PK ने मारी गुलाटी : जनसुराज पार्टी के संविधान से 10वीं पास वाली न्यूनतम अर्हता गायब

डिजीटल डेस्क: PK ने मारी गुलाटी  – जनसुराज पार्टी के संविधान से 10वीं पास वाली न्यूनतम अर्हता गायब। चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर उर्फ PK बुधवार 2 अक्टूबर को जन सुराज पार्टी गठित करते ही अपने एक वादे से पलटी मारी है।

जन सुराज के संविधान से न्यूनतम अर्हता को हटा दिया गया है और तर्क दिया है कि भारत के मूल संविधान की वजह से यह फैसला किया गया है।

इससे पहले प्रशांत किशोर उर्फ PK पूरे बिहार में घूम-घूम कर न्यूनतम अर्हता की बात कर रहे थे। हाल ही कहा गया कि पार्टी के विधानसभा उम्मीदवारों की न्यूनतम अर्हता 10 वीं पास होगी।

जन सुराज के संविधान में न्यूनतम अर्हता का जिक्र ही नहीं

2 साल की पदयात्रा के बाद प्रशांत किशोर ने बिहार में जन सुराज पार्टी की स्थापना की है। यह पार्टी 2025 में बिहार विधानसभा की सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। पार्टी का जो संविधान तैयार किया गया है, उसमें चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम अर्हता का जिक्र नहीं है।

इसके लिए तर्क दिया जा रहा है कि भारत के मूल संविधान के मद्देनजर ऐसा किया गया है क्योंकि भारतीय संविधान में सभी व्यक्ति को चुनाव लड़ने का हक और अधिकार है।

पार्टियों को भारत का संविधान मानना होता है और ऐसा नहीं करने पर चुनाव आयोग के पास एक्शन लेने का अधिकार है। पार्टी नेताओं का तर्क है कि यही वजह रही कि जन सुराज के संविधान में न्यूनतम अर्हता का जिक्र नहीं किया गया है। लोक प्रतिनिधित्व 1951 के अनुच्छेद-2 में इसको लेकर साफ-साफ दिशा-निर्देश है कि दल का उद्देश्य संविधान के अनुरूप ही हो।

प्रशांत किशोर उर्फ PK की पलटी अब सियासी गलियारों के सुर्खियों में

जन सुराज की पूरी तस्वीर सामने आते ही सियासी गलियारे में प्रशांत किशोर उर्फ PK की मारी गई पलटी सुर्खियों में है। इसकी वजह भी है। बिहार में अपनी पदयात्रा के दौरान प्रशांत किशोर उर्फ PK ने घूम-घूम कर न्यूनतम अर्हता की बात की थी।

प्रशांत किशोर उर्फ PK ने पटना में बीते 4 अगस्त को युवा संवाद के दौरान कहा था कि 10वीं फेल के नेतृत्व में कोई काम नहीं हो सकता है। उनका कहना था कि नेता जब पढ़ा लिखा नहीं होगा, तो डिसीजन मेकिंग में हिस्सा कैसे ले पाएगा ?

प्रशांत किशोर उर्फ PK ने तब कहा था कि यह तय करना होगा कि पढ़े-लिखे लोग ही राजनीति में आएं और जन प्रतिनिधि बनकर काम करें। उन्होंने आगे कहा था कि जन सुराज की बैठक में जब हमने लोगों से इस पर बात की तो कुछ लोग बीए, कुछ लोग इंटर (12वीं) को न्यूनतम अर्हता बनाने की बात कह रहे हैं।

प्रशांत किशोर उर्फ PK ने तब युवाओं से कहा था कि – आप सब तय करें कि चुनाव लड़ने की न्यूनतम अर्हता क्या होनी चाहिए?

प्रशांत किशोर उर्फ पीके की फाइल फोटो
प्रशांत किशोर उर्फ पीके की फाइल फोटो

PK की पलटी पर जन सुराज की ओर दिए जा रहे जवाब में हैं कई अहम तर्क

जन सुराज की ओर से न्यूनमत अर्हता को संविधान में शामिल नहीं किए जाने पर कहा जा रहा है कि पार्टी का संविधान भारत के मूल संविधान को देखकर तैयार किया गया है। यह भी तो हो सकता है कि संगठन चुनाव के दौरान टिकट वितरण में इसे लागू करें?

कहा जा रहा है कि PK की कोशिश है कि बिहार में अंगूठा छाप नेता लोगों पर राज न कर पाए। बिहार में एक बड़ी आबादी पढ़ाई-लिखाई से वंचित है। राज्य सरकार ने हाल ही में शैक्षणिक सर्वे कराया था जिसके मुताबिक बिहार में 20 प्रतिशत लोग निरक्षर हैं जबकि 22 प्रतिशत लोगों ने 1-5 (पहली से पांचवी कक्षा) तक की ही पढ़ाई की है।

करीब 15 प्रतिशत लोगों ने 5-8 तक की पढ़ाई की है। इन तीनों को अगर जोड़ा जाए तो यह 60 फीसद के करीब है। इसी क्रम में दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदाय के लोग पढ़ाई में काफी पीछे हैं। सर्वे के मुताबिक, बिहार में 24 प्रतिशत दलित समुदाय के लोग सिर्फ पांचवीं कक्षा तक पढ़े हैं। अति पिछड़े वर्ग के लोगों का भी आंकड़ा इसी के आसपास है।

ईबीसी के 24.65 प्रतिशत आबादी मात्र पांचवीं कक्षा तक की पढ़ाई पूरी की है। जन सुराज वालों का तर्क है कि पार्टी के संविधान में इन तीनों ही समुदाय को देखते हुए यह फैसला लिया गया है क्योंकि संविधान में अगर न्यूनतम अर्हता को शामिल किया जाता तो बाकी पार्टियां इसे दलित और पिछड़ा विरोधी घोषित करतीं। ऐसे में, पहले से ही जातीय मुद्दे पर घिरे PK के लिए इसका डैमेज कंट्रोल आसान नहीं रहता।

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