सिर्फ आदिवासियों के नाम पर होता रहा योजनाओं का निर्माण- अर्जुन मुंडा

रांचीः केन्द्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने भाजपा एसटी मोर्चा के केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक को सम्बोधित किया. इस अवसर पर अर्जुन मुंडा ने कहा कि आजादी के बाद कांग्रेस द्वारा आदिवासियों के नाम पर योजनाओं बनाई जाती रही, लेकिन आदिवासियों के लिए योजनाएं नहीं बनी. केन्द्र सरकार आदिवासियों के लिए फंड जारी कर अपना पल्ला झाड़ लेती थी.

परन्तु, 2014 से यह सब कुछ बदल गया, भारत में करीबन 700 जनजातियां निवास करती है. हमें सबको साथ लेकर आगे बढ़ना है, राजनीतिक गतिविधियों के साथ ही सामाजिक गतिविधियों से जुड़े रहना है. सामाजिक सरोकार बढ़ाना है. हमारी पंरपरा में जो जींवतता है, गतिशीलता है, उसे बचाये और बनाये रखना है. गांव की सहभागिता को बढ़ाना है. गांव को आर्दश बनाना है. इनको एक साथ लेकर आगे बढ़े, इसके लिए एकलव्य मॉडल के आधार पर विकास की योजना बनाई जा रही है.

जनजाति समाज भारत के हर राज्य में है, हमें अपना गांव, पंचायत को सामर्थ्यवान बना कर देश को मजबूत बनाना है, हर राज्य में जनजातीय शोध संस्थान केन्द्र है, हमें इसके साथ जुड़कर, इसको साथ लेकर विकास के कार्यक्रमों का निर्माण करना है. सब कुछ जनजातीय शोध संस्थान केन्द्र के अधिकारियों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता. अधिकारियों के काम करने का अपना तरीका है. हमें भी इसके साथ जुड़ना है. जल, जंगल और जमीन हमारी बुनियाद है, हमें इसे मजबूत करना है, इसको केन्द्र बना कर रणनीतियां बनानी है.

हमारे पूर्वजों ने संघर्ष किया है, कुर्बानियां दी है, अपने स्वाभिमान को जिन्दा रखा है
भगवान बिरसा की इस धरती पर आज पूरे देश के जनजाति समाज के लोग मौजूद है. हमारे पूर्वजों ने संघर्ष किया है, कुर्बानियां दी है, अपने स्वाभिमान को जिन्दा रखा है. बाबा तिलका मांझी, चांद-भैरव, सिद्धु-कान्हु, शहीद गंगा नारायण ने हमारे समाज के आत्मसम्मान के लिए कुर्बानियां दी है, कुर्बानी हमारी विरासत रही है. इस सभागार में लगी हमारे पूर्वजों की तस्वीर इसकी तस्दीक करती है. समय के बदलाव लाजमी है, बदले हालात में हमें भी बदलना होगा. लेकिन, साथ ही अपनी पंरपरा और संस्कृति भी बचाये रखनी है, गांव को बचाये रखना है. गांव को सही तरीके से समझना है.

एकलव्य मॉडल स्कूल के लिए जमीन नहीं  दी जा रही है.

हमारी कोशिश हर ब्लौक में एक एकलव्य मॉडल विद्यालय की स्थापना करनी है, लेकिन आज इसका विरोध किया जा रहा है. झारखंड को कोई मंत्री या जनप्रतिनिधि ने जनजातीय समाज के विकास या उनके लिए योजनाओं की जानकारी के लिए संपर्क नहीं किया. एकलव्य मॉडल स्कूल के लिए जमीन नहीं  दी जा रही है.

कांग्रेस का पलटवार

अर्जुन मुंडा के द्वारा भाजपा एसटी मोर्चा के केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक में सम्बोधन पर कांग्रेस ने पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा निशाना साधा है. राजीव रंजन ने कहा है कि झारखंड और केंद्र में एक ही पार्टी की सरकार होने के बावजूद आदिवासियों  अब तक विकास नहीं हुआ. जबकि झारखंड में सबसे अधिक समय तक भाजपा की ही सरकार रही. आदिवासियों के विकास नहीं होने का कारण है भाजपा, भाजपा के कारण ही आदिवासियों का विकास नहीं हो सका.

