आरटीई नामांकन में लापरवाही पर रांची के निजी स्कूलों को चेतावनी, मान्यता रद्द करने की तैयारी

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आरटीई नामांकन में लापरवाही पर रांची के निजी स्कूलों को चेतावनी, मान्यता रद्द करने की तैयारी
आरटीई नामांकन में लापरवाही पर रांची के निजी स्कूलों को चेतावनी, मान्यता रद्द करने की तैयारी
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रांची: रांची जिले में आरटीई (शिक्षा का अधिकार अधिनियम) के तहत निजी स्कूलों में निशुल्क नामांकन की प्रक्रिया में लापरवाही बरतने वाले स्कूलों पर अब प्रशासन सख्त रुख अपना रहा है। जिन स्कूलों ने अब तक आरटीई के तहत आवंटित बच्चों का नामांकन नहीं लिया है, उनकी मान्यता रद्द करने की अनुशंसा की जा सकती है।

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मंगलवार को समाहरणालय सभागार में उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी मंजूनाथ भजंत्री ने ऐसे 45 स्कूलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की, जिन्होंने अभी तक नामांकन प्रक्रिया पूरी नहीं की है। बैठक के दौरान डीपीएस रांची को विशेष रूप से फटकार लगाई गई, जिसने अब तक 24 बच्चों का नामांकन नहीं लिया है। स्कूल की प्रिंसिपल डॉ. जया चौहान ने दस्तावेजों में त्रुटियों का हवाला देते हुए नामांकन प्रक्रिया रोकने की बात कही।

बैठक में अनुपस्थित रहे विद्यालयों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और उन्हें स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित समयसीमा के भीतर नामांकन प्रक्रिया पूरी नहीं की गई तो सीबीएसई को मान्यता रद्द करने की अनुशंसा की जाएगी

किन स्कूलों पर गिरी गाज
बैठक में जिन स्कूलों को चेतावनी या फटकार दी गई, उनमें शामिल हैं:

  • संत अलोईस स्कूल

  • संत अरविंदो एकेडमी

  • संत कोलंबस स्कूल

  • छोटानागपुर पब्लिक स्कूल

  • जेवियर स्कूल, धुर्वा

  • आरबी स्प्रिंगडेल पब्लिक स्कूल

  • आईटीसी पब्लिक स्कूल, मुरी

  • डॉन बॉस्को इंग्लिश मीडियम स्कूल

आंकड़ों में नामांकन की स्थिति
आरटीई के तहत रांची जिले के 121 निजी स्कूलों में कुल 1217 सीटों के लिए 1744 आवेदन प्राप्त हुए थे।

  • 1158 वैध आवेदनों पर लॉटरी प्रक्रिया के तहत 672 बच्चों का स्कूलों में चयन हुआ।

  • इनमें से 493 बच्चों का नामांकन अब तक पूरा हुआ है।

  • 116 बच्चों के मामले दस्तावेज त्रुटियों या अन्य कारणों से शिक्षा प्रशासन को लौटाए गए हैं।

प्रशासन सख्त, स्कूलों को अंतिम चेतावनी
उपायुक्त ने स्पष्ट कर दिया कि बच्चों के शिक्षा अधिकार में बाधा डालने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह सामाजिक दायित्व है, जिसे निजी स्कूलों को गंभीरता से लेना चाहिए।


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