रांची: स्मार्ट मीटर और ऑनलाइन बिलिंग व्यवस्था से बिजली विभाग ने उपभोक्ताओं को राहत देने का सपना दिखाया था, लेकिन यह अब जनता के लिए आफत बन गई है। स्मार्ट मीटर के चलते बिलिंग में गड़बड़ियां और ऑनलाइन भुगतान में धोखाधड़ी के मामले सामने आ रहे हैं।
ऑनलाइन भुगतान, लेकिन पैसे हवा!
टाटीसिल्वे की रहने वाली उर्मिला कुमारी के मामले ने इस व्यवस्था की खामियों को उजागर कर दिया है। उनका 14 हजार रुपये का बिल आया, जिसे उन्होंने ऑनलाइन जमा कर दिया। बावजूद इसके, कुछ दिनों बाद उनके मोबाइल पर फिर से 14 हजार रुपये का बिल भेज दिया गया। जांच में पता चला कि जमा की गई राशि विभाग के खाते में न जाकर चेन्नई के एक साइबर अपराधी के खाते में चली गई।
सिस्टम में अलग, मोबाइल पर अलग बिल
राजधानी में उपभोक्ताओं को मोबाइल पर एक बिल दिख रहा है और विभागीय सिस्टम में दूसरा। एटीपी मशीन से भुगतान करने पर भी सही बिल अपडेट नहीं हो रहा है। ऐसे में उपभोक्ताओं को लगातार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
सिक्योरिटी मनी का फायदा नहीं
स्मार्ट मीटर लगाने के समय ली गई सिक्योरिटी मनी को उपभोक्ताओं को वापस किया जा रहा है, लेकिन यह रकम स्मार्ट मीटर के खाते में दी जा रही है। उपभोक्ता इस राशि का सीधा लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।
समस्या का समाधान नहीं
जनता को राहत देने की बजाय बिजली विभाग अपनी कार्यप्रणाली से खुद भी अनजान बना हुआ है। न तो साइबर अपराध की घटनाओं पर काबू पाया जा रहा है और न ही बिलिंग व्यवस्था को दुरुस्त किया जा रहा है।
उपभोक्ताओं का आह्वान
जनता ने बिजली विभाग से इस गड़बड़ी को जल्द सुलझाने की मांग की है। अगर समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो व्यापक विरोध प्रदर्शन की संभावना भी जताई जा रही है।
बिजली विभाग की स्मार्ट मीटर योजना स्मार्ट तो नहीं दिख रही, लेकिन जनता को लगातार असमझ में डाल रही है। क्या विभाग इस स्थिति को सुधार पाएगा? यह सवाल अब हर उपभोक्ता के मन में उठ रहा है।
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