग साध्वी राखी

नाबालिग राखी को साध्वी बनाकर दानरूप में प्राप्त करने वाले जूना अखाड़े से निष्कासित लटूरी बाबा के बारे मेंं…

महाकुंभ 2025 शुरू होने से पहले ही 13 वर्ष की नाबालिग राखी को साध्वी बनाकर दान के रूप में प्राप्त करने वाले जूना अखाड़े के महंत कौशल गिरि को सात साल के लिए अखाड़े से निष्कासित कर दिया गया है। महंत कौशल गिरि का पैतृक गांव करोंधना में है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, कौशल गिरी महाराज की उम्र फिलहाल करीब 38 साल है। उनका गांव का नाम लटूरी था।

उनके पिता का नाम बंगाली रघुवंशी और मां का नाम आशा देवी था। दोनों का देहांत हो चुका है। वह 6 साल की उम्र से ही पूजा पाठ में लीन रहते थे। गांव के ही एक मंदिर पर अपने गुरु नरसिंह गिरी के साथ पूजा अर्चना करते थे। वह बचपन से ही धार्मिक भाव रखते थे। कुछ समय बाद ही वह घर परिवार और गांव छोड़कर चले गए।

लटूरी बाबा संग साध्वी बनने का संकल्प लेने वाली नाबालिग राखी।
लटूरी बाबा संग साध्वी बनने का संकल्प लेने वाली नाबालिग राखी।

महाराज के बारे में गांव के लोगों के पास कोई खास जानकारी तो नहीं है लेकिन गांव के लोग आज भी कौशल गिरी महाराज पर आस्था रखते हैं। गांव के मंदिर पर रहने वाले महंत रामगिरी बाबा ने बताया कि कौशल गिरी बाबा आखिरी बार जून, 2024 में आए थे। रात भर मंदिर पर रुके थे।

दूसरी ओर, लटूरी बाबा के के भाई बंटी का कहना है कि वह पिताजी की मौत के बाद भी घर नहीं आए और ना ही उनका कोई भाव परिवार के प्रति रहा। बताया कि सुखबीर,भीम सिंह सहित हम तीनों भाई मजदूरी करते हैं।

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