ज्ञानेश कुमार के नए CEC बनने से सुर्खियों में यूपी

वाराणसी / लखनऊ : ज्ञानेश कुमार के नए CEC बनने से सुर्खियों में यूपी। चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित नए कानून के तहत देश में नियुक्त होने वाले पहले मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार संबंधी अधिसूचना जारी होते ही यूपी सियासी तौर पर सुर्खियों में आ गया है।

वजह यह है कि नए CEC ज्ञानेश कुमार न केवल यूपी से हैं बल्कि यूपी के अलग-अलग शहरों में बतौर छात्र अपनी मेधा का शुरूआती जीवन में ही लोहा मनवा चुके हैं। उनकी नई तैनाती की जानकारी अधिसूचना के मार्फत सार्वजनिक होने के बाद से सियासी दलों के बीच ज्ञानेश कुमार को लेकर चर्चाएं शुरू हो चुकी हैं।

बतौर प्रशासकीय अधिकारी ज्ञानेश कुमार की काबिलयत का लोहा प्रतिपक्षी सियासी धुरंधर भी जानते हैं और यही कारण है कि ज्ञानेश कुमार के कार्यभार संभालने से पहले ही उनकी नियुक्ति को लेकर कांग्रेस समेत की विपक्षी दलों ने भाजपा, PM Modi और गृह मंत्री अमित शाह पर सवाल दागने शुरू कर दिए हैं। लेकिन इन सबसे इतर यूपी के लाल के रूप में ज्ञानेश कुमार की अपनी अलग ही छवि शुरू से रही है।

वाराणसी के क्वींस कॉलेज के टॉपर रहे हैं ज्ञानेश कुमार

नए CEC (मुख्य चुनाव आयुक्त) ज्ञानेश कुमार गुप्ता की जन्म स्थली यूपी का आगरा है। उनके पिता डॉ. सुबोध कुमार गुप्ता और मां सत्यवती गुप्ता विजय नगर कॉलोनी में रहते हैं। पिता मुख्य चिकित्सा अधिकारी के पद से रिटायर हो चुके हैं। पिता के सरकारी नौकरी में होने की वजह से उनका तबादला होता रहा।

उसी क्रम में ज्ञानेश कुमार की शिक्षा यानि पढ़ाई-लिखाई यूपी के विभिन्न शहरों में हुई। उनकी शिक्षा वाराणसी, गोरखपुर, लखनऊ और कानपुर से हुई। ज्ञानेश बचपन से ही प्रतिभाशाली थे।

वाराणसी के क्वींस कॉलेज में वह टॉपर रहे जिस क्वींस कॉलेज में हिंदी के महान कथाकार-उपन्यासकार मुंशी प्रेमचंद ने पढ़ाई की थी। 12वीं उन्होंने लखनऊ के काल्विन तालुकेदार कॉलेज से की, यहां भी टॉप किया। इसके बाद आईआईटी कानपुर से सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक किया।

उसके बाद वे सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने दिल्ली चले गए। वहां एक साल उन्होंने हुडको में भी काम कया। 1988 में उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा पास की और केरल कैडर के आईएसएस अधिकारी बन गए। पहली नियुक्ति उन्हें तिरुवनंतपुरम में बतौर डीएम मिली। उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में पोस्ट ग्रेजुएशन भी किया है।

नए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार
नए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार

अनुच्छेद 370 और राम मंदिर निर्माण में रही ज्ञानेश कुमार की अहम भूमिका

बताया जा रहा है कि गृह मंत्रालय में सचिव रहते हुए जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का फैसला हो या फिर अयोध्या में राम मंदिर निर्माण कमेटी के सदस्य के तौर पर काम। नए मुख्य चुनाव आयुक्त वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ज्ञानेश कुमार ने अपनी काबिलियत से केंद्र सरकार के फैसलों को लागू करने में बड़ी भूमिका निभाई है।

उन्हें केंद्र सरकार ने श्रीराम मंदिर तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट में प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त किया था। वे बाल स्वरूप के भगवान श्रीराम की मूर्ति चयन के निर्णायक मंडल में भी रहे। अब CEC के तौर पर ज्ञानेश कुमार का कार्यकाल 26 जनवरी 2029 तक होगा।

राजीव कुमार आज 18 फरवरी को रिटायर हो रहे हैं और कल 19 फरवरी को ज्ञानेश कुमार सीईसी का पद संभालेंगे। 1988 बैच के केरल कैडर के आईएएस अधिकारी ज्ञानेश कुमार मार्च, 2024 से ही चुनाव आयुक्त के रूप में काम कर रहे हैं। उन्हें पदोन्नत किया गया है।

ज्ञानेश कुमार पर इस साल बिहार का विधानसभा चुनाव और अगले साल पश्चिम बंगाल, असम और तमिलनाडु का चुनाव संपन्न कराने की जिम्मेदारी होगी।

नए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार
नए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार

नए CEC ज्ञानेश कुमार के पास है लंबा प्रशासनिक कामकाज का अनुभव…

वर्तमान कानून के अनुसार, मुख्य निर्वाचन आयुक्त या निर्वाचन आयुक्त 65 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होते हैं। या बतौर आयुक्त छह वर्ष के लिए आयोग में सेवाएं दे सकते हैं। CEC नियुक्त किए गए ज्ञानेश कुमार के पास 37 साल से अधिक का प्रशासनिक अनुभव है।

वे केरल सरकार में एर्णाकुलम के सहायक जिलाधिकारी, अडूर के उपजिलाधिकारी, एससी/एसटी के लिए केरल राज्य विकास निगम के प्रबंध निदेशक, कोचीन निगम के नगर आयुक्त के अलावा अन्य पदों पर भी सेवाएं दे चुके हैं। केरल सरकार के सचिव के रूप में उन्होंने वित्त संसाधन, फास्ट-ट्रैक परियोजनाओं और लोक निर्माण विभाग जैसे विविध विभागों को संभाला।

बता दें कि अब तक सबसे वरिष्ठ चुनाव आयुक्त को ही मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में पदोन्नत किया जाता था। हालांकि, पिछले साल मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त की नियुक्तियों पर एक नया कानून लागू हुआ।

इसके तहत एक खोज समिति ने इन पदों पर नियुक्ति के लिए पांच सचिव स्तर के अधिकारियों के नामों को शॉर्ट लिस्ट किया था, ताकि प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली समिति उन पर विचार कर सके। पीएम, लोकसभा में नेता विपक्ष और पीएम की तरफ से नामित एक कैबिनेट मंत्री एक नाम को मंजूरी देते हैं। इसके बाद राष्ट्रपति की ओर से नए मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की जाती है।

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