RBI Education Report: झारखंड में बुनियादी शिक्षा की स्थिति चिंताजनक, फाउंडेशनल स्तर पर गिरता नामांकन

Ranchi: झारखंड में बुनियादी (फाउंडेशनल) शिक्षा की स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में निर्धारित उम्र सीमा के 100 में केवल 38 बच्चे ही प्री-प्राइमरी से कक्षा 2 तक स्कूलों में नामांकन करा पा रहे हैं। बीते तीन वर्षों में इस स्तर पर नामांकन प्रतिशत में निरंतर गिरावट दर्ज की गई है।

तीन साल में लगातार गिरा फाउंडेशनल नामांकन:

आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2022-23 में फाउंडेशनल शिक्षा का सकल नामांकन अनुपात (GER) 40.5% था, जो 2023-24 में घटकर 38.9% और 2024-25 में 38% रह गया। यानी करीब तीन फीसदी की गिरावट सामने आई है। इस प्रदर्शन के आधार पर झारखंड देश में बुनियादी शिक्षा में नीचे से पांचवें स्थान पर है और कुल 36 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में 32वें स्थान पर आता है।

प्राथमिक स्तर पर बेहतर स्थिति:

हालांकि रिपोर्ट में झारखंड की तस्वीर पूरी तरह नकारात्मक नहीं है। प्राथमिक स्तर (कक्षा 3 से 5) में राज्य ने अच्छा प्रदर्शन किया है। यहां GER 96.7% दर्ज किया गया, जो दर्शाता है कि लगभग सभी बच्चे प्राथमिक शिक्षा से जुड़ रहे हैं।
इस स्तर पर छात्राओं का नामांकन 97.6% और छात्रों का 95.9% रहा, जो राज्य में बालिका शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता को दर्शाता है।

मिडिल स्कूल में पहुंचते ही गिरावट:

जैसे ही बच्चे मिडिल स्कूल (कक्षा 6 से 8) में प्रवेश करते हैं, नामांकन में स्पष्ट गिरावट देखने को मिलती है। इस स्तर पर झारखंड का GER 83.1% है। यहां भी लड़कियां (85.3%) लड़कों (81.2%) से आगे हैं, लेकिन प्राथमिक से मिडिल स्तर के बीच करीब 13% की गिरावट ड्रॉपआउट की गंभीर समस्या की ओर इशारा करती है।

माध्यमिक शिक्षा बनी सबसे बड़ी चुनौती:

राज्य के लिए सबसे चिंताजनक स्थिति माध्यमिक (सेकेंडरी) शिक्षा में है। हालांकि पिछले तीन वर्षों में यहां करीब 10% की बढ़ोतरी हुई है—

  • 2022-23: 49.5%
  • 2023-24: 51.1%
  • 2024-25: 60.6%

इसके बावजूद, नौवीं से बारहवीं कक्षा तक आते-आते 40% से अधिक बच्चे शिक्षा व्यवस्था से बाहर हो जाते हैं, जो भविष्य के मानव संसाधन के लिए गंभीर चेतावनी है।

राष्ट्रीय औसत से पीछे झारखंड:

फाउंडेशनल स्तर पर जहां राष्ट्रीय औसत लगभग 41% है, वहीं झारखंड 38% पर सिमटा हुआ है। इस श्रेणी में बिहार की स्थिति सबसे खराब, जबकि उत्तर प्रदेश, ओडिशा और गुजरात जैसे राज्य भी झारखंड से नीचे या आसपास बने हुए हैं।

मिली-जुली तस्वीर पेश करती रिपोर्ट:

RBI की रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड ने प्रारंभिक और माध्यमिक शिक्षा के बीच नामांकन के अंतर को कम करने में कुछ प्रगति जरूर की है, लेकिन फाउंडेशनल और सेकेंडरी स्तर पर अभी बड़े सुधारों की जरूरत है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शुरुआती शिक्षा मजबूत नहीं हुई, तो आगे की कक्षाओं में ड्रॉपआउट की समस्या बनी रहेगी।

 

 

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