पटना : एक तरफ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इंदिरा आवास के द्वारा लोगों को रहने के लिए घर दे रहे हैं। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा भी प्रधानमंत्री आवास योजना चलाई जा रही है। लोगों को आवास दिया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर बात करें तो बिहार की राजधानी पटना का एक जीता जागता उदाहरण देखने को मिला। जहां पर पटना कमीश्नर कार्यालय के पीछे पिछले 50 सालो से करीब 40-50 घर है जिनको जिला प्रशाशन के द्वारा हटाया जा रहा है। वहां रहने वाले गरीब लोगों और छोटे-छोटे बच्चियों ने गुहार लगाई है। नीतीश सरकार हमारे मसीहा है, हमें मत उजाड़िए, हमें यही रहने दिया जाए। हमारे स्कूल यही है। यहां से हटने के बाद हमारी पढ़ाई बंद हो जाएगी।

ये लोग पिछले कई सालों से यहां रहते हैं
दरअसल, ये लोग पिछले कई सालों से यहां रहते हैं। 2016 में भी इन्हें हटाने का आदेश मिला था लेकिन मुख्यमंत्री से जनता दरबार में गुहार लगाने के बाद इन्हें नहीं हटाया गया था। अब एक बार फिर इन लोगों और इनके बच्चों ने मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने कहा कि हमलोगों को बचा लीजिए हमारे घरों को उजड़ने से बचा लीजिए। इन घरों से उनके पुराने यादें जुड़ चुकी है जो अब इन्हें छोड़ना नहीं चाहते हैं। अगर जिस जमीन पर झुगी झोपड़ी डालकर रह रहे लोगों का कहना है कि अगर मुझे हटाना है तो कोई मुझे फिलहाल सरकार के द्वारा व्यवस्था कर दिया जाए। अब देखना होगा कि इनकी गुहार मुख्यमंत्री तक पहुंच पाती है या नहीं।
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रंजीत कुमार की रिपोर्ट
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