AURANGABAD में कई गांव के लोग वोट बहिष्कार का बना रहे हैं मन, जानें कारण…

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औरंगाबाद: औरंगाबाद में लोकसभा चुनाव में एक तरफ जिला प्रशासन मतदान प्रतिशत बढ़ाने को लेकर जगह जगह जागरूकता अभियान चला रही है तो दूसरी तरफ करीब आधा दर्जन गांव में लोग आजीवन मतदान नहीं करने का संकल्प लेने की तैयारी कर रहे हैं। लोगों ने औरंगाबाद में स्थित एनटीपीसी और बीआरबीसीएल के वादाखिलाफी से नाराज होकर सड़क पर उतर कर नारेबाजी की और वोट बहिष्कार करने की बात कही।

लोगों का कहना है कि एनटीपीसी और बीआरबीसीएल की मनमानी दिनों दिन बढ़ता ही जा रहा है। विद्युत् परियोजना के इन दोनों कंपनियों के खिलाफ नबीनगर विधानसभा के मेह पंचायत के लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। उसके बाद धमनी और आसपास के पंचायत की जनता भी दोनों विद्युत् परियोजनाओं के खिलाफ खड़े हो गए। मामले में प्रेस वार्ता कर समाजसेवी राधे प्रसाद यादव, बीडीसी सुनील गुप्ता, पैक्स अध्यक्ष मेह नारायण सिंह ने बताया कि जब तक हमारी समस्याओं का समाधान नहीं होता है तब तक हम लोग चुनाव में वोट बहिष्कार जारी रहेगा।

उन्होंने बताया कि लोकतंत्र के इस महापर्व में वोट के महत्व को हम अच्छे से समझते हैं, वोट बहिष्कार का निर्णय लेना प्रशासनिक गतिविधियों में बाधा डालना नहीं बल्कि हमारी मज़बूरी है। पिछले कई वर्षों से हमारी मांगें अब तक नजरअंदाज की जा रही है। हमारा निर्णय है कि जब तक हमारी मांगें नहीं मानी जाएगी तब तक हमलोग वोट बहिष्कार करते रहेंगे। उनलोगों ने अपनी मांगों पर बात करते हुए कहा कि हमारी आठ मांगें हैं और इसको लेकर हमलोग एनटीपीसी और बीआरबीसीएल सहित आलाधिकारियों से लगातार गुहार लगा रहे हैं लेकिन किसी के कानों पर जू नहीं रेंग रहा है।

यदि विद्युत् परियोजना एवं प्रशासनिक अधिकारियों को लगता है कि चुनाव मद्देनजर हमलोगों ने वोट बहिष्कार का निर्णय लिया है तो इसका कारण है कि हमारी मांगों से संबंधित दस्तावेज उनकी फाइलों में कहीं धूल फांक रही है। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने यह सोच कर एनटीपीसी और बीआरबीसीएल को अपनी जमीन दी थी कि यहां विकास होगा।

जमीन लेने से पहले लोगों को गांव गांव में घूम कर बताया गया था कि अगर यहां विद्युत् प्लांट लग जाता है तो यहां की सड़क, गली, विद्युत् सुविधा, स्वास्थ्य सुविधाएं, शिक्षा की सुविधाएं मुफ्त में दी जाएगी लेकिन ऐसी कोई सुविधा यहाँ के लोगों को नसीब नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि सुविधा मिलने की बात तो दूर की बात है उलटे लोग दोनों विद्युत् परियोजनाओं के उड़ती रख से परेशान हैं। यहां के लोग आने वाले समय में स्वसन संबंधित बीमारी से ग्रसित होंगे। इस बाबत एनटीपीसी और बीआरबीसीएल के अधिकारियों को कई बार कहा गया लेकिन उन्होंने इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया।

ग्रामीण की मांग
ग्रामीणों की कुल आठ मांगें हैं जिसमें एनटीपीसी बीआरबीसीएल परियोजना निर्माण के समय बिशुनपुर कैनाल को बंद कर दिया गया था उसे चालु करने, दोनों परियोजनाओं से निकलने वाले जहरीली राख को नियंत्रित करने, विस्थापित किसानों को मुफ्त बिजली देने, विस्थापित प्रभावित क्षेत्र के मजूदरों को दैनिक 750 रूपये मजदूरी भत्ता देने, सीएसआर स्कीम के स्कीम का निर्देश सार्वजनिक करने, परियोजना के अंतर्गत प्रभावित क्षेत्र में 80 प्रतिशत लोगों को रोजगार देने और परियोजना के निर्माण के समय किसान मजदुर पर किये गए मुकदमा को वापस लेना है।

प्लांट बनाते किए गए थे कई वादे:
ग्रामीणों का आरोप है कि एनटीपीसी एवं बीआरबीसीएल ने प्लांट बनाते समय वादा किया था कि यहां लोकल युवाओं को नौकरी में तवज्जो दी जाएगी। फ्री बिजली, बच्चों की पढ़ाई के लिए मेडीकल कॉलेज सहित अन्य सुविधाएं देने का आश्वासन दिया था। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। बीते कई सालों में एक भी वादा पूरा नहीं किया गया। इस लिए वोट बहिष्कार का निर्णय गया है। इस संबध में अधिक से अधिक लोगों को जागरूक किया जा रहा है।

इस मौके पर विश्वनाथ पटेल, सुमंत पटेल, राजाराम सिंह पटेल, निराला पटेल, रामशीष सिंह यादव, रवि प्रताप सिंह, मेह उपमुखिया अवधेश चंद्रावंशी, बिकेश्वर सिंह, धर्मेद्र पटेल, करमदेव पासवान, कईल पासवान, सुरेन्द्र सिंह, हरि सिंह, कमलेश पटेल, राजेंद्र सिंह, अवधेश यादव, घुरा राम , रामविलास पाल, ललन यादव सहित कई अन्य मौजूद रहे।

औरंगाबाद से दीनानाथ मौआर की रिपोर्ट

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