रांची: विधानसभा के मॉनसून सत्र के पाँचवे दिन जहां पहली पाली में आज जमकर हंगामा होता रहा तो वहीं दूसरी पाली में झारखण्ड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम व निवारण के उपाय)विधेयक 2023 पर बहस के बाद कुछ संशोधन के साथ पास हुआ।सदन पटल पर प्रभारी मंत्री आलमगीर आलम ने जब विधेयक रखा तो विधेयक को काला कानून बताते हुए विधेयक को प्रवर समिति को सौंपने के छह प्रस्ताव विधानसभा मे आ गये।
झारखंड़ प्रतियोगी परीक्षा विधयेक के संशोधन पर मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी इसे इसी रूप में रहने दे अगले सत्र में देखेंगे अगर कोई संशोधन की जरूरत पड़ी तो देखा जाएगा, जिस मकशद से ये लाया जा रहा है वो पूरा नही होगा पहले 75 प्रतिशत बाहरी लोग घुस जाते थे अब 20 प्रतिशत पर आ गए हैं, अब परीक्षा केंद्र अलग अलग जिलों में होता है किसी का पहचान दूसरे से नही होता कल के दिन हमारे बच्चे भी इसमे शामिल हो सकते हैं लेकिन जो पूर्वाग्रह से जो ग्रसित होंगे वही ऐसा करेंगे
सीएम हेमंत सोरेन ने अपना पक्ष रखते हुए कहा ,विपक्ष के साथी गंभीर दिख रहे और सरकार की मंशा को भी गलत नहीं मान रहे और इसे काला कानून मान रहे , इनको सारी चीजें दुनिया में काली दिखाई दे रही है , बीजेपी का कुनबा देश के अंदर कैसे कानून लाता है पूरी दुनिया देख रही है। संसद में दिल्ली से संबंधित अध्यादेश पारित हो रहा , वन अधिकार से जुड़ा कानून भी संसद से पारित हुआ है। ये विधेयक बीजेपी शासित राज्यों ने भी लाया है ,इन्हें उन प्रावधानों को भी पढ़ लेना चाहिए , बीजेपी शासित राज्यों में तो और कड़े कानून का प्रावधान है। इस कानून का उद्देश हर स्तर के कदाचार को रोकना है। बड़े पैमाने पर झारखंड में नियुक्ति पहली बार निकला है और राज्य सरकार इसका लाभ युवाओं को देना चाहती है ।कदाचार से जुड़े सजा के प्रावधान को थोड़ा कम करवाया जा सकता है ,कदाचार से जुड़े तीन साल सजा के प्रावधान को एक साल और सात साल सजा के प्रावधान को तीन साल किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने जवाब देते हुए आगे कहा कि सदस्यों की भावना को समझ रहा हूँ,हमारी सोंच यही है कि डर और भय हर उन पर हो जो इसमे शामिल हैं। कोई भी चीज़ हम बनाते हैं कई बदलाव होते हैं,समय के साथ चीज़े समंजस्व बना लेति हैं।यह बिल अन्य राज्यो में भी अपनाया गया है,बहोत चिंतन के बाद बिल तैयार किये गए हैं।
वही इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि दलादिली में हुई हत्या पर विपक्ष हंगामा कर रहा है।क्यों आखिर ज़मीन को लेकर ऐसा हो रहा है।नौकरियों में रोज़गार में बीते 20 वर्षो से जो हालात हुई है नवजवान मजबूरी से इस पेशे में आ रहे हैं।
संशोधन पर बोलते हुए माले विधायक विनोद सिंह ने कहा इसमे जो नियम लाये गए हैं इससे छात्रों की हक की रक्षा कम उनपर पाबंदी ज्यादा लगाई गई है।परीक्षा हॉल के बाहर सरकारी कर्मी से टकराहट पर भी मुकदमा किया जा रहा है इसीलिए इसे प्रवर समिति में भेजा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इसके संगठित अपराध को रोकने के प्रयास किया जा रहा है सही है लेकिन जल्दबाजी में किसी राज्य से कॉपी किया गया है। विधायक अनंत ओझा द्वारा संसोधन प्रस्ताव लाते हुए इसे काला कानून बताया गया।उन्हीने कहा कि सरकार बहुमत के बल पर इस तरह के कानून लाने से बचे।
आजसू विधायक लंबोदर महतो ने भी विधेयक पर रखा संसोधन प्रस्ताव और प्रवर समिति को भेजने की मांग करते हुए कहा कि बिना कोई प्रारंभिक जांच के करवाई गलत।इस कानून में कई प्रावधान गलत है।सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्टैंडिंग आर्डर की बिना जांच के नही कर सकते कार्रवाई।
गरीब छात्र छात्रा के लिए इतने कठोर कानून की जरूरत नही।जे पी एस सी में वैसे एजेंसी को काम दिया गया जो दोषी सिद्ध है जिन्हें ब्लैक लिस्ट किया जा चुका है
मर्डर केस में भी इतना कठोर कानून नही।किसी भी छात्र को फंसाया जा सकता है इसकी आड़ में।अगर आज यह कानून लाया गया तो काला दिन होगा।
यह विधेयक हड़बड़ी में लाया हुआ विधेयक है।यह काला कानून है ।छात्रों की आवाज़ को दबाने की यह साजिश है ताकि चोर दरवाज़े से 26 हज़ार नौकरियों को दिया जा सके और इसका कोई विरोध न हो।
यह बिल आंदोलनकारी छात्रों को धमकाने के लिए लाया गया है।अगर यह काला कानून लागू हुआ तो लाखों छात्र सड़क पर उतरेंगे. सरकार की यह मंशा है कि आज जेपीएससी, एसएससी सहित विभिन्न मामलों को लेकर जो विरोध चल रहा है उसे रोकने की कोशिश है।मुख्यमंत्री और सरकार की मंशा ठीक हो सकती है लेकिन बिल सही नही।
सरकार चाहती है कि कदाचार मुक्त परीक्षा हो तो मैं इसका पक्षधर हूँ।लेकिन प्रावधान कठिन करने की ज़रूरत नही।प्राथमिकी तो होनी चाहिए गिरफ्तारी पर विचार करना चाहिए वरना इसका दुरूपयोग होगा। आलमगीर आलम ने विधेयक पर कहा कि आज हम चर्चा कर रहे हैं और सदस्यों ने प्रवर समिति में भेजने की बात कही।वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह विधेयक लाया जा रहा है।जब कड़े नियम नही बनाये जाएंगे तो मेरिट वाले बच्चे सफल नही हों पाएँगे।कदाचार रोकने,प्रश्नपत्र के लीक पर रोक।

















