आखिरकार दिल्ली को भगवान बिरसा की याद इतने अर्से के बाद क्यों आई? -हेमन्त सोरेन

रांची- झारखंड स्थापना दिवस और भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने भगवान बिरसा की जन्मस्थली उलीहातू में बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर नमन किया. इस अवसर पर ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम, मंत्री सत्यानन्द भोक्ता ओर जेएमएम विधायक विकास मुंडा भी मौजूद रहें.

मौके पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भगवान बिरसा के वंशजो को सोना सोबरन धोती योजना के तहत वस्त्र और भूमि का पट्टा देकर सम्मानित किया.

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए हेमंत सोरेन ने कहा कि आज और यहीं से ‘सरकार आपके द्वार कार्यक्रम’ की शुरुआत हो रही है. हमारी सरकार परम्परों को जीवित रखना चाहती है. आत्मनिर्भर और स्वालम्बी समाज का निर्माण चाहती है. इसीलिए बकरी, मुर्गी पालन पर जोर दिया जा रहा है.

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हमारे बच्चे सबसे अधिक कुपोषित

यह एक सच्चाई है कि सबसे अधिक हमारे बच्चे ही कुपोषित है. इस तरह की योजनाओं का उद्देश्य उन्हे कुपोषण से मुक्ति दिलवाना है. इस तरह की योजनाओं का निर्माण इसलिए भी जरुरी है ताकि हमारे लोगों को दो जुन की रोटी मिल सके.

अपनी महिलाओं को सड़क किनारे हड़िया बेचते देख कर खून की आंसू रोता हूँ-

हमारी महिलाएं बेवसी और लाचारी में हड़िया बेच रही है. यह एक गहरी साजिश है. आखिरकार दूसरी समुदाय की महिलाएं हड़िया क्यों नहीं बेचती. हमारी सरकार ऐसी महिलाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए कृतसंकल्प है. जब हम सड़क किनारे आदिवासी महिलाओं को हड़िया बेचते देखते हैं, खून की आंसू रोते हैं. हमारी सरकार ने यह भगवान बिरसा के चरण में यह निर्णय लिया है कि जो भी वृद्ध हैं, विधवा है चाहे वे किसी भी उम्र के उन सभी को पेंशन मिलेगा. हड़िया लेकर बैठने से जीवन नहीं चलने वाला, भगवान ने हमें दो हाथ और पैर काम करने के लिए दिया है.

 देश स्तर पर भगवान बिरसा मुंडा की जयंती मनाने में इतना लम्बा समय क्यों लगा.

आखिर कारण क्या है कि देश के स्तर पर हमारे नायक भगवान बिरसा मुंडा की जयंती मनाने में डेढ़ सौ वर्ष लग गयें

कारण स्पष्ट है कि अब जनजातीय समाज शिक्षित हो रहा है. अपनी आवाज दिल्ली तक पहुंचा रहा है. राजनीतिक रुप से सशक्त हो रहा है. अब हम अपनी आवाज दिल्ली तक पहुंचाने में सक्षम है. आदिवासियों का शिक्षित होना, अपने अधिकारों के प्रति जागरुक होना ही वह मजबूरी है जिसके कारण आज दिल्ली को भगवान बिरसा की जयंती तो देश के स्तर पर आयोजित करने के लिए बाध्य होना पड़ा. यह हमारी सफलता है. लेकिन उनके लिए मजबूरी में लिया गया निर्णय है.

रिपोर्ट-मदन

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