रूस-यूक्रेन युद्ध में मारे गए लोगों की मुक्ति के लिए यूक्रेनी युवती यूलिया ने किया सामूहिक पिंडदान

गया : बिहार के गया में इन दिनों विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला चल रहा है। यहां देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु आ रहे हैं और अपने पितरों के मोक्ष की कामना कर रहे हैं। इस बीच सात समुंदर पार से भी विदेशी आ रहे हैं। बड़ी खबर यह है कि रूस-यूक्रेन युद्ध में मारे गए दोनों देशों के लोगों के लिए गया में सामूहिक पिंडदान यूक्रेन की युवती के द्वारा किया गया।

यूक्रेनी युुवती ने किया युद्ध में मारे लग गए लोगों के लिए सामूहिक पिंडदान

यूक्रेन की रहने वाली यूलिया जिटोमेरेस स्काई गयाजी को पहुंची है। गया को पहुंचने के बाद शनिवार को रूस-यूक्रेन युद्ध में मारे गए लोगों के लिए यूलिया ने सामूहिक पिंडदान का कर्मकांड किया। इस दौरान विश्व शांति की भी कामना की। 32 विदेशियों का एक दल पिंडदान करने को गया पहुंचा है। कुल 60 के करीब विदेशी पिंडदानी गयाजी को आएंगे, जो कि रूस, यूक्रेन, यूूएस और जर्मनी समेत अन्य देशों से होंगे। ये विदेशी तीर्थ यात्री अलग-अलग दिनों में पिंडदान का कर्मकांड करेंगे। शनिवार को यूक्रेनी युुवती यूलिया ने गया विष्णुपद तीर्थ में पहुंचकर मोक्षदायिनी फल्गु के देवघाट तट पर पिंडदान किया है।

युद्ध में अकाल मृत्यु हुए दोनों देशों के सैनिकों और आम लोगों के लिए सामूहिक पिंडदान

रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध अभी जारी है। ऐसे में यूक्रेनी युवती ने एक बड़ा नाजीर पेश किया है, जब उसके द्वारा युद्ध में मारे गए यूक्रेन ही नहीं, बल्कि रूसी सैनिकों के लिए भी पिंडदान किया गया। इसने रूस-यूक्रेन युद्ध में मारे गए सैनिकों-आम लोगों के आत्म शांति और उनके मोक्ष प्राप्ति के लिए पिंडदान किया। विदेशी युवती यूलिया ने बताया कि वह युद्ध को खत्म होते देखना चाहती है। वहीं वह दोनों देशों के युद्ध में मारे गए लोगों के मोक्ष की कामना और विश्व शांति की कामना को लेकर यहां पिंडदान करने आई है। गयाजी से वह काफी प्रभावित है। वह अपने माता-पिता का भी पिंडदान करने आई है। गयाजी तीर्थ में आकर उसे काफी शांति मिलती है। वहीं, अब उसे और अधिक शांति मिल रही है, क्योंकि उसने रूस यूक्रेन युद्ध में मारे गए लोगों के आत्म शांति और मोक्ष के लिए सामूहिक पिंडदान किया है और विश्व शांति की भी कामना की है।

आलिया के माता-पिता नहीं है, खुद साइकोलॉजिस्ट है

वहीं, इस्कॉन के धर्म प्रचारक लोकनाथ गौड़ ने बताया कि यूक्रेनी युवती यूलिया के माता-पिता नहीं है। वह दूसरी दफा गया जी को आई है। वह गया मोक्ष धाम से काफी प्रभावित है। अपने देश में वह सनातन धर्म को लेकर उत्साहित हो लोगों को बताती रहती है। आलिया को सनातन धर्म में काफी विश्वास है। वहीं, उसने गयाजी मोक्ष धाम पर काफी अध्ययन किया है और वह एक साइकोलॉजिस्ट होते हुए गयाजी को पहुंची है। रूस और यूक्रेन युद्ध में मारे गए लोगों के लिए सामूहिक पिंडदान कर रही है। वहीं अपने माता-पिता के मोक्ष की भी कामना की है। इसके अलावा उसके द्वारा इस गया की भूमि से विश्व शांति की कामना की गई है।

आशीष कुमार की रिपोर्ट

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