कोडरमा: जिसे “गेटवे ऑफ झारखंड” के नाम से भी जाना जाता है, आजकल अपनी राजनीतिक हलचल और आरोप-प्रत्यारोप के कारण चर्चा में है। 4.06 लाख मतदाताओं वाला यह क्षेत्र, जहां यादव, मुस्लिम और ओबीसी मतदाता प्रभावी हैं, बेरोजगारी और पलायन की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। हालांकि, क्षेत्र की प्रमुख आजीविका खेती, दिहाड़ी मजदूरी और घरेलू उद्योग हैं, लेकिन यहाँ के लोग बेहतर अवसरों की तलाश में अक्सर पलायन कर जाते हैं।

राजद का गढ़ माने जाने वाले कोडरमा में 2014 में भाजपा ने धमाकेदार एंट्री की। डॉ. नीरा यादव ने राजद की दिग्गज नेता अन्नपूर्णा देवी को हराकर राजनीति का खेल पलट दिया था। इसके बाद से भाजपा की पकड़ यहां मजबूत रही है। हालांकि, 2019 में अन्नपूर्णा देवी भाजपा के टिकट पर सांसद बन गईं, लेकिन नीरा यादव ने अपनी जीत बरकरार रखी। अब, 2024 में तीसरी बार नीरा यादव मैदान में हैं, और उन्हें कड़ी चुनौती मिल रही है जेल में बंद राजद नेता कैलाश यादव से।
राजद की लगातार दो हार के बाद, इस बार पार्टी ने बिहार के बालू व्यवसायी सुभाष प्रसाद यादव को कोडरमा सीट पर चुनौती देने के लिए मैदान में उतारा है। 2019 में मामूली अंतर से हारने वाले अमिताभ कुमार को छोड़कर सुभाष को अवसर दिया गया है। सुभाष पिछले चुनाव के बाद से क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं, लेकिन चुनाव से पहले उनके खिलाफ ईडी की रेड पड़ी, जिसके चलते उन्हें जेल जाना पड़ा। जेल में रहते हुए भी उन्होंने नामांकन भरा और चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमाई। अब उन्हें इंडिया गठबंधन का समर्थन भी हासिल है, जिससे वह मजबूत उम्मीदवार बनकर उभरे हैं।

इस चुनाव में मुकाबला भाजपा और राजद के बीच ही नहीं, बल्कि निर्दलीय उम्मीदवार शालिनी गुप्ता की मौजूदगी से त्रिकोणीय हो गया है। शालिनी 2019 में तीसरे स्थान पर रही थीं और अब भाजपा और आजसू के गठबंधन के बाद वे फिर से मैदान में हैं। कोडरमा की सीट भाजपा के पास है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि भाजपा-राजद के बीच कौन जीत जाएगा, खासकर जब विपक्षी खेमा भी एकजुट हो चुका है।

कुल मिलाकर, कोडरमा की राजनीति भ्रष्टाचार, कूटनीति और आरोपों की धारा से गुजर रही है। इस बार चुनावी माहौल में सुभाष यादव की जेल यात्रा और शालिनी गुप्ता की निर्दलीय उपस्थिति ने राजनीति के समीकरण को बदल दिया है। अब यह देखना होगा कि आखिर कौन इस “गेटवे” का असली गेटकीपर बनेगा।


