Ramgarh: रामगढ़–रांची को जोड़ने वाले NH-33 पर बुधवार की शाम चुटूपालू घाटी में 18 हाथियों का झुंड सड़क के पास आ गया। जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। हाथियों की मौजूदगी के कारण शाम 6:30 बजे से 7:10 बजे तक करीब 40 मिनट तक वाहनों का आवागमन पूरी तरह ठप रहा।
एहतियातन दोनों ओर से रोके गए वाहनः
हाथियों के झुंड के पहुंचते ही प्रशासन और वन विभाग ने तुरंत एहतियाती कदम उठाए। रामगढ़ की ओर से आने वाले वाहनों को मायाटुंगरी पहाड़ के पास रोका गया। रांची की ओर से आने वाले वाहनों को चुटूपालू घाटी के खिराबेड़ा क्षेत्र में रोक दिया गया। इस दौरान NH-33 के दोनों ओर लंबा जाम लग गया और वाहन चालकों में दहशत का माहौल बन गया।
वन विभाग की क्विक रिस्पांस टीम मौके परः
सूचना मिलते ही वन विभाग की क्विक रिस्पांस टीम (QRT) के पांच सदस्य मौके पर पहुंचे। हाथियों को सड़क पर चढ़ने से रोकने के लिए मशाल जलाई गई, सायरन बजाए गए और तेज रोशनी वाले टॉर्च का इस्तेमाल किया गया। हालांकि, लोगों के शोर और सायरन से हाथी कुछ देर के लिए उत्तेजित भी हो गए, जिससे हालात और तनावपूर्ण हो गए।
विशेष वाहनों से जंगल की ओर खदेड़ा गया झुंडः
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग के दो विशेष वाहन मौके पर लाए गए। तेज सायरन की मदद से काफी मशक्कत के बाद हाथियों को जंगल की दिशा में खदेड़ा गया। लगभग आधे घंटे तक NH के किनारे खड़े रहने के बाद हाथी धीरे-धीरे जंगल की ओर बढ़े, तब जाकर सड़क पर फंसे वाहनों का परिचालन सामान्य हो सका।
42 हाथी अलग-अलग झुंडों में कर रहे हैं विचरणः
वन विभाग के अनुसार, बोकारो वन क्षेत्र से आए करीब 42 हाथी पिछले एक सप्ताह से रामगढ़ जिले के विभिन्न इलाकों—घाटो, केदला, नावाडीह, गोला और NH-33 घाटी—में छोटे-छोटे झुंडों में घूम रहे हैं। अब तक उन्हें एक स्थान पर एकत्रित करने की कोशिशें सफल नहीं हो सकी हैं।
एक सप्ताह में छह लोगों की मौतः
हाथियों के बढ़ते उत्पात से जिले में जनहानि भी हुई है। पिछले एक सप्ताह में हाथियों के हमले से छह लोगों की मौत हो चुकी है। सुरक्षा के मद्देनजर फिलहाल वन विभाग के पांच दल NH-33 के आसपास मशाल जलाकर निगरानी कर रहे हैं, ताकि हाथी दोबारा सड़क की ओर न आएं। वन विभाग की तत्परता और सूझबूझ से इस व्यस्त राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक बड़ी दुर्घटना टल गई।
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