रांचीः केन्द्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने भाजपा एसटी मोर्चा के केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक को सम्बोधित किया. इस अवसर पर अर्जुन मुंडा ने कहा कि आजादी के बाद कांग्रेस द्वारा आदिवासियों के नाम पर योजनाओं बनाई जाती रही, लेकिन आदिवासियों के लिए योजनाएं नहीं बनी. केन्द्र सरकार आदिवासियों के लिए फंड जारी कर अपना पल्ला झाड़ लेती थी.

परन्तु, 2014 से यह सब कुछ बदल गया, भारत में करीबन 700 जनजातियां निवास करती है. हमें सबको साथ लेकर आगे बढ़ना है, राजनीतिक गतिविधियों के साथ ही सामाजिक गतिविधियों से जुड़े रहना है. सामाजिक सरोकार बढ़ाना है. हमारी पंरपरा में जो जींवतता है, गतिशीलता है, उसे बचाये और बनाये रखना है. गांव की सहभागिता को बढ़ाना है. गांव को आर्दश बनाना है. इनको एक साथ लेकर आगे बढ़े, इसके लिए एकलव्य मॉडल के आधार पर विकास की योजना बनाई जा रही है.

जनजाति समाज भारत के हर राज्य में है, हमें अपना गांव, पंचायत को सामर्थ्यवान बना कर देश को मजबूत बनाना है, हर राज्य में जनजातीय शोध संस्थान केन्द्र है, हमें इसके साथ जुड़कर, इसको साथ लेकर विकास के कार्यक्रमों का निर्माण करना है. सब कुछ जनजातीय शोध संस्थान केन्द्र के अधिकारियों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता. अधिकारियों के काम करने का अपना तरीका है. हमें भी इसके साथ जुड़ना है. जल, जंगल और जमीन हमारी बुनियाद है, हमें इसे मजबूत करना है, इसको केन्द्र बना कर रणनीतियां बनानी है.

हमारे पूर्वजों ने संघर्ष किया है, कुर्बानियां दी है, अपने स्वाभिमान को जिन्दा रखा है
भगवान बिरसा की इस धरती पर आज पूरे देश के जनजाति समाज के लोग मौजूद है. हमारे पूर्वजों ने संघर्ष किया है, कुर्बानियां दी है, अपने स्वाभिमान को जिन्दा रखा है. बाबा तिलका मांझी, चांद-भैरव, सिद्धु-कान्हु, शहीद गंगा नारायण ने हमारे समाज के आत्मसम्मान के लिए कुर्बानियां दी है, कुर्बानी हमारी विरासत रही है. इस सभागार में लगी हमारे पूर्वजों की तस्वीर इसकी तस्दीक करती है. समय के बदलाव लाजमी है, बदले हालात में हमें भी बदलना होगा. लेकिन, साथ ही अपनी पंरपरा और संस्कृति भी बचाये रखनी है, गांव को बचाये रखना है. गांव को सही तरीके से समझना है.

एकलव्य मॉडल स्कूल के लिए जमीन नहीं  दी जा रही है.

हमारी कोशिश हर ब्लौक में एक एकलव्य मॉडल विद्यालय की स्थापना करनी है, लेकिन आज इसका विरोध किया जा रहा है. झारखंड को कोई मंत्री या जनप्रतिनिधि ने जनजातीय समाज के विकास या उनके लिए योजनाओं की जानकारी के लिए संपर्क नहीं किया. एकलव्य मॉडल स्कूल के लिए जमीन नहीं  दी जा रही है.

कांग्रेस का पलटवार

अर्जुन मुंडा के द्वारा भाजपा एसटी मोर्चा के केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक में सम्बोधन पर कांग्रेस ने पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा निशाना साधा है. राजीव रंजन ने कहा है कि झारखंड और केंद्र में एक ही पार्टी की सरकार होने के बावजूद आदिवासियों  अब तक विकास नहीं हुआ. जबकि झारखंड में सबसे अधिक समय तक भाजपा की ही सरकार रही. आदिवासियों के विकास नहीं होने का कारण है भाजपा, भाजपा के कारण ही आदिवासियों का विकास नहीं हो सका.

