निकासी एवं व्ययन से संबंधित प्रक्रियाओं में पारदर्शिता व अनुशासन सुनिश्चित करें : रामगढ़ उपायुक्त

Ramgarh: बुधवार को उपायुक्त ऋतुराज की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिले के सभी निकासी एवं व्ययन पदाधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य विभिन्न विभागों में वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता तथा भुगतान प्रक्रियाओं की समीक्षा करना था।

बैठक के दौरान उपायुक्त ने सभी निकासी एवं व्ययन पदाधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने कार्यालय द्वारा विगत एक वर्ष में किए गए सभी प्रकार के भुगतानों का समुचित मिलान सुनिश्चित करते हुए प्रतिवेदन निर्धारित समय सीमा के भीतर उपलब्ध कराएं। इस संबंध में कोषागार पदाधिकारी को एक मानक प्रारूप तैयार कर सभी संबंधित अधिकारियों को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया।

उपायुक्त ने स्पष्ट रूप से कहा कि भुगतान से संबंधित किसी भी स्थापित प्रक्रिया में बिना अनुमोदन के बदलाव न किया जाए

उपायुक्त ने स्पष्ट रूप से कहा कि भुगतान से संबंधित किसी भी स्थापित प्रक्रिया में बिना अनुमोदन के बदलाव न किया जाए। यदि किसी प्रकार का परिवर्तन आवश्यक हो, तो इसके लिए कोषागार कार्यालय से विधिवत अनुमति प्राप्त करना अनिवार्य होगा। बैठक में उपायुक्त ने सभी विभागों को यह भी निर्देश दिया कि उनके कार्यालयों में तीन वर्ष से अधिक अवधि से कार्यरत नाजीर, बिलिंग क्लर्क एवं बिलिंग ऑपरेटर से संबंधित अद्यतन विवरणी आगामी शनिवार तक उपलब्ध कराई जाए।

वेतन भुगतान की प्रक्रिया को पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से उपायुक्त ने निर्देश दिया कि सभी अधिकारियों एवं कर्मियों का वेतन भुगतान केवल बायोमेट्रिक उपस्थिति के आधार पर ही किया जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि सभी विभाग स्वीकृत बल के अनुरूप ही आवंटन की मांग करें। बड़े विभागों—जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य एवं पुलिस—जहां बड़ी संख्या में वेतन निकासी होती है, उनके मामलों की गहन जांच के लिए योजनाबद्ध तरीके से विशेष शिविर आयोजित करने के निर्देश भी दिए गए।

उपायुक्त ने भुगतान प्रक्रिया के दौरान की जाने वाली अनिवार्य कटौतियों, जैसे जीएसटी एवं आयकर, को किसी अन्य बैंक खाते में न रखने की सख्त हिदायत दी। उपायुक्त ने भुगतान प्रक्रिया के दौरान की जाने वाली अनिवार्य कटौतियों, जैसे जीएसटी एवं आयकर, को किसी अन्य बैंक खाते में न रखने की सख्त हिदायत दी और इसे सीधे निर्धारित खातों में जमा सुनिश्चित करने को कहा।

इसके अतिरिक्त, विभिन्न विभागों द्वारा पीएफएमएस के माध्यम से लाभुकों को किए गए भुगतानों की पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु उपायुक्त ने निर्देश दिया कि विगत एक वर्ष में किए गए कुल भुगतानों में से कम से कम 10 प्रतिशत लाभुकों का भौतिक सत्यापन संबंधित पदाधिकारी स्वयं करें।

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