Ranchi- जेएमएम समर्थकों के ट्विटर एकाउंट पर आज एक ट्वीट ट्रेन्ड कर रहा है, हेमंत नहीं तो कौन. दरअसल ट्विटर पर सक्रिय जेएमएम के हजारों समर्थकों की ओर से इस ट्विट को ट्रेन्ड करवाया जा रहा है.
दरअसल पिछले कुछ दिनों से हेमंत सरकार पर ईडी की तलवार लटका रही है. एक-एक कर जेएमएम के कई समर्थकों पर ईडी की ओर से छापेमारी की जा चुकी है.
खुद हेमंत सोरेन पर विधायक रहते हुए खनन पट्टा लेने का आरोप है.
राज्य के खनन सचिव पूजा सिंघल आय से अधिक मामले में ईडी की गिरफ्त में है.
हेमंत सोरेन के भाई बसंत सोरेन पर भी अवैध तरीके से खनन चलाने का आरोप है, उन पर कई और आरोप भी है,
हेमंत सोरेन के विधायक प्रतिनिधि रहे पंकज मिश्रा भी ईडी के गिरफ्त में है.
कहा जा सकता है कि ईडी के सहारे हेमंत सरकार को पूरी तरह से घेर लिया गया है,
या यह दर्शाने की कोशिश की गयी है.
माना जा रहा है कि ईडी सहित दूसरी कई एजेंसियों की कार्रवाई से हेमंत सरकार फिलहाल हलकान है.
तो क्या इस ट्विट को ट्रेंड कर जेएमएम में हेमंत के विकल्प की तलाश शुरु हो चुकी है.
क्या राज्य में एक नये चेहरे की खोज हो रही है, जो हेमंत सोरेन के बाद राज्य की कमान को संभाल सकें
या यह उनके समर्थकों की ओर से हेमंत सोरेन को प्रोमोट करने की एक मुहिम है.
क्योंकि यह सारे ट्विट जेएमएम के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर उपलब्ध नहीं है.
हेमंत नहीं तो कौन का सवाल खड़ा कर विपक्ष को ललकारा गया है
जब इस बारे में जेएमएम के प्रवक्ता तनूज खत्री से प्रतिक्रिया मांगी गयी तो उनका साफ कहना था कि पूरी कवायद जेएमएम समर्थकों की ओर से की गई है. हेमंत सरकार पर कोई खतरा नहीं मंडरा रहा.
दरअसल जेएमएम समर्थक “हेमंत नहीं को कौन” का सवाल खड़ा कर हेमंत सोरेन की उपलब्धियों को सामने लाने की कोशिश कर रहें है.
साथ ही विपक्षी दलों के सामने यह चुनौती भी पेश किया जा रहा है, आखिर उनके पास क्या कोई ऐसा चेहरा है, जो हेमंत सोरेन के मुकाबले खड़ा हो, जिस प्रकार हेमंत सोरेन ने बेहद कम संसाधनों के साथ कोरोना का मुकाबला किया, पूरे राज्य में कोई अफरा तफरी नहीं मची, जबकि दूसरे राज्यों में कोहराम की स्थिति बनी हुई थी, साथ ही कोरोना समाप्त होते ही जिस प्रकार राज्य को एक बार फिर से पूरी रफ्तार के साथ विकास के पथ पर अग्रसर किया गया, युवाओं को रोजगार दिया गया, वर्षों से बाधित नियुक्ति प्रक्रिया को तेज किया गया, नियामवलियों का निर्माण कर नियुक्ति की बाधाओं को दूर किया गया वह बेहत सराहनीय है, जबकि विपक्ष में एक भी ऐसा चेहरा नहीं है, जो हेमंत के मुकाबले खड़ा हो सके.
नवनिर्वाचित राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से हेमंत सोरेन की मुलाकात
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