बांग्लादेश : तख्तापलट में था पाकिस्तानी हाथ ? शेख हसीना को पनाह देने के साथ ही बांग्लादेशी सेना के संपर्क में है भारत

डिजीटल डेस्क :  बांग्लादेशतख्तापलट में था पाकिस्तानी हाथ ? शेख हसीना को पनाह देने के साथ ही बांग्लादेशी सेना के संपर्क में है भारत। पड़ोसी मुल्क में 24 घंटे पहले हुए तख्तापलट की घटना पर भारत लगातार पैनी निगाह रखे हुए है। पूरे मामले की संजीदगी इसी से समझी जा सकती है कि एक दिन पहले अपना मुल्क बांग्लादेश छोड़कर सुरक्षित ठिकाने की तलाश में पश्चिम बंगाल के रास्ते झारखंड और बिहार के वायुमार्ग से होकर राजधानी दिल्ली के निकट यूपी के गाजियाबाद में हिंडन एयरबेस पर उतरीं पूर्व पीएम शेख हसीना वाजेद को भारत ने तत्काल पनाह दी है। साथ ही मंगलवार को राजधानी नई दिल्ली में भारत सरकार की ओर से आहूत सर्वदलीय बैठक में सभी प्रमुख दलों के नेता शामिल हुए और पड़ोसी मुल्क के हालात पर भारत के स्टैंड पर एकमत रहे। राहुल गांधी समेत अन्य विपक्षी दलों के नेताओं के सवाल के जवाब में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत अभी शेख हसीना वाजेद को स्पेस दे रहा है और हालात पर पैनी निगरानी रखते हुए लगातार बांग्लादेशी सेना के संपर्क में है।

बांग्लादेश के तख्तापलट में रहा पाकिस्तानी हाथ लेकिन भारत की टिप्पणी – अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी

अशांत बांग्लादेश को लेकर मंगलवार को हुई सर्वदलीय बैठक हुई में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बांग्लादेश हिंसा में बाहरी ताकतों को लेकर सवाल किया। इस पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि अभी ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। हां, यह अवश्य है कि एक पाकिस्तानी जनरल ने प्रोफाइल फोटो बदलकर बांग्लादेश में हुई हिंसा को खुलकर समर्थन किया है। विदेश मंत्री ने कहा कि बांग्लादेश के हालात पर भारत लगातार नजर बनाये हुए है। पड़ोसी मुल्क में अशांति पर सरकार ने अपना रुख साफ करते हुए कहा कि बाहरी ताकत का हाथ होने की बात करना अभी जल्दबाजी है। विदेश मंत्री ने इतना पुष्ट किया है कि एक पाकिस्तानी राजनयिक ने अपनी प्रोफाइल पिक्चर चेंज की है और बांग्लादेश में हुई हिंसा का समर्थन किया। वह अधिकारी पूरे अशांति और तख्तापलट के दौरान ढाका में ही था, लेकिन अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।

अशांत बांग्लादेश में अब भी फंसे हैं 12 हजार भारतीय छात्र, सरकार उनकी सुरक्षित वापसी पर प्रयासरत

इस सर्वदलीय बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि हम बांग्लादेश आर्मी के टच में हैं। हिंसाग्रस्त बांग्लादेश में 20 हजार भारतीय थे और उनमें भी ज्यादातर छात्र थे। बांग्लादेश में जारी हिंसा और उपद्रव को देखते हुए भारत की ओर से वहां रह रहे अपने नागरिकों और छात्रों के लिए जारी की गई एडवाइजरी के बाद करीब 8 हजार छात्र लौट चुके हैं और शेष 12 हजार के भी सुरक्षित स्वदेश वापसी पर भारत सरकार का पूरा फोकस है। अपने नागरिकों को हर हाल में स्वदेश लाने के लिए भारतीय दूतावास और उच्चायोग लगातार बांग्लादेश में सक्रिय है और बांग्लादेश से लगती अपनी सभी सीमाओं पर सेना, सीमा सुरक्षा बल समेत तमाम प्रशासनिक और सुरक्षा अधिकारी लगातार निगाह रखे हए हैं। सीमा पर पहुंच रहे भारतीयों को सकुशल तुरंत स्वदेश वापसी के लिए लगातार तत्परतापूर्ण तरीके से काम जारी है।

एस. जयशंकर बोले- भारत सरकार शेख हसीना को ठौर देने के पक्ष में, विपक्ष भी सहमत

सर्वदलीय बैठक में विपरक्षी दलों के नेताओं के सवाल के जवाब में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया कि सरकार बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना को मौजूदा हालात में ठौर देने के पक्ष में है। शेख हसीना को सरकार थोड़ा स्पेस देना चाहती है।  विपक्ष ने इस दौरान कहा कि वो इस मुद्दे पर सरकार के साथ है। पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने बॉर्डर के बारे में पूछा कि जिसपर सरकार की तरफ से बताया गया कि अभी तक इतनी संख्या बॉर्डर पर नहीं आई कि चिंताजनक हो लेकिन क्लोज़ मॉनिटरिंग चल रही है। बाद में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में जयशंकर ने संसद भवन में हुई बैठक की तस्वीरें भी साझा कीं। विदेश मंत्री ने लिखा कि आज संसद में एक सर्वदलीय बैठक में बांग्लादेश के हालिया घटनाक्रमों के बारे में जानकारी दी। बैठक के दौरान जताए गए सर्वसम्मत समर्थन और तालमेल के लिए सभी दलों की विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सराहना की है। बता दें कि बांग्लादेश में आरक्षण विरोधी हिंसक प्रदर्शनों के बीच प्रधानमंत्री शेख हसीना के अचानक इस्तीफा देने और देश छोड़कर जाने से वहां अराजकता की स्थिति पैदा हो गई है। शेख हसीना वाजेद गत सोमवार शाम बांग्लादेशी वायुसेना के एक सी-130 जे सैन्य विमान से भारत पहुंचीं। उनकी लंदन जाने की योजना है और उनकी योजना को लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने गत सोमवार को ही सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति की बैठक की अध्यक्षता की। माना जा रहा है कि शेख हसीना को लेकर तत्काल ब्रिटेन सरकार की ओर से कोई हरी झंडी नहीं मिली है और इसीलिए उन्हें भारत सरकार तत्काल अपने यहां ठौर देने का मन बनाया है।

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