महाकुंभ 2025 में पांच दिनों में 7 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी

प्रयागराज। महाकुंभ 2025 में पांच दिनों में 7 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी। महाकुंभ 2025 में पांचवें दिन यानी  शुक्रवार तक 7 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम क्षेत्र में डुबकी लगा ली है। बाकायदा इसकी आधिकारिक पुष्टि सीएम योगी कार्यालय ने मेला क्षेत्र से मिले ग्राउंड फीडबैक के आधार पर की है।

विश्व का सबसे बडा आयोजन कहे जा रहे महाकुंभ 2025 में बीते 13 जनवरी पौष पूर्णिमा वाली तिथि से पुण्य स्नान शुरू है। इन पांच दिनों में सबसे ज्यादा साढ़े 3 करोड़ लोगों ने मकर संक्रांति पर ही डुबकी लगाई। प्रदेश की योगी सरकार का लक्ष्य है कि इस बार महाकुंभ में 45 करोड़ से भी ज्यादा लोग आएंगे और तदनुसार ही सारी भव्य-तैयारियों को अंतिम रूप दिए जाने के साथ निरंतर उनकी अत्याधुनिक सर्विलांस विधि से निगरानी एवं निगहबानी जारी है।

महाकुंभ में सिक्योरिटी, क्राउड मैनेजमेंट और  क्राइम कंट्रोल पर फोकस

CM Yogi आदित्यनाथ की अगुवाई प्रदेश सरकार का पूरा तंत्र केंद्र सरकार के परस्पर संयोजन में पूरे महाकुंभ 2025 मेला क्षेत्र विशेष रूप से निरंतरता के साथ सक्रिय है। पुलिस, प्रशासन, स्वयंसेवी संस्थानों के साथ पूरा व्यवस्थापना तंत्र जिन तीन चीजों पर पूरा फोकस किए हुए है, वह है – सिक्योरिटी, क्राउड मैनेजमेंट और  क्राइम कंट्रोल। भीड़ की गिनती करने के लिए स्पेशल टीम बनाई गई है।

इस टीम का नाम क्राउड एसेसमेंट टीम है। रियल टाइम बेसिस के आधार पर यह टीम मेले में आने वाले लोगों की गिनती कर रही है। पूरा फोकस भीड़ में हरेक पर नजर रखने पर काम हो रहा है ताकि तनिक भी अनहोनी का आशंका तत्काल वहां काम हो सके। संगम में जल क्षेत्र में बाकायदा रिवर पुलिस टीम सभी सुरक्षा उपकरणों के साथ लैस है।

पहले ही स्नान क्षेत्र में फ्लोटिंग बैरीकेडिंग की गई एवं उस पर निगरानी के लिए जवान एवं लाइफ सेफ गार्ड तैनात हैं एवं मकर संक्रांति पर करोड़ों की भीड़ को प्रबंधित कर लिए जाने पर बनी व्यवस्था पर भी सरकार ने संतोष जताया है।

महाकुंभ 2025 मेला क्षेत्र में इंस्टॉल 2750 कैमरों एवं AI कैमरों से हो रही पधारने वालों की गिनती

महाकुंभ 2025 के मेला क्षेत्र में व्यवस्थापना तंत्र ने पधारने वालों और संगम में डुबकी लगाने वालों की गिनती के लिए कैमरा आधारित गिनती प्रणाली स्थापित की है। इसके लिए कुल 2750 कैमरे इंस्टॉल किए गए हैं। इनके साथ ही AI कैमरों के अलावा ड्रोन वाले कैमरों की लगातार मदद ली जा रही है। मेला क्षेत्र में स्थापित इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) क्राउड मैनेजमेंट में वरदान साबित हो रहा है।

इसके माध्यम से न सिर्फ मेला क्षेत्र में आ रही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को कंट्रोल करने में मदद मिल रही है बल्कि कई तरह के सर्विलांस में भी यह मददगार बन रहा है। महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं की AI बेस्ड कैमरे की मदद से भीड़ की गिनती करने में भी मदद मिल रही है। ड्रोन और कैमरों की मदद से भीड़ के घनत्व, वाहनों की संख्या के आधार पर अनुमान लगाया जाता है।

