Prashant Kishor News: जेपी आंदोलन का जिक्र कर प्रशांत किशोर ने क्या संकेत दिया? शिक्षा और बेरोजगारी पर बड़ा बयान

Prashant Kishor News, सहरसा: जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने शिक्षा में सुधार, पेपर लीक और बेरोजगारी के मुद्दों पर चल रहे आंदोलन को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पिछले दो महीनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन को यदि कोई यह सोचकर नजरअंदाज कर रहा है कि यह अपने आप खत्म हो जाएगा या इसे नियंत्रित कर लिया जाएगा, तो यह बड़ी भूल होगी। गुरुवार को सहरसा में स्नातक विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव के सिलसिले में आयोजित बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में प्रशांत किशोर ने कहा कि शिक्षा और रोजगार के अवसरों को लेकर समाज के बड़े हिस्से में असंतोष है। उनके मुताबिक, आने वाले समय में यह असंतोष बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।

चुनाव आयोग की कार्यशैली पर प्रशांत किशोर ने उठाए सवाल

प्रशांत किशोर ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि विवाद केवल विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर तक सीमित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले आठ से दस वर्षों में आयोग की कार्यशैली को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। उन्होंने मतदाता सूची में नए नाम जोड़ने, मतदाताओं के नाम हटाने, चुनाव की तारीखें निर्धारित करने और मतगणना की प्रक्रिया का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि कई मामलों में चुनाव आयोग सत्ताधारी दल और भाजपा के पक्ष में काम करता दिखाई देता है। प्रशांत किशोर ने यह भी दावा किया कि पहले विधान परिषद के चुनाव सामान्यतः रविवार को कराए जाते थे, जबकि इस बार शुक्रवार को चुनाव कराने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने आशंका जताई कि इससे मुस्लिम मतदाताओं की भागीदारी प्रभावित हो सकती है। साथ ही उन्होंने चुनाव प्रचार के लिए कम समय दिए जाने पर भी सवाल उठाए।

एसआईआर और मतदाता सूची से नाम हटाने पर जताई चिंता

जनसुराज संस्थापक ने बिहार में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यदि लोगों के मतदान के अधिकार को लेकर सवाल उठते हैं, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था में असंतोष बढ़ना स्वाभाविक है। उन्होंने चुनाव से पहले पैसे बांटकर मतदाताओं को प्रभावित करने का भी आरोप लगाया और कहा कि ऐसे मामलों में चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठते हैं। ये आरोप प्रशांत किशोर ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान लगाए। उनका कहना था कि लोकतंत्र में मताधिकार जनता की सबसे महत्वपूर्ण ताकत है। यदि लोगों को लगता है कि उनके वोट के अधिकार के साथ अन्याय हो रहा है, तो उनकी नाराजगी आंदोलन के रूप में सामने आ सकती है।

जेपी आंदोलन का जिक्र, बड़े जनआंदोलन की भविष्यवाणी

प्रशांत किशोर ने अपने बयान में गुजरात के छात्र आंदोलन और लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में हुए आंदोलन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कई बार छोटे मुद्दों से शुरू हुए आंदोलन आगे चलकर व्यापक राजनीतिक और सामाजिक बदलाव का कारण बनते हैं। उन्होंने दावा किया कि आने वाले एक से दो वर्षों में देश में भी बड़े आंदोलन की स्थिति बन सकती है। उनके मुताबिक, शिक्षा, रोजगार और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े सवाल इस असंतोष के प्रमुख कारण बन सकते हैं।

शिक्षा और रोजगार के मुद्दों पर बढ़ते असंतोष का किया जिक्र

प्रशांत किशोर ने कहा कि जंतर-मंतर पर चल रहा प्रदर्शन केवल एक सीमित विरोध नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक और बेरोजगारी जैसे मुद्दों से जुड़ा है। उन्होंने चेतावनी दी कि इन समस्याओं को नजरअंदाज करने से असंतोष खत्म नहीं होगा। सहरसा में एमएलसी चुनाव से जुड़ी बैठक के बाद दिए गए उनके बयान ने शिक्षा, रोजगार और चुनावी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस को फिर चर्चा में ला दिया है। हालांकि, देश में आने वाले समय में किसी बड़े आंदोलन की स्थिति बनेगी या नहीं, यह भविष्य की परिस्थितियों और इन मुद्दों पर होने वाली कार्रवाई पर निर्भर करेगा।

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