एमिटी यूनिवर्सिटी और रिम्स के बीच हुआ एमओयू ,संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं को बढ़ावा देने का उद्देश्य

रांची: एमिटी यूनिवर्सिटी झारखंड और रिम्स के बीच एमओयू साइन हुआ है. शुक्रवार को समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया गया. समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर डॉ अशोक के श्रीवास्तव, प्रो वाइस चांसलर, एमिटी यूनिवर्सिटी झारखंड, प्रो (डॉ) कामेश्वर प्रसाद (निदेशक, रिम्स), डॉ निशांत मणि (निदेशक आईक्यूएसी), प्रभाकर त्रिपाठी (रजिस्ट्रार, एमिटी यूनिवर्सिटी) झारखंड, डॉ अजय कुमार बाखला और डॉ त्रिपाठी ने किया.

समझौता ज्ञापन के अनुसार एमिटी विश्वविद्यालय और रिम्स के सहयोग के क्षेत्रों में अकादमिक और अनुसंधान बातचीत को बढ़ावा देने के लिए अपनी संबंधित महत्वपूर्ण शोध और अनुसंधान सुविधाओं को साझा करने के लिए प्रावधान करेंगे. एमिटी विश्वविद्यालय और रिम्स के पास उपलब्ध अनुसंधान उपकरण सुविधाएं  शोधार्थियों को उपलब्ध कराई जाएंगी.

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डॉ अशोक के श्रीवास्तव ने कहा कि शैक्षणिक अनुसंधान और प्रशिक्षण उद्देश्यों के लिए छात्रों का आदान-प्रदान होगा. एमिटी विश्वविद्यालय की इकाई एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ क्लिनिकल साइकोलॉजी (एआईसीपी) के छात्र रिम्स के मनोचिकित्सक और क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट के मार्गदर्शन में काम करेंगे. साथ ही मामलों के मूल्यांकन और उपचार में मदद करेंगे. छात्रों को अपने कार्यक्रम को पूरा करने के लिए सभी उपचारों और बुनियादी ढांचे से अवगत कराया जाएगा. नैदानिक पृष्ठभूमि और परीक्षण में विशेषज्ञता रखने वाले एमिटी विश्वविद्यालय के एआईसीपी के संकाय सदस्य छात्रों को आवश्यक मार्गदर्शन देने और परीक्षण, विश्लेषण और रोगियों के लिए चिकित्सा का उपयोग करने में रिम्स की मदद करेंगे. रिम्स के मनोचिकित्सक/नैदानिक मनोवैज्ञानिक छात्रों का मार्गदर्शन और पर्यवेक्षण करेंगे.

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डॉ अशोक के श्रीवास्तव, प्रो वाइस चांसलर, एमिटी यूनिवर्सिटी झारखंड ने कहा कि आज हम जिस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर रहे हैं, वह मानव जाति की उस रिश्ते की शुरुआत है, जिसे हम एक लंबे रिश्ते के रूप में मानते हैं. जिसमें हम बेहतरी के लिए सहकारी शैक्षणिक गतिविधियों के माध्यम से एक-दूसरे से सीखेंगे. उन्होंने कहा कि इस समझौता ज्ञापन का उद्देश्य सहयोगात्मक शिक्षा कार्यक्रम, क्षमता निर्माण और संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं को बढ़ावा देना है. डॉ अशोक के श्रीवास्तव ने कहा कि सहयोग सभी आयामों में संस्थानों के आपसी विकास के लिए संभावित मार्ग है. इसमें क्षमता निर्माण और आजीवन सीखने, अकादमिक उत्कृष्टता और इसके विकास, अत्याधुनिक कार्यक्रमों को बढ़ावा देना और झारखंड राज्य की शैक्षणिक आवश्यकता को पूरा करना शामिल है.

डॉ अशोक के श्रीवास्तव ने कहा कि रिम्स और एमिटी विश्वविद्यालय सहयोगी परियोजनाओं के लिए संयुक्त रूप से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फंडिंग एजेंसियों को आवेदन करने की बात कही. रिम्स और एमिटी विश्वविद्यालय संयुक्त रूप से पारस्परिक हित के विषयों पर वैज्ञानिक कार्यशालाओं, संगोष्ठियों, प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों/सम्मेलनों का आयोजन करेंगे. एमिटी नैदानिक मनोविज्ञान संस्थान के छात्र अनुसंधान परियोजनाओं के विकास में रिम्स के साथ सहयोग करेंगे और अनुसंधान परियोजनाओं को संचालित करने के लिए प्रयोगशाला की सुविधाओं का उपयोग करेंगे. इस तरह के समझौता ज्ञापनों का व्यापक परिप्रेक्ष्य होगा. यह न केवल क्षेत्र और राज्य के लिए बल्कि पूरे देश के लिए फायदेमंद होगा.

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