
Patna Traffic Jam Management: राजधानी पटना में बढ़ते यातायात दबाव और जाम की समस्या से निपटने के लिए पथ निर्माण विभाग ने तकनीक आधारित समाधान की दिशा में पहल की है। शनिवार को विश्वेश्वरैया भवन स्थित पथ निर्माण विभाग के सभागार में ‘यातायात जाम के प्रबंधन एवं समाधान’ विषय पर एक दिवसीय उच्चस्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल ने की। इसमें पटना की यातायात व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों, जाम के संभावित कारणों और तकनीक के माध्यम से इसके समाधान पर चर्चा की गई।
पटना के प्रमुख इलाकों में ट्रैफिक दबाव पर मंथन
कार्यक्रम के दौरान आंकड़ों के आधार पर पटना की भौगोलिक संरचना, बढ़ती आबादी, वाहनों का दबाव, अतिक्रमण और ट्रैफिक नियमों से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा हुई। डाक बंगला, पटना जंक्शन रोड, जीपीओ गोलंबर, एग्जीबिशन रोड, बोरिंग रोड, गांधी मैदान, पीएमसीएच, अशोक राजपथ, सगुना मोड़, अनीसाबाद और बेली रोड जैसे प्रमुख इलाकों में प्रतिदिन पड़ने वाले यातायात दबाव पर भी मंथन किया गया। इसके अलावा सड़क दुर्घटनाओं से जुड़ी चुनौतियों और आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया की जरूरत पर भी चर्चा हुई।
AI से पहले ही पता चलेगा संभावित ट्रैफिक जाम
कार्यक्रम में प्रो. पी.के. सिकदर और वेंकटा चुंदुरू ने ‘Mission Sugam Patna: ASTraM and SOS’ नाम से Arcadis द्वारा तैयार तकनीकी ड्राफ्ट का प्रस्तुतीकरण किया। प्रस्तावित व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स के इस्तेमाल पर जोर दिया गया है। इसके तहत 30 से 60 मिनट पहले संभावित ट्रैफिक जाम का पूर्वानुमान लगाने और उसके अनुसार सिग्नल तथा डायवर्जन को समायोजित करने का प्रस्ताव रखा गया। इसका उद्देश्य ट्रैफिक दबाव बढ़ने से पहले ही आवश्यक कदम उठाकर जाम को नियंत्रित करने की दिशा में काम करना है।
ई-रिक्शा और ऑटो के लिए जियोफेंसिंग का प्रस्ताव
यातायात प्रबंधन के लिए ई-रिक्शा और ऑटो के अनियंत्रित ठहराव को नियंत्रित करने पर भी चर्चा हुई। इसके लिए जियोफेंसिंग, वर्चुअल स्टैंड और शेड्यूलिंग जैसी तकनीकों के इस्तेमाल का प्रस्ताव रखा गया है। स्टेशन और बाजार क्षेत्रों में अनियंत्रित ठहराव को कम करने के साथ-साथ पटना मेट्रो स्टेशनों के आसपास भीड़ और यात्रियों के ड्रॉप-ऑफ को व्यवस्थित करने पर भी विचार किया गया। इसके अलावा ट्रैफिक नियंत्रण के लिए तैनात जवानों की उपस्थिति की निगरानी के लिए अटेंडेंस मॉनीटरिंग सिस्टम का प्रस्ताव भी सामने आया।
दुर्घटना की AI से पहचान और ग्रीन कॉरिडोर
तकनीकी ड्राफ्ट में सड़क दुर्घटनाओं की AI के जरिए स्वत: पहचान करने का प्रस्ताव भी शामिल है। दुर्घटना की स्थिति में नजदीकी एंबुलेंस को अलर्ट करने और ग्रीन कॉरिडोर के जरिए पीड़ित को जल्द अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था पर चर्चा हुई। प्रस्ताव में पीड़ित को 10 मिनट के भीतर अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, यह कार्यक्रम में प्रस्तुत प्रस्तावित तकनीकी व्यवस्था का हिस्सा है।
बारिश और अतिक्रमण से निपटने पर भी जोर
सड़क किनारे अनधिकृत पार्किंग और अतिक्रमण को तकनीक के जरिए चिन्हित कर सड़क की प्रभावी चौड़ाई बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया। इसके साथ ही बारिश और जलजमाव के दौरान प्रभावित मार्गों की पहले से जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर भी चर्चा हुई। ऐसी स्थिति में यातायात को वैकल्पिक मार्गों पर मोड़ने से आपातकालीन सेवाओं के प्रभावित होने की आशंका को कम करने की योजना पर विचार किया गया।
ICCC के मौजूदा ढांचे के इस्तेमाल पर जोर
कार्यक्रम में पटना के मौजूदा इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) के बुनियादी ढांचे का अधिकतम उपयोग करते हुए उसके ऊपर एक इंटेलिजेंस लेयर लागू करने का प्रस्ताव रखा गया। अधिकारियों ने पटना और राज्य के प्रमुख शहरी क्षेत्रों में यातायात दबाव कम करने के लिए ठोस और क्रियान्वयन योग्य कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया। कार्यक्रम में BSRDCL के प्रबंध निदेशक, पटना नगर आयुक्त, ट्रैफिक एसपी, BRPNNL के प्रबंध निदेशक, जिला प्रशासन, यातायात पुलिस और अन्य वरीय अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम के बाद प्रो. पी.के. सिकदर समेत अन्य अधिकारियों ने पथ निर्माण विभाग स्थित इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर का जायजा लिया और अधिकारियों एवं अभियंताओं से इसकी कार्यप्रणाली की जानकारी ली।