रांचीः केन्द्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने भाजपा एसटी मोर्चा के केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक को सम्बोधित किया. इस अवसर पर अर्जुन मुंडा ने कहा कि आजादी के बाद कांग्रेस द्वारा आदिवासियों के नाम पर योजनाओं बनाई जाती रही, लेकिन आदिवासियों के लिए योजनाएं नहीं बनी. केन्द्र सरकार आदिवासियों के लिए फंड जारी कर अपना पल्ला झाड़ लेती थी.

परन्तु, 2014 से यह सब कुछ बदल गया, भारत में करीबन 700 जनजातियां निवास करती है. हमें सबको साथ लेकर आगे बढ़ना है, राजनीतिक गतिविधियों के साथ ही सामाजिक गतिविधियों से जुड़े रहना है. सामाजिक सरोकार बढ़ाना है. हमारी पंरपरा में जो जींवतता है, गतिशीलता है, उसे बचाये और बनाये रखना है. गांव की सहभागिता को बढ़ाना है. गांव को आर्दश बनाना है. इनको एक साथ लेकर आगे बढ़े, इसके लिए एकलव्य मॉडल के आधार पर विकास की योजना बनाई जा रही है.

जनजाति समाज भारत के हर राज्य में है, हमें अपना गांव, पंचायत को सामर्थ्यवान बना कर देश को मजबूत बनाना है, हर राज्य में जनजातीय शोध संस्थान केन्द्र है, हमें इसके साथ जुड़कर, इसको साथ लेकर विकास के कार्यक्रमों का निर्माण करना है. सब कुछ जनजातीय शोध संस्थान केन्द्र के अधिकारियों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता. अधिकारियों के काम करने का अपना तरीका है. हमें भी इसके साथ जुड़ना है. जल, जंगल और जमीन हमारी बुनियाद है, हमें इसे मजबूत करना है, इसको केन्द्र बना कर रणनीतियां बनानी है.

हमारे पूर्वजों ने संघर्ष किया है, कुर्बानियां दी है, अपने स्वाभिमान को जिन्दा रखा है
भगवान बिरसा की इस धरती पर आज पूरे देश के जनजाति समाज के लोग मौजूद है. हमारे पूर्वजों ने संघर्ष किया है, कुर्बानियां दी है, अपने स्वाभिमान को जिन्दा रखा है. बाबा तिलका मांझी, चांद-भैरव, सिद्धु-कान्हु, शहीद गंगा नारायण ने हमारे समाज के आत्मसम्मान के लिए कुर्बानियां दी है, कुर्बानी हमारी विरासत रही है. इस सभागार में लगी हमारे पूर्वजों की तस्वीर इसकी तस्दीक करती है. समय के बदलाव लाजमी है, बदले हालात में हमें भी बदलना होगा. लेकिन, साथ ही अपनी पंरपरा और संस्कृति भी बचाये रखनी है, गांव को बचाये रखना है. गांव को सही तरीके से समझना है.

एकलव्य मॉडल स्कूल के लिए जमीन नहीं  दी जा रही है.

हमारी कोशिश हर ब्लौक में एक एकलव्य मॉडल विद्यालय की स्थापना करनी है, लेकिन आज इसका विरोध किया जा रहा है. झारखंड को कोई मंत्री या जनप्रतिनिधि ने जनजातीय समाज के विकास या उनके लिए योजनाओं की जानकारी के लिए संपर्क नहीं किया. एकलव्य मॉडल स्कूल के लिए जमीन नहीं  दी जा रही है.

कांग्रेस का पलटवार

अर्जुन मुंडा के द्वारा भाजपा एसटी मोर्चा के केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक में सम्बोधन पर कांग्रेस ने पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा निशाना साधा है. राजीव रंजन ने कहा है कि झारखंड और केंद्र में एक ही पार्टी की सरकार होने के बावजूद आदिवासियों  अब तक विकास नहीं हुआ. जबकि झारखंड में सबसे अधिक समय तक भाजपा की ही सरकार रही. आदिवासियों के विकास नहीं होने का कारण है भाजपा, भाजपा के कारण ही आदिवासियों का विकास नहीं हो सका.

