SIR West Bengal:सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के SIR के दौरान 10वीं प्रवेश पत्र को पहचान के साक्ष्य के रूप में मान्य बताया, 250 जज तैनात।
SIR West Bengal नयी दिल्ली: नयी दिल्ली से बड़ी खबर सामने आई है। Supreme Court of India ने पश्चिम बंगाल में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण SIR को लेकर अहम स्पष्टीकरण दिया है। अदालत ने कहा है कि पहचान सत्यापन के लिए कक्षा 10 का प्रवेश पत्र स्वीकार्य होगा, बशर्ते उसे उत्तीर्ण प्रमाणपत्र के साथ संलग्न किया जाए।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि यह संयुक्त दस्तावेज जन्मतिथि और पारिवारिक पहचान के साक्ष्य के रूप में मान्य होगा। वरिष्ठ अधिवक्ता डीएस नायडू की ओर से उठाई गई आपत्तियों पर सुनवाई के दौरान अदालत ने अनुच्छेद 3(3)(सी) की व्याख्या करते हुए यह स्थिति स्पष्ट की।
Key Highlights
सुप्रीम कोर्ट ने 10वीं प्रवेश पत्र को सशर्त मान्यता दी
प्रवेश पत्र केवल उत्तीर्ण प्रमाणपत्र के साथ ही वैध होगा
15 फरवरी से पहले प्राप्त दस्तावेज जमा करने का निर्देश
80 लाख दावों के निपटारे के लिए 250 जिला न्यायाधीश तैनात
पारिवारिक वंशावली दस्तावेज भी होंगे स्वीकार
SIR West Bengal: 10वीं प्रवेश पत्र कब और कैसे होगा मान्य
अदालत के अनुसार माध्यमिक प्रवेश पत्र को अकेले स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसे केवल संबंधित बोर्ड के उत्तीर्ण प्रमाणपत्र के साथ संलग्न करने पर ही वैध माना जाएगा।
न्यायालय ने कहा कि इस संयुक्त दस्तावेज को जन्मतिथि और वंशावली के प्रमाण के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे उन मतदाताओं को राहत मिलेगी जिनके पास पारंपरिक पहचान दस्तावेज सीमित हैं।
SIR West Bengal: 15 फरवरी से पहले के दस्तावेज जमा करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि 15 फरवरी 2026 से पहले प्राप्त सभी दस्तावेज, जो अब तक अपलोड नहीं किए गए हैं, उन्हें गुरुवार शाम पांच बजे तक संबंधित न्यायिक अधिकारियों को सौंपा जाए।
अदालत ने स्पष्ट किया कि 24 फरवरी के आदेश में वर्णित अनुच्छेद 3(3) के तहत सभी वैध कानूनी दस्तावेज SIR प्रक्रिया में स्वीकार किए जाएंगे, बशर्ते वे निर्धारित समयसीमा से पहले प्राप्त हुए हों।
SIR West Bengal: 250 जिला न्यायाधीशों की तैनाती को मंजूरी
पश्चिम बंगाल में SIR से जुड़े लगभग 80 लाख दावों के निपटारे के लिए अदालत ने 250 जिला न्यायाधीशों की तैनाती को हरी झंडी दी है।
बंगाल, झारखंड और ओडिशा के प्रतिनियुक्त जिला न्यायाधीशों द्वारा रिकॉर्ड की जांच और सत्यापन किया जाएगा। न्यायालय ने कहा कि पारिवारिक वंशावली से जुड़े दस्तावेज, जो मतदाता की नागरिकता और पारिवारिक पहचान की पुष्टि करते हों, भी प्रक्रिया में प्रभावी माने जाएंगे।
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