Seemanchal Jeevika Goat Producer: बकरी पालन से लखपति बनीं सीमांचल की महिलाएं, ‘पशु सखी’ और 44 कलेक्शन सेंटरों से आई नई क्रांति

Seemanchal Jeevika Goat Producer: बिहार के ग्रामीण इलाकों में स्वयं सहायता समूहों (SHG) के जरिए महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की एक ऐतिहासिक मिसाल सीमांचल क्षेत्र में देखने को मिली है। अररिया, पूर्णिया, कटिहार और किशनगंज जिलों में जीविका दीदियों ने पारंपरिक बकरी पालन को एक संगठित और अत्यधिक लाभकारी व्यवसाय का रूप दे दिया है। ‘सीमांचल जीविका गोट प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड’ से जुड़ी लगभग 20,000 ग्रामीण महिलाओं ने मिलकर अब तक 15 करोड़ रुपये से अधिक का संचयी कारोबार दर्ज कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

संगठित मूल्य-श्रृंखला और शेयर पूंजी का विस्तार

दिसंबर 2020 में स्थापित तथा सितंबर 2021 से व्यावसायिक रूप से सक्रिय हुई इस प्रोड्यूसर कंपनी ने असंगठित बकरी पालन क्षेत्र को पेशेवर कॉर्पोरेट मॉडल में बदला है:

  • कंपनी से कुल 19,956 (लगभग 20,000) महिला शेयरधारक जुड़ चुकी हैं।

  • शेयरधारकों के जरिए कंपनी की कुल शेयर पूंजी बढ़कर 99.78 लाख रुपये तक पहुंच गई है।

  • ग्रामीण महिलाएं केवल उत्पादक नहीं, बल्कि कंपनी की सक्रिय हिस्सेदार और निर्णयकर्ता बनकर उभरी हैं।

5 वर्षों में 20 गुना टर्नओवर: वित्तीय वृद्धि के मजबूत आंकड़े

कंपनी की वित्तीय प्रगति ग्रामीण महिला उद्यमिता की बढ़ती ताकत को दर्शाती है:

  • सालाना टर्नओवर में उछाल: वित्तीय वर्ष 2021-22 में कंपनी का वार्षिक टर्नओवर मात्र 25.50 लाख रुपये था, जो वित्तीय वर्ष 2025-26 में उछलकर 530.63 लाख रुपये (लगभग 5.31 करोड़ रुपये) पर पहुंच गया—यानी पांच वर्षों में 20 गुना से अधिक की वृद्धि।

  • उत्पादकों को सीधा भुगतान: किसानों को होने वाला वार्षिक भुगतान 11.47 लाख रुपये से बढ़कर 146.70 लाख रुपये हो चुका है।

  • संचयी रिकॉर्ड: अब तक कुल 15.49 करोड़ रुपये के संचयी टर्नओवर के साथ ग्रामीण उत्पादक महिलाओं के बैंक खातों में 5.71 करोड़ रुपये की सीधी राशि पहुंचाई जा चुकी है।

Seemanchal Jeevika Goat Producer Company 1

पारदर्शी व्यवस्था: 44 कलेक्शन सेंटर और 700 ‘पशु सखियां’

पारंपरिक व्यवस्था में बिचौलियों द्वारा औने-पौने दामों में बकरियां खरीदने की प्रथा को खत्म करने के लिए कंपनी ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया है:

  • लाइव बॉडीवेट आधारित मूल्य: बकरियों की बिक्री जीवित वजन (Live Bodyweight) के आधार पर डिजिटल कांटों से तौलकर की जाती है, जिससे उत्पादक को सही दाम मिलता है।

  • स्थानीय बुनियादी ढांचा: खरीद-बिक्री को सरल बनाने के लिए प्रखंड स्तर पर 44 डेमो सह कलेक्शन सेंटर स्थापित किए गए हैं।

  • स्वास्थ्य सुरक्षा तंत्र: गांवों में बकरियों की देखभाल और प्राथमिक उपचार के लिए 700 से अधिक प्रशिक्षित ‘पशु सखियों’ का नेटवर्क तैनात है। वर्ष 2025-26 के दौरान 2.15 लाख से अधिक डीवॉर्मिंग और 1.95 लाख से अधिक टीकाकरण सेवाएं दी गईं।

  • मीट आउटलेट नेटवर्क: सीमांचल जीविका मीट आउटलेट के जरिए 14,566 किलोग्राम सुरक्षित मांस की बिक्री कर 1.03 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व अर्जित किया गया है।

बिचौलियों का खात्मा और महिला स्वावलंबन: सरकार का रुख

ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार के अनुसार, यह सफलता सामूहिक महिला उद्यमिता की शक्ति को प्रमाणित करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जीविका के जरिए ग्रामीण महिलाओं को संगठित बाजार और वैज्ञानिक तकनीकों से जोड़ने के कारण बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है और सीधा आर्थिक लाभ महिलाओं की जेब में पहुंचा है। सरकार इस सफल और टिकाऊ मॉडल को बिहार के अन्य जिलों में भी चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना पर कार्य कर रही है।

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