Dhanbad– लोक आस्था के महापर्व छठ में कोसी पूजने की भी एक प्रथा है. यह काम उन श्रद्धालुओं के द्वारा किया जाता है जिनकी मन्नते पूरी हो जाती है. बिहार झारखण्ड में अमूमन हर घाट पर कोसी पूजने की तस्वीर दिख जाती है.

कुछ श्रद्धालु छठ घाट से वापस आकर आंगन या दरवाजे पर कोसी भरने की प्रक्रिया संपन्न करते हैं.इसे लेकर पहले से ही तैयारी की जाती है. इसकी सामग्री भी अलग होती है. शुरुआत पहले अर्घ्य के बाद होती है और समाप्ति दूसरा अर्घ्य देने के साथ होती है.ऐसी मान्यता है कि अगर कोई व्यक्ति मन्नत मांगता है और वह पूरी होती है तो उसे कोसी भरना पड़ता है. जोड़े में कोसी भरना शुभ माना जाता है. इसके लिए कम से कम चार या सात गन्ने का मंडप बनाया जाता है. लाल रंग के कपड़े में ठेकुआ, फल, अर्कपात, केराव रखकर गन्ने के मंडप के ऊपर बांधा जाता है. उसके अंदर मिट्टी के बने हाथी को रखकर उस पर कलश रख पूजा की जाती है.
रिपोर्ट-राजकुमार




