Saturday, August 30, 2025

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रांची यूनिवर्सिटी में ऑनलाइन पेंशन प्रणाली का विरोध तेज, स्टाफ ने जताई डेटा सुरक्षा पर चिंता

रांची: रांची यूनिवर्सिटी में रिटायर्ड शिक्षकों और कर्मचारियों की पेंशन को ऑनलाइन करने की योजना को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। पारदर्शिता और सुविधा के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना का यूनिवर्सिटी के स्टाफ ने कड़ा विरोध किया है। स्टाफ का कहना है कि पेंशन के लिए बनाए गए ऐप का निर्माण एक निजी एजेंसी द्वारा किया गया है, जिससे डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा को लेकर गंभीर शंका उत्पन्न हो गई है।

यूनिवर्सिटी प्रशासन के अनुसार, पहले चरण में रिटायर्ड शिक्षकों और कर्मचारियों की पेंशन को ऑनलाइन लाने की तैयारी की गई थी। इसके लिए एक मोबाइल एप्लिकेशन विकसित किया गया और वित्त विभाग की निगरानी में इसका ट्रायल भी सफलतापूर्वक किया गया। त्रुटियों को सुधारने के बाद इसे लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया, लेकिन स्टाफ के विरोध के कारण योजना को रोका गया।

कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि निजी एजेंसी के ऐप में डेटा छेड़छाड़ का खतरा बना हुआ है, जिससे पेंशनरों की निजी जानकारी असुरक्षित हो सकती है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय को इस तरह की तकनीकी व्यवस्था सरकारी या अधिकृत एजेंसी से विकसित करानी चाहिए थी।

हालांकि, ऑनलाइन पेंशन प्रणाली के कई लाभ भी सामने आए हैं। इससे पारदर्शिता सुनिश्चित होती है, समय की बचत होती है, और पेंशनभोगी घर बैठे अपनी पेंशन की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। विशेष रूप से उन पेंशनरों के लिए यह सुविधा उपयोगी है जो रांची से बाहर या विदेश में निवास करते हैं।

गौरतलब है कि रांची यूनिवर्सिटी में इस समय लगभग 2800 रिटायर्ड शिक्षक और कर्मचारी पेंशनधारी हैं, जिन्हें हर महीने लगभग 14.5 करोड़ रुपये पेंशन के रूप में वितरित किए जाते हैं।

अब देखना यह है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन स्टाफ की आपत्तियों को दूर कर पारदर्शी और सुरक्षित ऑनलाइन पेंशन प्रणाली लागू करने में कितना सफल होता है।

 

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