रांचीः केन्द्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने भाजपा एसटी मोर्चा के केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक को सम्बोधित किया. इस अवसर पर अर्जुन मुंडा ने कहा कि आजादी के बाद कांग्रेस द्वारा आदिवासियों के नाम पर योजनाओं बनाई जाती रही, लेकिन आदिवासियों के लिए योजनाएं नहीं बनी. केन्द्र सरकार आदिवासियों के लिए फंड जारी कर अपना पल्ला झाड़ लेती थी.

परन्तु, 2014 से यह सब कुछ बदल गया, भारत में करीबन 700 जनजातियां निवास करती है. हमें सबको साथ लेकर आगे बढ़ना है, राजनीतिक गतिविधियों के साथ ही सामाजिक गतिविधियों से जुड़े रहना है. सामाजिक सरोकार बढ़ाना है. हमारी पंरपरा में जो जींवतता है, गतिशीलता है, उसे बचाये और बनाये रखना है. गांव की सहभागिता को बढ़ाना है. गांव को आर्दश बनाना है. इनको एक साथ लेकर आगे बढ़े, इसके लिए एकलव्य मॉडल के आधार पर विकास की योजना बनाई जा रही है.

जनजाति समाज भारत के हर राज्य में है, हमें अपना गांव, पंचायत को सामर्थ्यवान बना कर देश को मजबूत बनाना है, हर राज्य में जनजातीय शोध संस्थान केन्द्र है, हमें इसके साथ जुड़कर, इसको साथ लेकर विकास के कार्यक्रमों का निर्माण करना है. सब कुछ जनजातीय शोध संस्थान केन्द्र के अधिकारियों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता. अधिकारियों के काम करने का अपना तरीका है. हमें भी इसके साथ जुड़ना है. जल, जंगल और जमीन हमारी बुनियाद है, हमें इसे मजबूत करना है, इसको केन्द्र बना कर रणनीतियां बनानी है.

हमारे पूर्वजों ने संघर्ष किया है, कुर्बानियां दी है, अपने स्वाभिमान को जिन्दा रखा है
भगवान बिरसा की इस धरती पर आज पूरे देश के जनजाति समाज के लोग मौजूद है. हमारे पूर्वजों ने संघर्ष किया है, कुर्बानियां दी है, अपने स्वाभिमान को जिन्दा रखा है. बाबा तिलका मांझी, चांद-भैरव, सिद्धु-कान्हु, शहीद गंगा नारायण ने हमारे समाज के आत्मसम्मान के लिए कुर्बानियां दी है, कुर्बानी हमारी विरासत रही है. इस सभागार में लगी हमारे पूर्वजों की तस्वीर इसकी तस्दीक करती है. समय के बदलाव लाजमी है, बदले हालात में हमें भी बदलना होगा. लेकिन, साथ ही अपनी पंरपरा और संस्कृति भी बचाये रखनी है, गांव को बचाये रखना है. गांव को सही तरीके से समझना है.

एकलव्य मॉडल स्कूल के लिए जमीन नहीं  दी जा रही है.

हमारी कोशिश हर ब्लौक में एक एकलव्य मॉडल विद्यालय की स्थापना करनी है, लेकिन आज इसका विरोध किया जा रहा है. झारखंड को कोई मंत्री या जनप्रतिनिधि ने जनजातीय समाज के विकास या उनके लिए योजनाओं की जानकारी के लिए संपर्क नहीं किया. एकलव्य मॉडल स्कूल के लिए जमीन नहीं  दी जा रही है.

कांग्रेस का पलटवार

अर्जुन मुंडा के द्वारा भाजपा एसटी मोर्चा के केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक में सम्बोधन पर कांग्रेस ने पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा निशाना साधा है. राजीव रंजन ने कहा है कि झारखंड और केंद्र में एक ही पार्टी की सरकार होने के बावजूद आदिवासियों  अब तक विकास नहीं हुआ. जबकि झारखंड में सबसे अधिक समय तक भाजपा की ही सरकार रही. आदिवासियों के विकास नहीं होने का कारण है भाजपा, भाजपा के कारण ही आदिवासियों का विकास नहीं हो सका.

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