डिजीटल डेस्क : Manipur में भाजपा सरकार को झटका, एनपीपी ने वापस लिया समर्थन। Manipur में जातीय हिंसा के बीच रविवार को भाजपा की बीरेन सिंह सरकार को बड़ा झटका लगा है। एनडीए की सहयोगी पार्टी नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) ने सरकार से समर्थन वापस लेने का ऐलान कर दिया है।
हालांकि एनपीपी के समर्थन वापसी से बीरेन सिंह सरकार को खतरा नहीं है, लेकिन राज्य में लगातार जारी अव्यवस्था और फिर से भड़की हिंसा के बीच एनपीपी की समर्थन वापसी एक बड़ा कदम है।
एनपीपी ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को पत्र लिखकर कहा कि बीरेन सिंह की सरकार हिंसा रोकने में विफल रही है।
अचानक चुनावी दौरा रद्द कर दिल्ली पहुंचे थे अमित शाह
Manipur में एनडीए का सहयोगी दल एनपीपी के बीरेन सिंह सरकार से समर्थन वापसी की घोषणा से पहले ही राज्य में चल रहे चरम अव्यवस्था को भांपते हुए ही केंद्रीय गृह मंत्री अचानक रविवार को अपना महाराष्ट्र का चुनावी कार्यक्रम रद्द कर दिया था।
गृह मंत्री अमित शाह महाराष्ट्र के नागपुर से ही अपना आगे के चुनावी कार्यक्रमों को रद्द करने का फैसला लिया और दिल्ली को लौटे। महाराष्ट्र में गृह मंत्री अमित शाह को 4 चुनावी रैलियां करनी थीं लेकिन Manipur के हालात को ध्यान में रखते हुए वह तुरंत दिल्ली पहुंचे थे।
वहां से सीआरपीएफ के डीजीपी को Manipur भेजने की जानकारी दी गई थी। Manipur में सुरक्षा स्थिति को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को समीक्षा बैठक की। इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री ने शीर्ष अधिकारियों को पूर्वोत्तर राज्य में शांति सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाने का निर्देश दिया।

Manipur में बिना नेशनल पीपुल्स पार्टी के भी बहुमत में है एनडीए…
एनपीपी के समर्थन वापसी के बाद भी Manipur में भाजपा की अगुवाई वाले एनडीए सरकार के बने रहने के पीछे कुछ आंकड़े हैं। Manipur में में कुल विधानसभा सदस्यों की संख्या 60 है। एनडीए के कुल विधायकों की संख्या 53 है।
इनमें भाजपा के विधायकों की संख्या 37 है, जबकि एनपीएफ के 5, जेडयू के एक और निर्दलीय तीन विधायकों का समर्थन प्राप्त है। एपीपी के 7 विधायक भी एनडीए का समर्थन कर रहे थे। विपक्षी पार्टियों में कांग्रेस के 5 और केपीए के 2 विधायक हैं।

नड्डा को भेजे समर्थन वापसी पत्र में एनपीपी ने लिखा – बहुत ही खराब हुई Manipur की स्थिति
एनपीपी ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को भेजे गए समर्थन वापसी वाले पत्र में Manipur के लिहाज से सियासी तौर अहम बातें लिखी हैं।
एनपीपी ने लिखा है – ‘…पिछले कुछ दिनों में Manipur में स्थिति बहुत ही खराब हो गई है और कई निर्दोष लोगों की जान चली गई है। राज्य के लोग बेहद कष्ट से गुजर रहे हैं।
…हमें विश्वास है कि बीरेन सिंह के नेतृत्व वाली Manipur राज्य सरकार संकट को हल करने और सामान्य स्थिति बहाल करने में पूरी तरह विफल रही है।
…वर्तमान स्थिति को ध्यान में रखते हुए नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) ने Manipur राज्य में बीरेन सिंह सरकार से अपना समर्थन तत्काल प्रभाव से वापस लेने का फैसला किया है’।

Manipur की ताजा स्थिति का ब्योरा एकनजर में …..
बता दें कि पिछले साल मई से Manipur जातीय संघर्ष वाली हिंसा से जूझ रहा है। पिछले साल Manipur में महिलाओं और बच्चों के शव बरामद होने के बाद विरोध प्रदर्शन और हिंसा हुई थी। उसके बाद वहां की स्थिति अस्थिर बनी हुई है। बीच में हालात नियंत्रित होने के बाद बीते शनिवार की रात फिर से हिंसक विरोध प्रदर्शन की ताजा घटनाएं हुईं।
जिरीबाम जिले में उग्रवादियों द्वारा 3 महिलाओं और 3 बच्चों की हत्या के बाद बीते शनिवार को ही 3 राज्य मंत्रियों और 6 विधायकों के आवासों पर हमला बोल दिया था। उसके बाद वहां अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगा दिया गया था।
इससे पहले केंद्र सरकार ने हिंसा प्रभावित जिरीबाम सहित मणिपुर के 6 पुलिस थाना क्षेत्रों में सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम लागू कर दिया है।


















