Niti Aayog द्वारा आयोजित ‘पूर्वी भारत में किसान संगठनों का सशक्तिकरण’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का सफल समापन

Patna: आज Niti Aayog के राज्य समर्थन मिशन के अंतर्गत ‘पूर्वी भारत में किसान संगठनों का सशक्तिकरण’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का सफल समापन पटना में हुआ। कार्यशाला का आयोजन नीति आयोग, सहकारिता विभाग, बिहार एवं डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

दो दिवसीय कार्यशाला में बिहार सहित 9 राज्यों से आए पैक्स अध्यक्षों एवं अधिकारियों से परिधर्चा की गई। इस दौरान नीति आयोग, नाबार्ड, सुधा तथा डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों द्वारा पैक्सों को मूल्य संवर्धन, व्यवसायिक विविधीकरण एवं आधुनिक प्रबंधन की जानकारी प्रदान की गई।

दो दिवसीय कार्यशाला के दौरान सहकारिता क्षेत्र में देशभर के सफल मॉडलों से सीख लेते हुए पैक्स को सशक्त, बहुउद्देशीय एवं आत्मनिर्भर आर्थिक इकाई के रूप में विकसित करने पर व्यापक मंथन हुआ। विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि स्थानीय संसाधनों के कुशल उपयोग, पेशेवर प्रबंधन, बाजार से जुड़ाव एवं नवाचार आधारित दृष्टिकोण के माध्यम से सहकारी संस्थाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था में व्यापक परिवर्तन ला रही हैं।

समापन सत्र को संबोधित करते हुए नीति आयोग के सदस्य (कृषि) प्रो० रमेश चंद ने कहा कि सहकारिता क्षेत्र की संस्थाएं सरकारी सहयोग का लाभ अवश्य लें, लेकिन उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पैक्स स्वयं को इस स्तर तक विकसित करें कि वे अन्य संस्थाओं के लिए प्रेरणा एवं सहयोग का स्रोत बन सकें। उन्होंने यह भी कहा कि बाजार उन्मुख दृ ष्टिकोण एवं गुणवत्ता आधारित प्रबंधन अपनाने से सहकारी संस्थाएं ग्रामीण आय, वृद्धि का सबसे प्रभावी माध्यम बन सकती हैं।

तकनिकी सत्र में अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा, मणिपुर, हरियाणा, बिहार, छत्तीसगढ़, जम्मु कश्मीर, उड़ीसा सहित विभिन्न राज्यों के सहकारी मॉडलों की सफल प्रस्तुतियां दी गईं। इन अनुभवों से यह स्पष्ट हुआ कि सहकारिता अब एक सशक्त एवं प्रभावी आर्थिक मॉडल के रूप में उभर चुका है। छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधि प्रशिक्षण सत्र में अपने राज्य में होने वाले धान अधिप्राप्ति से संबंधित अनुभव साझा किये इसके साथ ही सिक्किम के प्रतिनिधि ने पर्यटन के क्षेत्र में पैक्स द्वारा काफी पहल की जा रही है जिससे पैक्सों के आय में वृद्धि के साथ-साथ राज्य में पर्यटन उद्योग को बढ़ावा मिल रहा है।

प्रशिक्षण में कौशल विकास, क्षमता निर्माण, डिजिटल सशक्तिकरण एवं वित्तीय समावेशन पर विशेष बल दिया गया। ‘डिजिटलीकरण से आय सृजन’ विषय पर चर्चा करते हुए ईआरपी प्रणाली, ई-नाम एकीकरण एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से पैक्स की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, कुशल एवं लाभकारी बनाने की दिशा में सुझाव दिए गए।

इसके अतिरिक्त झारखंड के LAMPS मॉडल के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों में सहकारिता की भूमिका तथा बिहार में गेहूं एवं घान अधिप्राप्ति की स्थानिक विश्लेषण आधारित प्रणाली पर भी महत्वपूर्ण प्रस्तुतियां दी गई।

समापन सत्र में नीति आयोग की वरिष्ठ सलाहकार डॉ. बबिता सिंह ने कार्यशाला के प्रमुख निष्कर्ष प्रस्तुत किए। इस अवसर पर निबंधक, सहकारी समितियां, बिहार श्री रजनीश कुमार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि अलग अलग राज्यों में सहकारी क्षेत्र में काफी विविधता है और आज के इस सत्र में अन्य राज्यों को भी काफी कुछ सीखने और समझने का अवसर मिला है तथा प्रस्तुत Best Practices को अन्य राज्यों द्वारा अपनाये जाने की आवश्यकता है।

 

 

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