रांची. आज जवाहर नवोदय विद्यालय, मेसरा, रांची में ‘भुवनम- पानी की खेती’ परियोजना का सफलतापूर्वक शुभारंभ रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री द्वारा किया गया। इस अवसर पर भजंत्री ने जल संरक्षण के महत्व पर बल देते हुए कहा कि “जल ही जीवन है। ‘पानी की खेती’ जैसी वैज्ञानिक परियोजनाएं भूजल भंडार को वैज्ञानिक तरीके से पुनर्भरण करने और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संरक्षण सुनिश्चित करने में अत्यंत आवश्यक हैं।” उन्होंने विद्यालय परिसर में इस प्रकार की स्वदेशी एवं अभिनव तकनीक को लागू करने के लिए पूरी टीम की सराहना की।
विद्यालय के प्राचार्य एनोस केरकेट्टा ने उपायुक्त रांची तथा केंद्रीय कोल क्षेत्र लिमिटेड (सी.सी.एल.) का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने अपनी कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सी.एस.आर.) निधि से विद्यालय को यह अमूल्य सहयोग प्रदान किया। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने विद्यालय का कार्यभार संभाला था, उस समय विद्यालय भीषण जल संकट से गुजर रहा था। उन्होंने कहा कि मनोज (भारतीय प्रशासनिक सेवा), जो इस विद्यालय के पूर्व छात्र हैं, तथा उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री, जो स्वयं भी जवाहर नवोदय विद्यालय कर्नाटक के विद्यार्थी रह चुके हैं, ने विद्यालय को इस संकट से उबारने में अग्रणी भूमिका निभाई।
राष्ट्रीय कैडेट कोर (एन.सी.सी.) के कमांडेंट कर्नल प्रसाद ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि, “यह परियोजना इस बात का प्रेरक उदाहरण है कि विज्ञान और सामाजिक उत्तरदायित्व मिलकर समाज में स्थायी और सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।”
‘भुवनम – पानी की खेती’ के संस्थापक रथिन भद्र एवं श्री राजा बागची ने उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री का सम्मान किया तथा परियोजना की तकनीकी विशेषताओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जहां 1000 फुट से अधिक गहराई वाले 20 से अधिक बोरवेल असफल हो चुके थे, वहां ‘पानी की खेती’ तकनीक के माध्यम से 1 करोड़ लीटर से अधिक जल क्षमता वाला कैचमेंट क्षेत्र तैयार किया गया है, जो अब पूरे विद्यालय परिसर में विद्यार्थियों एवं शिक्षकों की जल आवश्यकताओं को पूरा कर रहा है।
इस अवसर पर भुवनम– “पानी की खेती” की टीम के सदस्य देबाशीष रॉय, दीपक कुमार, संदीप कुमार मांझी तथा अन्य सहयोगी उपस्थित थे, जिन्होंने इस परियोजना की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान दिया। तथा विद्यालय के लगभग 400 विद्यार्थी भी इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने और इस पहल की सराहना करते हुए उत्साहपूर्वक उपस्थित रहे।
यह परियोजना रांची जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में केंद्रीय कोल क्षेत्र लिमिटेड (सी.सी.एल.) की कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व निधि से क्रियान्वित की गई है। यह ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी शैक्षणिक संस्थानों में वैज्ञानिक जल संरक्षण एवं भूजल पुनर्भरण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल सिद्ध हो रही है।







