कोडरमाः देश के सबसे बड़े और राज्य के एकमात्र सैनिक स्कूल तिलैया का आज 60 वांस्थापना दिवस डायमंड जुबली के रूप में मनाया गया. जहां कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि राजपाल सीपी राधाकृष्णन पहुंचे. मौके पर बड़ी संख्या में स्कूल के एक्स स्टूडेंट भी मौजूद रहे. राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने भी स्कूल को देश और राज्य का गौरव बताया और कैडेटों को भविष्य की शुभकामनाएं दी. उन्होंने कहा कि देश का सबसे बड़ा सैनिक स्कूल होने के साथ-साथ स्कूल से हर साल सबसे ज्यादा कैडेट एनडीए के लिए चयन किए जाते हैं. इसके अलावे सिविल सर्विसेस और व्यावसायिक जगत में भी इस स्कूल के कैडेट पूरे देश में अपना परचम लहरा रहे हैं और यह सिलसिला अनवरत जारी है.
स्कूल ने देश को अनगिनत हीरे दिए
स्कूल के स्थापना दिवस समारोह में शिरकत करने पहुंचे बिहार में डीजी के पद पर पदस्थापित और स्कूल के एक्स स्टूडेंट एक के अंबेडकर ने कहा कि 60 सालों में स्कूल के आधारभूत संरचनाओं में बदलाव जरूर आया है. लेकिन आज भी यह स्कूल देश रक्षा के क्षेत्र में कैडेटों को तैयार कर अग्रणी भूमिका निभा रहा है. वही आईसीएफएआई यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ रमन ने कहा कि काफी सालों के बाद आज इस स्कूल में आकर पुरानी यादें ताजा हो गई है. उन्होंने कहा कि 60 सालों के इतिहास में इस स्कूल ने देश को अनगिनत हीरे दिए है.
शहीद तिलईयन्स को दी गई श्रद्धांजलि
स्थापना दिवस समारोह को लेकर स्कूल में विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया. आकर्षक परेड का राज्यपाल सीपी राधा कृष्णन ने निरीक्षण करने के बाद परेड की सलामी भी ली. राष्ट्रगान के साथ शुरू हुआ यह कार्यक्रम तकरीबन 3 घंटे तक चला. इस दौरान सेना के जवानों के द्वारा एअर शो दिखाया गया. वहीं रामगढ़ कैंट के जवानों ने आकर्षक और देशभक्ति धुनों से कार्यक्रम को गौरवशाली बनाया. कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने शहीद तिलईयन्स को पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी.
इस स्कूल में कैडेट्स का चरित्र निर्माण हो रहा
कार्यक्रम में पहुंचे 1975 बैच के कैडेट और वर्तमान में मेजर जनरल मनोज कुमार ने बताया कि आधारभूत संरचनाओं में बदलाव भले ही आया हो, लेकिन आज भी इस स्कूल में कैडेट के चरित्र निर्माण में किसी तरह का बदलाव नहीं आया है. और आज भी उसी जब्बे के साथ कैडेट देश रक्षा के लिए प्रेरित हो रहे हैं. लेफ्टिनेंट जनरल एसके झा ने भी इस कार्यक्रम में शिरकत कर अपने पुराने दिनों को याद किया और स्कूल में बिताए अपने अनुभव को साझा किया.
रिपोर्टः अमित कुमार
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