पश्चिम चंपारण के मैनटांड़ में प्रशांत किशोर ने उठाया सवाल
‘1250 से 1500 परिवारों के लोग ही बनते हैं विधायक-सांसद’
पटना : बिहार राजनीती में परिवारवाद – बिहार में करीब तीन करोड़ परिवार रहते हैं,
लेकिन सिर्फ 1250 से 1500 परिवारों के लोग ही विधायक और सांसद क्यों बनते हैं.
ये सवाल उठाया है चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने.
पश्चिम चंपारण के मैनटांड में लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बिहार में
करीब तीन करोड़ परिवार रहते हैं, लेकिन गिने-चुने परिवारों को छोड़कर बांकी लोगों को मौका नहीं मिलता है.

बिहार राजनीती में परिवारवाद – जन सुराज यात्रा पर हैं प्रशांत किशोर
प्रशांत किशोर इन दिनों जन सुराज यात्रा पर हैं और इस यात्रा के नौवें दिन वो मैनटांड पहुंचे.
यहां कैंप में उन्होंने स्थानीय लोगों से मुलाकात की और उनकी समस्याओं को जाना
और अपनी योजनाओं के बारे में बताया. यहां उनसे मुलाकात करने वालों में ज्यादातर किसान थे.
प्रशांत किशोर ने कहा कि वो व्यवस्था परिवर्तन की सोच लेकर आग बढ़े हैं.
और जिन लोगों के भीतर समाज के लिए कुछ करने का जज्बा है ऐसे लोगों को मुख्य धारा में लाना चाहते हैं.

बिहार राजनीती में परिवारवाद – बिहार में व्यवस्था परिवर्तन जरूरी
उन्होने मौजूदा हालात का जिक्र करते हुए बताया कि बिहार आजादी के बाद तमिलनाडु से ज्यादा धनी था,
लेकिन आज हालात बदल गए हैं. अब बिहार के लोग तमिलनाडु जाकर मजदूरी करते हैं.
मौजूदा व्यवस्था को इसके लिए जिम्मेदार ठहराते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि
जबतक समाज जागेगा नहीं, प्रयास नहीं करेगा तबतक व्यवस्था परिवर्तन नहीं होगा.
बिहार: पीके ने राजनीतिक दलों से पूछा सवाल- राज्य में कहां हो रहा विकास
राजनीतिक दलों पर सीधा हमला बोलते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन की बात
करने से ही लोग परेशान हो रहे हैं. इसकी वजह ये है कि यदि जनता जाग गई तो
कोई राजनैतिक समीकरण काम नहीं करेगा. तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि हमारे लड़के देश के दूसरे राज्यों में मजदूरी कर रहे हैं. 13 करोड़ की आबादी में से 8 करोड़ लोग ऐसे हैं जो दिन में सौ रुपये भी नहीं कमा पाते. इसके बावजूद नेताजी कहते हैं कि राज्य में विकास हो रहा है.

