भीड़ की गिनती करने के लिए स्पेशल टीम बनाई गई है। इस टीम का नाम क्राउड एसेसमेंट टीम है। रियल टाइम बेसिस के आधार पर यह टीम मेले में आने वाले लोगों की गिनती कर रही है। AI बेस्ड कैमरों से भीड़ की फेस रीडिंग की जाती है। फेस स्कैन के माध्यम से यह अनुमान लगाया जाता है कि कितनी देर में कितने लाख श्रद्धालु मेले में पहुंचे।

संगम में अपनी मस्ती में स्नान करतीं नागा साध्वियां
संगम में अपनी मस्ती में स्नान करतीं नागा साध्वियां

सभी क्रिटिकल और सेंसिटिव एरिया से मिल रहे फुटेज के आधार पर तुरंत लिए जा रहे हैं एक्शन

मेला क्षेत्र में जितने भी क्रिटिकल और सेंसिटिव एरिया हैं वहां पर कैमरे इंस्टॉल किए गए हैं। जितने भी घाट हैं, प्रमुख सड़के हैं, पुल है, सभी जगह कैमरे लगाए गए हैं क्योंकि वहीं से निगरानी टीम को ये जानकारी मिल रही है कि कहां पर भीड़ का मूवमेंट कितना है। पूरे मेला क्षेत्र में चार ICCC  है।

यदि कहीं एक जगह कोई प्रॉब्लम आती है तो आपात स्थिति में दूसरी यूनिट को उपयोग में लगाया जाता है। उनके बीच बेहतर कनेक्टिविटी रहती है और सभी जगह से मॉनिटरिंग हो पा रही है।

ICCC के प्रभारी एसपी अमित कुमार बताते हैं कि –  ‘तीन तरफ से भीड़ की निगरानी की जा रही है। पहली सिक्योरिटी, दूसरी क्राउड मैनेजमेंट और तीसरी क्राइम।  हमारे पास जो कैमरे हैं उनसे हम सर्विलांस, क्राउड मैनेजमेंट और फायर सर्विलांस जैसे तमाम बिंदुओं पर नजर रख पा रहे हैं।

…क्राउड मैनेजमेंट के लिए हम लोग क्राउड फ्लो को मॉनिटर कर रहे हैं कि किस तरफ से कितना क्राउड आ रहा है और इसको किस प्रकार से रेगुलेट करना है। क्राउड फ्लो के माध्यम से यह जानने की कोशिश करते हैं की भीड़ का दबाव कहां ज्यादा है और हम उसको वहां से किस ओर मूव कर सकते हैं। यह काफी कारगर तकनीक है।

महाकुंभ 2025 का दृश्य
महाकुंभ 2025 का दृश्य

…हमें यहां से रेगुलर निगरानी करनी पड़ती है कि कहीं किसी एक स्थान पर भीड़ का घनत्व तो ज्यादा नहीं हो गया है। इसके अलावा हम कैमरों से फायर सर्विलांस भी कर रहे हैं। कहीं धुआं या आग की लपट तो नहीं है। इसके अलावा पार्किंग का भी इसके जरिये सर्विलांस किया जा रहा है। हर पार्किंग में कैमरे लगाए गए हैं जो बताते हैं कि कौन सी पार्किंग कितनी खाली या भरी है।

…जब कोई पार्किंग भर जाती है, फिर हम उसको बंद करके अगली वाली पार्किंग एक्टिवेट करते हैं। सबसे पहले हम सबसे पास की पार्किंग को भरते हैं जिससे स्नानार्थियों को कम से कम चलना पड़े। इसके बाद हम उससे आगे की ओर बढ़ते हैं। मेला क्षेत्र में सात मुख्य मार्ग हैं जो प्रयागराज को अन्य शहरों से जोड़ते हैं, उसको देखते हुए सभी दिशाओं में इस तरह की पार्किंग की व्यवस्था की गई है।

…रही बात कैमरों से निगरानी की तो एआई कैमरों से निर्णय लेने में काफी मदद मिलती है, लेकिन हम पूरी तरह इन पर डिपेंड नहीं है। यह हमारी क्षमता को निश्चित रूप से बढ़ाते हैं, क्योंकि इससे पहले इतना बड़ा क्राउड कंट्रोल नहीं किया गया था। हमारी फोर्स की अपनी इंस्टीट्यूशन ट्रेनिंग है, लेकिन अगर इसको हम डाटा बेस्ड और एविडेंस बेस्ड रखें तो वह हमें अपनी स्किल को और बेहतर करने में मदद करती है’।

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