PM नरेंद्र मोदी के बयान पर बांग्लादेश ने जताई आपत्ति

डिजिटल डेस्क । PM नरेंद्र मोदी के बयान पर बांग्लादेश ने जताई आपत्ति। भारतीय PM नरेंद्र मोदी की ओर से बांग्लादेश की आजादी के दिवस पर सोशल मीडिया पर जारी पोस्ट रूपी बयान पर बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने आपत्ति जताई है। यही नहीं, बांग्लादेशी अंतरिम सरकार ने भारत के नजरिए पर अपना जहर भी उगला है।

बांग्लादेशी अंतरिम सरकार ने अपने ताजा बयान में  PM नरेंद्र मोदी के बयान से इत्तेफाक ना रखते हुए बांग्लादेश की आजादी में भारत को महज सहयोगी बताया है । बांग्लादेश ने इसी क्रम में भारत की ओर से उसकी आजादी में दी गई कुर्बानियों का भी खुला अनदेखा किया है। बांग्लादेश का यह रुख पलक झपकते ही दुनिया में सुर्खियों में छाने लगा है।

बांग्लादेशी आपत्ति का लहजा पढें और जानें उसका ऐतराज…

बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के कानूनी सलाहकार आसिफ नजरुल ने पीएम नरेंद्र मोदी के विजय दिवस पर सोशल मीडिया पोस्ट पर जहर उगला है। नजरुल ने पीएम मोदी के पोस्ट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए आपत्ति जताई है।

बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के कानूनी सलाहकार आसिफ नजरुल ने कहा कि –‘…16 दिसंबर 1971 बांग्लादेश का विजय दिवस था। भारत सिर्फ एक सहयोगी था, इससे ज्यादा कुछ नहीं।  वह ‘बांग्लादेश की जीत’ थी और ‘भारत सिर्फ एक सहयोगी’ था। मैं कड़ा विरोध करता हूं। 16 दिसंबर 1971 बांग्लादेश का विजय दिवस था। भारत इस विजय में एक सहयोगी था, इससे ज्यादा कुछ नहीं।’

बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के मुखिया की फाइल फोटो
बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के मुखिया की फाइल फोटो

बिना बांग्लादेश का जिक्र किए PM नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर साझा किया था पोस्ट

PM नरेंद्र मोदी ने तो अपने पोस्ट में बांग्लादेश का जिक्र तक नहीं किया था। PM नरेंद्र मोदी ने सिर्फ भारत की ऐतिहासिक जीत के लिए बलिदान देने वाले देश के जांबांजों और सपूतों को याद किया था।

PM नरेंद्र मोदी ने सोमवार को एक्स पर पोस्ट किया था, ‘…आज विजय दिवस पर हम उन बहादुर सैनिकों के साहस और बलिदान का सम्मान करते हैं जिन्होंने 1971 में भारत की ऐतिहासिक जीत में योगदान दिया। उनके निःस्वार्थ समर्पण और अटूट संकल्प ने हमारे राष्ट्र की रक्षा की और हमें गौरव दिलाया।

…यह दिन उनके असाधारण पराक्रम और उनके अडिग साहस को श्रद्धांजलि है। उनका बलिदान हमेशा पीढ़ियों को प्रेरित करेगा और हमारे राष्ट्र के इतिहास में गहराई से समाया रहेगा।’

पीएम नरेंद्र मोदी की फाइल फोटो
पीएम नरेंद्र मोदी की फाइल फोटो

PM नरेंद्र मोदी के बयान पर बांग्लादेशी सरकार के बयान से साफ हुआ उसका भारत विरोधी रुख…

बाबांग्लादेश की ऐसी प्रतिक्रिया से अब दुुनिया भर में तत्काल अंदाजा लगाया जाना शुरू कर दिया गया है कि  बांग्लादेश की अंतरिम सरकार किस हद तक भारत-विरोधी रुख अपनाए हुए है और किस तरह कट्टरपंथियों की कठपुतली के तौर पर काम कर रही है।

बांग्लादेश अब ये भी भूल गया कि उसी जंग में पाकिस्तान सेना के 93000 सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया था। वो आत्मसमर्पण किसी और के नहीं, बल्कि भारतीय सेना के सामने किया था। साल 1971 की जंग में भारत के 3000 से ज्यादा जांबाज सैनिकों और अफसरों ने अपने प्राणों की आहूति दी थी। साथ ही 9000 से ज्यादा जांबाज घायल हुए थे।

पीएम मोदी की फाइल फोटो
पीएम मोदी की फाइल फोटो

उनके शौर्य की बदौलत ही पूर्वी पाकिस्तान का बांग्लादेश के रूप में जन्म हुआ और बंगालियों पर पाकिस्तान सेना की अमानवीय यातनाओं का सिलसिला भी खत्म हुआ था। लेकिन कट्टरपंथियों को खुश करने में लगी यूनुस सरकार इतिहास को झूठलाने की बेशर्म कोशिश कर रही है।

इसीलिए अब भारत हितैषी देशों ने तत्काल बांग्लादेश की इस प्रतिक्रिया पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीें की है लेकिन अपने स्तर पर जरूर संकेतों में कहा है कि  जिस भारत के जांबाजों के बलिदान से जिस देश का जन्म हुआ, उसकी प्रतिक्रिया।

इतिहास और वर्तमान से अपने संस्थापक शेख मुजीबउर्रहमान के नाम और पहचान मिटाने वाली कट्टरपंथियों की हमदर्द मोहम्मद यूनुस सरकार को 1971 की जंग में पाकिस्तान के ऊपर ऐतिहासिक जीत की याद में भारत के ‘विजय दिवस’ मनाने पर भी आपत्ति है।

कुछ के राजनयिकों ने अनौपचारिक वार्ता में कहा है कि – ‘…अहसानफरामोशी क्या है? अगर किसी को ये समझना है तो विजय दिवस पर पीएम मोदी के सोशल मीडिया पोस्ट पर बांग्लादेश की प्रतिक्रिया पढ़ लीजिए’।

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