पटना : ओडिशा के भुवनेश्वर में आयोजित कृषि पर क्षेत्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए राज्य के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि बिहार में मुख्य रूप से धान, गेहूं, मक्का, दलहन एवं तिलहनी फसलों की खेती की जाती है। पिछले वर्षों में खाद्यान्न उत्पादन एवं उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इस अवसर पर उन्होंने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान से बीज अनुदान दरों में वृद्धि, दलहन एवं तिलहन फसलों के गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक सहयोग प्रदान करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार दलहन एवं तिलहन में आत्मनिर्भरता के साथ-साथ उद्यानिकी फसलों के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने के लिए पूरी तरह कृतसंकल्प है।
226.71 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न उत्पादन का अनुमान
कृषि मंत्री ने बताया कि बिहार में कृषि के क्षेत्र में अपार संभावनाओं को साकार करने के लिए वर्ष 2008 से कृषि रोड मैप बनाकर योजनाबद्ध तरीके से किसानों एवं कृषि क्षेत्र का विकास किया जा रहा है। वर्ष 2005 की तुलना में राज्य में खाद्यान्न उत्पादन में तीन गुना से अधिक वृद्धि हुई है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में बिहार में रिकॉर्ड 247.83 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न उत्पादन हुआ, जबकि नवंबर माह में आए मोथा तूफान एवं मार्च माह में असामयिक वर्षा के कारण वित्तीय वर्ष 2025-26 में तृतीय पूर्वानुमान के अनुसार कुल खाद्यान्न उत्पादन 226.71 लाख मीट्रिक टन अनुमानित है।

88.40 लाख किसानों का E-KYC पूर्ण
उन्होंने कहा कि पूर्व में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री के रूप में वर्षों से लंबित म्यूटेशन एवं परिमार्जन कार्यों को पोर्टल आधारित प्रणाली से गति दी गई, जिसके सकारात्मक परिणामस्वरूप फार्मर रजिस्ट्री अभियान को ऐतिहासिक सफलता मिली है। राज्य में अब तक 88.40 लाख किसानों का ई-केवाईसी पूर्ण किया जा चुका है तथा 48.45 लाख से अधिक किसानों का फार्मर आईडी बनाया गया है। राज्य सरकार ने 12 मई से 30 जून 2026 तक विशेष अभियान चलाकर सभी किसानों का फार्मर आईडी बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
राज्य सरकार खरीफ मौसम में संकर धान, संकर मक्का, दलहन व तिलहन फसलों विशेषकर सरसों व सोयाबीन को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य कर रही है
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार खरीफ मौसम में संकर धान, संकर मक्का, दलहन एवं तिलहन फसलों विशेषकर सरसों एवं सोयाबीन को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य कर रही है। साथ ही मखाना उत्पादन, शुष्क बागवानी, फसल विविधीकरण, गोदाम निर्माण, प्राथमिक प्रसंस्करण एवं फार्म ऑटोमेशन पर विशेष बल दिया जा रहा है ताकि किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित की जा सके।

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