दिल्ली में बारिश और पश्चिमी यूपी में गिरे ओले

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सांकेतिक तस्वीर
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डिजिटल डेस्क: दिल्ली में बारिश और पश्चिमी यूपी में गिरे ओले। देश की राजधानी दिल्ली में बीते शुक्रवार की रात करीब नौ बजे तेज बारिश ने मौसम बदल दिया और ठंड बढ़ गई। हवाओं में इसके चलते गलन का असर फिर से बढ़ चला है।
अभी भी दिल्ली के कई इलाकों में बारिश हो रहे है। इसके चलते दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में बारिश ने एक बार फिर से हल्की ठंडक का अहसास करा दिया है।
दो दिन पहले गर्मी का अहसास कर रहे लोगों के लिए कल और आज सबेरे से हो रही बारिश से मौसम सुहाना हो गया है।

अलीगढ़-आगरा में गिरे ओले

इसके साथ ही यूपी के अलीगढ़ और आगरा समेत कई जिलों में तेज बारिश के साथ ओले गिरे जिसकी वजह से ठंड बढ़ गई है। भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक पश्चिमी विक्षोभ के असर के कारण बारिश से मौसम सुहावना बना हुआ है।
शुक्रवार को भी सुबह से बादलों के छाए रहने और शाम के बाद हल्की बारिश व ठंडी हवाओं ने गर्मी के अहसास को कम कर दिया। हालांकि, इससे तापमान में कुछ खास परिवर्तन नहीं हुआ।
बीते शुक्रवार को अधिकतम व न्यूनतम तापमान बढ़ा ही रहा। न्यूनतम तापमान तो सामान्य से 5.9 डिग्री अधिक रहा। इससे पहले बीते बृहस्पतिवार को न्यूनतम तापमान 19.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।

उत्तर भारत में 3 दिनों तक गिरेगा तापमान…

भारतीय मौसम विभाग के अनुसार एक मार्च से एक नया पश्चिमी विक्षोभ पश्चिमी हिमालयन क्षेत्र में दस्तक देने जा रहा है। इसका ज्यादा असर पहाड़ों में ही देखने को मिलेगा। इसका हल्का असर उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में भी रहेगा।
विक्षोभ के असर से उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में आगामी तीन दिनों में न्यूनतम तापमान में गिरावट देखने को मिलेगी।
अभी जो तापमान 15-19 डिग्री के बीच चल रहा है वह 13-15 डिग्री के बीच पहुंच जाएगा। हालांकि, अधिकतम तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी।

मार्च से मई तक देश के बड़े हिस्से में प्रचंड गर्मी पड़ेगी

भारतीय मौसम विभाग ने  अनुमान जारी करते हुए कहा है कि गर्मी के मौसम में इस बार सामान्य से अधिक तापमान रह सकता है। प्रशांत महासागर में ला-नीना की सक्रियता का असर दिखने लगा है। इस बार मौसम बहुत अव्यवस्थित है। आगे भी रह सकता है।

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सामान्य ठंड के बाद अब असामान्य गर्मी के लिए तैयार रहना होगा। मार्च से मई तक देश के बड़े हिस्से में प्रचंड गर्मी पड़ सकती है।

भारतीय मौसम विभाग ने मौसम में इस व्यापक बदलाव को ला-नीना का असर बताया है, जो प्रशांत महासागर के सतही जल के सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाने के चलते बनता है और भारतीय महाद्वीप के मौसम को गहरे रूप से प्रभावित करता है।

ला-नीना के चलते ही इस बार दिसंबर-जनवरी में ठंड भी ज्यादा नहीं पड़ी। फरवरी के पहले हफ्ते से ही मौसम ने करवट ले ली है और अप्रत्याशित रूप से तापमान बढ़ना शुरू हो गया।उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में दिन के समय हीट वेव (लू) भी चल सकती है।

 

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