एकात्म मानव दर्शन पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का राज्यपाल ने किया उद्घाटन, बोले- 5 हजार साल पुरानी है भारतीय सोच

गया : सीयूएसबी में ‘एकात्म मानव दर्शन का सामाजिक परिप्रेक्ष्य’ विषय पर दो-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने किया। अपने दार्शनिक अंदाज में उन्होंने कहा कि एकात्म मानव दर्शन भारतीय संस्कृति की हजारों वर्षों पुरानी सोच का प्रतीक है। राज्यपाल ने महाभारत, गीता, विवेक चूड़ामणि और स्वामी विवेकानंद के उपदेशों का हवाला देते हुए कहा कि 1948 के बाद देश को महात्मा गांधी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय जैसे दो महान विचारक मिले। उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का एकात्म दर्शन आज भी राजनीति, समाज और मानवता के लिए मार्गदर्शक और नायाब है जो अभेद है। भेद नहीं करता है।

भारतीय अवधारणा हमें सभी संस्कृतियों और विविधता का सम्मान करना सिखाती है। उन्होंने कहा कि विश्व में पांच प्रमुख सभ्यताएं हैं, ईरानी, चीनी, रोमन, तुर्क और भारतीय सभ्यताएं जो अपने-अपने महत्व के लिए जानी जाती हैं। भारतीय सभ्यता की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह ज्ञान और बुद्धि के प्रचार के लिए जानी जाती है। इसलिए हमें अपने प्राचीन शास्त्रों में ‘मानवता’ का वास्तविक अर्थ खोजने की आवश्यकता है और पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने पहली बार राजनीतिक क्षेत्र में इस अवधारणा का प्रयोग किया था।

उन्होंने राजनीति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कुछ लोग राजनीति को गंदा मानते हैं, लेकिन एकात्म दर्शन में राजनीति का स्थान राजा और प्रजा के संबंध में तय किया गया है। हमारे ऋषियों ने ‘डिविनिटी ऑफ मैनकाइंड’ की बात कही है, जो आज भी प्रासंगिक है। इस मौके पर इंडिया फाउंडेशन के राम माधव ने एकात्म मानव दर्शन की प्रासंगिकता पर विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि कहा कि भारत निःसंदेह एक महान देश है लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंच पर महान विचारकों को पैदा न करने के लिए हमारी आलोचना की जाती है।

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मेरे लिए पिछली सदी में देश ने दो महान् मौलिक विचारकों को जन्म दिया, एक महात्मा गांधी और दूसरे पंडित दीनदयाल उपाध्याय हैं। भारत में हम अपनी जड़ों की ओर ध्यान देने के बजाय पश्चिमी दर्शन से ज्यादा प्रभावित हैं, इसलिए दुनिया हमारी आलोचना करती है। लंदन में एक प्रतिभागी द्वारा भारत को गुलाम देश मानने की धारणा पर सवाल उठाने पर दिए गए स्वामी विवेकानंद के बयान को उद्धृत करते हुए डॉ. माधव ने कहा कि हमारे लोग सुस्त हैं, इसलिए हम खुद को बेहतर स्थिति में नहीं रख पाए।

सीयूएसबी के कुलपति प्रोफेसर कामेश्वर सिंह ने सम्मेलन में भाग लेने आए विद्वानों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन विचारों के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण मंच बनेगा और इसके निष्कर्ष नीतियों के निर्माण में उपयोगी साबित होंगे। सम्मेलन के दौरान सोनू द्विवेदी की पुस्तक का लोकार्पण किया गया। आयोजन में देश-विदेश के विद्वानों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय दर्शन के गूढ़ सिद्धांतों को समकालीन परिप्रेक्ष्य में प्रासंगिक बनाना है।

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आशीष कुमार की रिपोर्ट

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