महिलाओं के साथ हिंसा होने पर तुरंत पहुंचेगी सहयोग टीम, जानिए कैसे…

पटना : किसी तरह की हिंसा से पीड़ित महिलाओं को तुरंत प्रभावी सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से राज्य सरकार वन स्टॉप केंद्र नेटवर्क का विस्तार कर रही है। समाज कल्याण विभाग के महिला एवं बाल विकास निगम के स्तर से राज्यभर में 26 नए वन स्टॉप सेंटर का निर्माण कराया जा रहा है। इन्हें जल्द पूरा कर लिया जाएगा। वर्तमान में राज्यभर में 39 ऐसे केंद्र चल रहे हैं। नए केंद्रों को मिलाकर आने वाले दिनों में इन केंद्रों की संख्या बढ़कर 65 हो जाएगी।

वर्तमान में सभी जिलों में एक-एक और पटना में 2 वन स्टॉप सेंटर केंद्र संचालित हैं

आपको बता दें कि वर्तमान में सभी जिलों में एक-एक और पटना में दो वन स्टॉप सेंटर केंद्र संचालित हैं। प्रत्येक केंद्र में 13 प्रशिक्षित कर्मियों की टीम मौजूद है, जो पीड़िता को आश्रय, चिकित्सकीय सहायता, भोजन, कपड़े, मनो-सामाजिक व कानूनी परामर्श व अन्य आवश्यक सहयोग उपलब्ध करा रहें हैं। जानकारी के अनुसार, नए केंद्रों को जिला मुख्यालय से लगभग 40 किमी दूर अनुमंडल मुख्यालयों पर स्थापित किया जा रहा है, ताकि दूर-दराज एवं ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं भी आसानी से इन सेवाओं तक पहुंच सकें।

3 वर्षों में 20 हजार से अधिक मामलों का सफल निष्पादन

पिछले तीन वर्षों में इन केन्द्रों पर कुल 23 हजार 585 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से 20 हजार से अधिक मामलों का सफल निष्पादन किया गया है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में 7,517 मामलों में आए, जिनमें छह हजार 599 का निपटारा किया गया। इसी तरह 2024-25 में आए आठ हजार 888 मामलों में सात हजार 185 और मौजूदा वर्ष में 2025-26 जनवरी तक सात हजार 180 मामलों में छह हजार 322 का निपटारा किया जा चुका है।

हेल्पलाइन नंबर पर कर सकते शिकायत

कोई पीड़िता मदद के लिए वन स्टॉप सेंटर की हेल्पलाइन नंबर-181 पर फोन कर सकती हैं। इसके साथ ही त्वरित सहायता के लिए वन स्टॉप केन्द्रों को इमरजेंसी रिस्पॉन्स प्रणाली-112 से भी जोड़ा गया है। इन केन्द्रों पर पीड़ित महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए कौशल प्रशिक्षण योजनाओं से भी जोड़ा गया है।

वन स्टॉप सेंटर – संरक्षण और पुनर्वास का केंद्र

वन स्टॉप केंद्र हिंसा पीड़ित महिलाओं के लिए एक समेकित सहायता तंत्र के रूप में सामने आया है, जहां उन्हें विभिन्न सेवाओं के लिए अलग-अलग स्थानों पर भटकना नहीं पड़ता है। परामर्श के माध्यम से समस्या का समाधान न होने की स्थिति में विभिन्न हितधारकों के साथ समन्वय स्थापित कर पीड़िता को राहत प्रदान की जाती है। समस्या के समाधान के पश्चात कम से कम छह माह तक पीड़िता की स्थिति की सतत निगरानी की जाती है। ताकि फिर से हिंसा की स्थिति उत्पन्न न हो। जिला स्तर पर वन स्टॉप सेंटरों की समीक्षा जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित जिला संचालन समिति के माध्यम से की जाती है। इसमें जिला पुलिस अधीक्षक समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी सदस्य होते हैं। महिला एवं बाल विकास निगम के स्तर पर भी साप्ताहिक समीक्षा की जाती है।

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