रांची: झारखंड में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच, झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) और बीजेपी के बीच की टकरार और भी तीखी हो गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कोल्हान रीजन में बीजेपी की स्थिति को कमजोर करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इस क्षेत्र में 14 सीटें हैं, जिनमें से 2019 में बीजेपी और उसके सहयोगी दलों का खाता तक नहीं खुला था। हेमंत सोरेन ने कोल्हान के नेताओं को बुलाकर, 2019 के प्रदर्शन को दोहराने का टास्क दिया है।
हेमंत सोरेन ने चंपई सोरेन को घेरने की कमान खुद संभाली है। चंपई, जो जेएमएम छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे, अब बीजेपी के लिए एक चुनौती बन गए हैं। हेमंत सोरेन ने चंपई के खिलाफ एक मजबूत रणनीति बनाई है, जिसमें उन्होंने चंपई के खिलाफ किसी भी बड़े नेता को टिकट देने की योजना बनाई है, जबकि चंपई को अपने पाले में करने वाली बीजेपी भी अब परेशान नजर आ रही है।
इस बीच, हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन ने भी बीजेपी को ललकारते हुए कहा है कि अब बीजेपी को उसका “दर्द” लौटाने का समय आ गया है। उन्होंने यह भी कहा कि जेएमएम अपने कार्यकर्ताओं के साथ मजबूती से खड़ी है और पार्टी की ताकत कार्यकर्ताओं में है, न कि नेताओं में। कल्पना सोरेन ने साफ तौर पर कहा कि जिन नेताओं ने पार्टी छोड़ी और बीजेपी में गए, उन्हें विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ेगा।
जेपीएमएम की तरफ से चंपई सोरेन के खिलाफ एक मजबूत रणनीति बनाई जा रही है। इसके साथ ही, चंपई को लाने वाली बीजेपी के खिलाफ भी जेएमएम के तेवर बहुत तीखे हैं। बीजेपी को समझ आ रहा है कि चंपई की कोशिशें उसे लाभ नहीं पहुंचा रही हैं, और जेएमएम की तैयारियों के चलते चंपई की राह आसान नहीं रहने वाली है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस राजनीतिक खेल में कौन सी पार्टी विजयी होती है, और चुनाव के नतीजे किस ओर पलटेगें।


















