Ranchi- सातवीं जेपीएससी परीक्षा परिणाम को रद्द करने की मांग को लेकर 10 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे गुलाम रसुल ने आखिरकार अपना अनशन तोड़ दिया. लेकिन यह आन्दोलन की समाप्ति नहीं है, बल्कि आन्दोलन को विस्तार करने की रणनीति है. अब नये कलेवर और रुप रेखा के साथ इस आन्दोलन को धार दिया जाएगा. हमें किसान आन्दोलन से प्ररेणा मिल रही है, आप किसान आन्दोलन को देख सकते हैं, कैसी-कैसी तरह की बाधाएं आई, आन्दोलन को तितर-बितर करने की सत्ता प्रायोजित किस प्रकार की रणनीतियां बनाई गई , लेकिन आखिरकार क्या हुआ, किसानों ने जीत तो फतह कर ही ली. यह कहना है 10 दिनों से परीक्षा परिणाम को रद्द करने की मांग को लेकर आमरण धरना पर बैठे गुलाम रसूल का.
गुलाम रसूल का कहना है कि यह भी एक सच्चाई है कि हमारी सरकार और प्रशासन का रवैया काफी दमनात्मक रहा. प्रशासन कभी भी हमें एक जगह स्थिर से बैठने नहीं दिया. मौका मिलते ही रात के अंधरे में मुझे और हमारे साथियों को जबरन भगाता है.
लेकिन एक सच्चाई यह भी है कि हमें जिस प्रकार के सहयोग की अपेक्षा थी वह नहीं मिली. अभ्यर्थी पार्ट टाईम आंदोलन चलाना चाहते है. वे किसी लम्बे और शांतिपूर्ण आन्दोलन चलाने के मुड में नहीं थें. यही कारण है कि मैं अकेला पड़ता गया, इस बीच विनोद सिंह ने आमरण अनशन को तोड़ कर आगे की रणनीति बनाने का आग्रह किया. इसी आग्रह पर मैनें आमरण अनशन तोड़ा, अब आगे की रणनीति बना आन्दोलन को विस्तार दिया जाएगा.
रिपोर्टर – करिश्मा सिन्हा


