रांचीः एमिटी यूनिवर्सिटी झारखंड के संस्थापक अध्यक्ष और चांसलर, के विज़न और मिशन के साथ आगे बढ़ते हुए, एमिटी यूनिवर्सिटी झारखंड और भारतीय वानिकी अनुसंधान और शिक्षा परिषद (आईसीएफआरई)- वन उत्पादकता संस्थान (आईएफपी) ने 22 जून को समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया. इस समझौता ज्ञापन का उद्देश्य अपनी तरह के पहले प्रयास में वानिकी विज्ञान के क्षेत्र में अकादमिक और अनुसंधान सहयोग को बढ़ावा देना है. इन विस्तार रणनीतीयों और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के माध्यम से जनता के लिए अत्याधुनिक तकनीकों का विकास, उन्नयन और प्रसार किया जाएगा. एमिटी यूनिवर्सिटी झारखंड के प्रो वाइस चांसलर डॉ.अशोक के श्रीवास्तव ने समझौता ज्ञापन हस्ताक्षर पर अपनी हार्दिक बधाई दी.
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एमओयू पर एमिटी यूनिवर्सिटी झारखंड के रजिस्ट्रार श्री प्रभाकर त्रिपाठी और आईसीएफआरई-आईएफपी के निदेशक डॉ. योगेश्वर मिश्रा ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर निदेशक डॉ. विकास मिश्रा, डॉ. अजय महलका ,एमिटी यूनिवर्सिटी झारखंड और अंजना सुचिता तिर्की, आईएफएस, डॉ. आदित्य कुमार, आईसीएफआरई-आईएफपी वैज्ञानिक-की उपस्थित थे.
यह एमओयू सहयोगात्मक शिक्षा कार्यक्रम, क्षमता निर्माण और संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं के लिए एमिटी यूनिवर्सिटी झारखंड और आईसीएफआरई-आईएफपी के लिए अवसर के नए अज्ञात रास्ते खोलेगा, जो वन संसाधनों के वैज्ञानिक और टिकाऊ प्रबंधन को बढ़ावा देगा. एमओयू शैक्षणिक, अनुसंधान और प्रशिक्षण उद्देश्यों के लिए छात्रों के आदान-प्रदान को बढ़ाएगा. एमओयू में राष्ट्रीय वन और पर्यावरण कार्यक्रम को सफलतापूर्वक लागू करने, असमानता को कम करने और पर्यावरण की गुणवत्ता में सुधार करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है. एमओयू से झारखंड के पक्ष में हर्बल पौधों, पौधों की आनुवंशिकी और वन प्रबंधन पर काम करने की अनुमति मिलेगी.

















